राजस्थान जिला दर्शन : 'करौली जिला दर्शन'

गोपालपाल के उपनाम से प्रसिद्ध करौली जिले को 1348 ईस्वी में यादव वंश के शासक अर्जुनपाल द्वारा भद्रावती नदी के किनारे कल्याणपुरी के नाम से बसाया गया। करौली जिला सवाई माधोपुर से अलग कर 19 जुलाई 1997 को राजस्थान का स्वतंत्र 32 वा जिला बना। 1040 ईस्वी में करौली के यदुवंश के शासन की स्थापना विजयपाल ने की थी। 1650 ईस्वी में यहां के शासक धर्मपाल द्वितीय ने करौली को अपनी राजधानी बनाया। करौली  जिले का कुल क्षेत्रफल : 5524 वर्ग किलोमीटर, 2011 की जनगणना के अनुसार करौली जिले की जनसँख्या : 11,58,459 है। 
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Karouli GK : Karouli Jila Darshan

    करौली के प्रमुख उपनाम/प्राचीन नाम

    • डांग की रानी 
    • गोपालपाल

    करौली जिले की अक्षांशीय/देशांतरीय स्थिति


    • अक्षांशीय स्थिति : 26 डिग्री 3 मिनट उत्तरी अक्षांश से 26 डिग्री 49 मिनट उत्तरी अक्षांश तक। 
    • देशांतरीय स्थिति : 76डिग्री 35 मिनट पूर्वी देशांतर से 77 डिग्री 26 मिनट पूर्वी देशांतर तक। 

    करौली जिले के प्रमुख मेले और त्यौहार


    • केला देवी मेला - यह मेला करौली में चैत्र शुक्ला प्रथम से दशमी तक लगता है। इस मेले को लक्खी मेला भी कहते है। 
    • जगदीशजी मेला - यह मेला नादौती (करौली) में श्रावण मास में भरता है। 
    • श्री महावीर जी मेला - यह मेला महावीरजी (करौली) में चैत्र शुक्ला त्रयोदशी से वैशाख कृष्णा द्वितीय तक भरता है। यह मेला जैनियों का सबसे बड़ा मेला है। 
    • महाशिवरात्रि पशु मेला - यह मेला फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी से फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तक करौली में भरता है। 


    करौली जिले के प्रमुख मंदिर

    • केला देवी मंदिर - केला देवी का यह मंदिर करौली में त्रिकूट पर्वत की घाटी में कालीसिल  नदी के किनारे स्थित है। इसका निर्माण गोपालसिंह द्वारा 19वीं शताब्दी में करवाया गया था। केला देवी करौली के यदुवंशी राजवंश की कुलदेवी थी। कैला देवी के इस मंदिर के सामने बोहरा भक्त की छतरी है। केला देवी की भक्ति में लोक देवता लांगुरिया के लोक गीत गाए जाते हैं। यहां पर कैला देवी का प्रसिद्ध लक्खी मेला चैत्र शुक्ल अष्टमी को भरता है। 
    • अंजनी माता का मंदिर - यहां पर अंजनी माता की श्री हनुमान जी को स्तनपान कराती हुई भारत की एकमात्र मूर्ति है।
    • मदन मोहनजी का मंदिर -  मदनमोहनजी की मूर्ति ब्रजभूमि वृन्दावन से मुस्लिम आक्रांताओं से बचाकर लाई गयी थी।  1748 ईस्वी में इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था।
    • श्री महावीर जी का मंदिर - यह मंदिर भी करौली में स्थित है। इस मंदिर में सभी धर्म, सम्प्रदाय के लोग सद्भाव से इस महान तीर्थ की यात्रा करते है। यह मंदिर करौली के लाल पत्थर और संगमरमर के योग से चतुष्कोण आकार में निर्मित है। 

    करौली जिले के पर्यटन स्थल 


    • पांचना बांध/सिंचाई परियोजना - यह गुड़ला बांध के पास अमेरिका के सहयोग से (भद्रावती अटा,  बरखेड़ा, माची व भैसावट के संगम पर) राजस्थान का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध बनाया गया। 
    • कैला देवी वन्य जीव अभ्यारण्य - यह अभ्यारण्य राजस्थान-मध्यप्रदेश सीमा से लगा हुआ करौली जिले में स्थित है। इस अभ्यारण्य के पश्चिमी किनारे से बनास नदी बहती है तथा दक्षिण-पूर्व दिशा में चम्बल नदी का प्रवाह होता है। इस अभ्यारण्य में चिंकारा, जंगली सूअर, सियार, भेड़िया, हाइना, चीतल, साम्भर, लोमड़ी आदि वन्य जीव पाए जाते है। यहां पर कैला देवी मंदिर के कारण इस अभ्यारण्य का नाम कैला देवी वन्य जीव अभ्यारण्य पड़ा। 
    • राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल वन्य जीव अभ्यारण्य - यह अभ्यारण्य घड़ियालों की प्रजाति को संरक्षित करने के कारण 'घड़ियालों का संसार' कहलाता है। यह अभ्यारण्य राजस्थान का एकमात्र जलीय अभ्यारण्य है। यह अभ्यारण्य करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर व कोटा जिलों में फैला हुआ है। यहां पर शिशुमार, गांगेय सूंप, ऊदबिलाव जैसे स्तनधारी जीव पाए जाते है। 
    • मंडरायल दुर्ग - इस दुर्ग करौली दुर्ग/ग्वालियर दुर्ग की कुंजी कहते है। इसमें मर्दानशाह पीर की दरगाह स्थित है। 
    • तिमनगढ़/त्रिभुवनगढ़ - यह मूर्ति तस्करी के कारण चर्चा में रहा है। 
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    करौली के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न/तथ्य

    • लालपत्थर - भारत के संसद भवन में करौली के लाल पत्थर का प्रयोग किया गया है जबकि राष्ट्रपति भवन में धौलपुर का लाल पत्थर प्रयुक्त हुआ है। 
    • कैला देवी महोत्सव अप्रैल महीने में करौली में आयोजित होता है। 
    • लांगुरिया नृत्य - यह नृत्य गुर्जर व मीणा जाति के लोग कैला देवी मेले में करते है। 
    • मर्दान शाह पीर की दरगाह करौली जिले में है। 
    • गोपालसिंह की छतरी करौली जिले में है। 
    • 1857 की क्रांति के समय करौली के राजा मदन पाल था। 
    • करौली प्रजामण्डल -  करौली प्रजामण्डल की स्थापना 1938 ईस्वी में त्रिलोक चंद्र माथुर द्वारा की गयी। 
    • कबीरशाह का मकबरा एवं शाही कुंड करौली जिले में स्थित है। 
    • हरसुख विलास - करौली में महाराजा हरबक्षपाल द्वारा स्थापित हरसुख विलास सफेद चंदन से महकता उद्यान है। 

    आज के इस पोस्ट में हमने "राजस्थान के जिला दर्शन" की श्रृंखला में "करौली जिला दर्शन" को पूरी तरह से कवर करने की पूरी कोशिश की हैं। इसमें करौली का सामान्य परिचय, करौली के उपनाम, 2011 की जनगणना के अनुसार करौली जिले की जनसँख्या / साक्षरता / घनत्व / लिंगानुपात, करौली का क्षेत्रफल, करौली की मानचित्र में स्थिति, करौली में विधानसभा क्षेत्र, करौली के मेले, करौली के प्रमुख मंदिर,करौली के पर्यटन स्थल एवं इसके अलावा जितने भी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न बन सकते थे, उन सभी को शामिल कर पेश किया गया है। मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सभी पाठकों को मेरी यह पोस्ट पसंद आयी होगी। आप सभी को यह पोस्ट कैसी लगी आप मुझे कमेंट करके जरूर बताएं।
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