राजस्थान जिला दर्शन : 'झालावाड़ जिला दर्शन'
'राजस्थान का नागपुर' के उपनाम से प्रसिद्ध राजस्थान के झालावाड़ नगर की स्थापना कोटा राज्य के फौजदार व प्रशासक झाला जालिम सिंह द्वारा 1791 ईस्वी में की गई थी। उस समय इसका नाम उम्मेदपुरा की सावनी था। अंग्रेजों द्वारा कोटा के प्रमुख शासक जाला जालिम सिंह के पौत्र महारावल झाला मदन सिंह के लिए 1838 में कोटा रियासत से पृथक कर झालावाड़ रियासत का निर्माण किया था। 
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Jhalawar Jila Darshan


    झालावाड़ के उपनाम/प्राचीन नाम 

    • राजस्थान का नागपुर (सर्वाधिक संतरा उत्पादन के कारण) 
    • राजस्थान का चेरापूंजी 

    झालावाड़ जिले का सामान्य परिचय

    • झालावाड़ का क्षेत्रफल : 6219 वर्ग किलोमीटर। 
    • झालावाड़ जिले में तहसीलों की संख्या : 7  
    • झालावाड़ में उपखंड ओं की संख्या : 5 
    • झालावाड़ में पंचायत समितियों की संख्या : 6

    झालावाड़ जिले की मानचित्र में स्थिति एवं विस्तार 

    • अक्षांशीय स्थिति : 23 डिग्री 45 मिनट 20 सेकंड उत्तरी अक्षांश 24 डिग्री 52 मिनट 17 सेकंड उत्तरी अक्षांश तक। 
    • देशांतरीय स्थिति : 75 डिग्री 27 मिनट 35 सेकंड पूर्वी देशांतर से 76 डिग्री 56 मिनट 48 सेकंड पूर्वी देशांतर तक

    झालावाड़ जिले के विधानसभा क्षेत्र 

    झालावाड़ जिले में कुल 4 विधानसभा क्षेत्र हैं जिनके नाम निम्न है :-
    • झालरापाटन 
    • खानपुर 
    • डग
    • मनोहर थाना

    2011 की जनगणना के अनुसार झालावाड़ जिले की जनसंख्या / घनत्व / लिंगानुपात / साक्षरता के आंकड़े

    • झालावाड़ की कुल जनसंख्या : 14,11,129 
    • झालावाड़ का लिंगानुपात : 946 
    • झालावाड़ में जनसंख्या घनत्व : 227 
    • झालावाड़ की साक्षरता दर : 61.5% 
    • झालावाड़ में पुरुष साक्षरता दर : 75.8% 
    • झालावाड़ में महिला साक्षरता दर : 46.5%

    झालावाड़ जिले के प्रमुख मेले और त्यौहार

    • चंद्रभागा पशु मेला - यह मेला झालावाड़ के झालरापाटन में कार्तिक पूर्णिमा को भरता है। चंद्रभागा मेले को हाड़ौती का सुरंगा मेला भी कहा जाता है। यहां राज्य स्तरीय पशु मेले का भी आयोजन होता है। चंद्रभागा नदी पर भरने वाला यह मेला मालवीय वंश के पशुओं के लिए प्रसिद्ध है। 
    • गोमती सागर मेला - यह मेला भी झालावाड़ जिले के झालरापाटन में वैशाख पूर्णिमा को आयोजित होता है। 
    • गागरोन उर्स - यह भी झालावाड़ के गागरोन में जेठ शुक्ला प्रथम (चांद से) आयोजित होता है। 
    • बंगाली बाबा का मेला - यह मेला झालावाड़ के खानपुर विधानसभा क्षेत्र में मकर सक्रांति के अवसर पर भरता है। 

    झालावाड़ के प्रमुख मंदिर | झालावाड़ के शीर्ष मंदिर


    ✍ शीतलेश्वर (चंद्रमौलेश्वर) महादेव मंदिर➡️
    यह मंदिर झालावाड़ में चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित है। इसका निर्माण राजा दुर्गगण के सामंत वाप्पक ने 689 ईसवी में करवाया था। इस मंदिर में लकुलीश की काले पत्थर की सुंदर एवं आकर्षक प्रतिमा बनी हुई है। इस मंदिर में सबसे आकर्षक चीज कीचक है। यह सभामंडप के स्तंभों के ऊपर विशाल पट्टिकाओं को जोड़ने के काम आते हैं। यह  गुप्तकालीन मंदिर है। यह एक अर्धनारीश्वर मंदिर हैं अर्थात आधा शिव  तथा आधा पार्वती। 

    ✍ चांदखेड़ी का जैन मंदिर ➡️
    यह मंदिर भी झालावाड़ के खानपुर में स्थित है। इस मंदिर में आदिनाथ की विशाल प्रतिमा विराजमान है। यह मंदिर भूगर्भ में बना हुआ है। 

    ✍ पद्मनाथ मंदिर (झालरापाटन का वैष्णव मंदिर) ➡️
    इस मंदिर को सात सहेलियों का मंदिर तथा घंटियों का मंदिर भी कहा जाता है। कर्नल जेम्स टॉड ने इस मंदिर को चारभुजा का मंदिर भी कहा है। यह मंदिर कच्छपघात  शैली का है। 

    ✍ चंद्रभागा मंदिर ➡️
    यह मंदिर चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित है। इसमें कार्तिक पूर्णिमा को विशाल मेला भरता है। 

    ✍झालरापाटन का शांतिनाथ जैन मंदिर ➡️
    यह मंदिर भी कच्छपघात  शैली का बना हुआ हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में काले रंग के पत्थर की आदमकदीय  शांतिनाथ दिगंबर जैन प्रतिमा है। 

    ✍ द्वारकाधीश मंदिर ➡️
    इस मंदिर का निर्माण जालिम सिंह द्वारा गोमती सागर तालाब के निकट करवाया गया था। 

    ✍ सूर्य मंदिर (झालरापाटन) ➡️
    यह राजस्थान का सबसे प्राचीन सूर्य मंदिर है। इस मंदिर में सूर्य भगवान के घुटने तक जूते पहने हुए की प्रतिमा स्थापित है। 

    ✍ आदिनाथ दिगंबर का जैन मंदिर ➡️
    यह मंदिर झालावाड़ के चांदखेड़ी क्षेत्र में स्थित है। इस मंदिर में भगवान आदिनाथ की पद्मासन प्रतिमा स्थापित है। 

    ✍ नागेश्वर पार्श्वनाथ ➡️
    यह मंदिर भी झालावाड़ में चोमहला  में स्थित है। 

    झालावाड़ जिले के दर्शनीय स्थल/पर्यटन स्थल


    ✍ दर्रा/मुकुंदरा हिल्स वन्यजीव अभयारण्य ➡️
    यह अभ्यारण्य कोटा-झालावाड़ जिलों में स्थित है। 2003 में इसका नाम दर्रा अभयारण्य से बदलकर राजीव गांधी नेशनल पार्क रखा गया था तथा 2006 में वसुंधरा सरकार ने इसका नाम मुकुंदरा हिल्स पार्क रखकर इसे राष्ट्रीय उद्यान का स्तर प्रदान करने का प्रस्ताव पारित किया था। किंतु केंद्र ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी। यह अभ्यारण्य राज्य का तीसरा राष्ट्रीय उद्यान 9 जनवरी 2012 को तथा 9 अप्रैल 2013 को तीसरा टाइगर प्रोजेक्ट अभयारण्य घोषित किया गया। इस अभयारण्य के अंतर्गत तीन अभयारण्य आते हैं - दर्रा वन्यजीव अभयारण्य, चंबल वन्य जीव अभ्यारण्य तथा जसवंतसागर वन्यजीव अभयारण्य। इस अभयारण्य में गागरोनी तोते/हीरामन तोता/हिंदुओं का आकाश लोचन (मनुष्य की आवाज में बोलने वाला) पाया जाता है। इस अभ्यारण्य में गुप्तकालीन वनों का शिव मंदिर, अबली मीणी का महल (राजस्थान का दूसरा ताजमहल-कोटा में) स्थित है। इस अभयारण्य में घड़ियाल तथा सारस सर्वाधिक पाए जाते हैं। 

    ✍ भवानी नाट्यशाला ➡️
    इसका निर्माण भवानी सिंह द्वारा 1921 ईस्वी में पारसी ओपेरा शैली में करवाया गया था। 

    ✍ संत मीठे शाह की दरगाह ➡️
    आहू व कालीसिंध नदियों के संगम पर स्थित गागरोन दुर्ग के बाहर सूफी संत मीठे साहब की आकर्षक मजार स्थित है। यहां पर गागरोन उर्स जेष्ठ शुक्ल एकम को भरता है। 

    ✍ कोलवी की बौद्ध गुफाएं ➡️
    झालावाड़ के डग पंचायत क्षेत्र में कौलवी, विनायका, गुनई, हथियागौड़ में बौद्धकालीन गुफाएं स्थित है। क्यासरा गांव के निकट बौद्ध कालीन 35 गुफाएं है। 

    ✍ अबली मीणी का महल ➡️
    इस महल का निर्माण राव मुकुंदसिंह द्वारा दर्रा में मुकुंदरा पहाड़ियों पर अपनी पासवान अबली मीणी  के लिए करवाया था। 

    ✍ झालरापाटन ➡️
    झालरापाटन को घंटियों का शहर (City of Bells) के नाम से भी जाना जाता है। झालरापाटन नगर की स्थापना 1791 में कोटा राज्य के सेनापति जालिम सिंह ने चंद्रावती नगर के ध्वेसावशेषों पर करवाया था। यह शहर चंद्रावती नदी के तट पर स्थित है। यहां पर कार्तिक पूर्णिमा को चंद्रभागा मेला  आयोजित होता है। 

    ✍ गागरोन दुर्ग (जलदुर्ग) ➡️
    गागरोन दुर्ग के उपनाम - डोडगढ़, जलदुर्ग, मुस्तफाबाद, धूलरगढ़, उदकगढ़, गर्गराटपुर आदि। गागरोन दुर्ग का निर्माण 7-8 वीं शताब्दी में कालीसिंध एवं आहू नदियों के संगम पर मुकुंदरा पहाड़ी पर डोडा राजपूत (परमार) ने करवाया था। यहां पर प्रसिद्ध सूफी संत हमीमुद्दीन मीठे शाह की दरगाह स्थित है। यह राजस्थान का बिना नींव के एक चट्टान पर सीधा खड़ा एकमात्र दुर्ग है। इस दुर्ग में दो साके हुए थे। 

    ✍ गागरोन दुर्ग के प्रमुख साके ➡️
    गागरोन दुर्ग का पहला साका - मांडू सुल्तान अलपखां एवं अचलदास खींची के बीच 1423 ईस्वी में युद्ध हुआ था। इसमें अचलदास वीरगति को प्राप्त हो गए (केसरिया) तथा अचलदास की रानी उमादे सहित दुर्ग की सभी ललनाओं ने जौहर किया था। शिवदास गाडण द्वारा कृत 'अचलदास खींची री वचनिका' में इस युद्ध का वर्णन मिलता है। 
     गागरोन दुर्ग का दूसरा साका -  मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम एवं अचलदास खींची के पुत्र पाल्हणसी के मध्य युद्ध हुआ था। इसमें भी मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम  की विजय हुई थी। 

    ✍ मनोहर थाना का किला ➡️
    यह किला झालावाड़ में कालीखोह तथा परवन नदी के किनारे स्थित है। इस किले में शिव मंदिर एवं भीलो की आराध्य देवी विश्ववन्ति  का मंदिर स्थित है। 

    ✍ नवलखा दुर्ग ➡️
    इस दुर्ग की नींव झालावाड़ के झालरापाटन में पृथ्वी सिंह ने रखी थी। 

    ✍ संत पीपा का परिचय ➡️
    संत पीपा का मूल नाम प्रताप सिंह तथा उनके गुरु का नाम  रामानंद है। संत पीपा को दर्जी समुदाय के देवता भी कहा जाता है। संत पीपा के अनुसार भक्ति ही मोक्ष का प्रमुख साधन है। गागरोन दुर्ग में संत पीपा की छतरी तथा बाड़मेर के समदड़ी में संत पीपा का मंदिर स्थित है। संत पीपा की गुफा टोक के टोडारायसिंह में है। सिख धर्म के प्रसिद्ध ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में पीपा के भजनों को शामिल किया गया है। 

    झालावाड़ के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न/तथ्य | Jhalawar GK in Hindi

    • झालावाड़ के झालरापाटन के निकट एक नया पुलिस प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है। 
    • राजस्थान की प्रथम महिला मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे का विधानसभा क्षेत्र झालावाड़ का झालरापाटन है। 
    • झालावाड़ के अलनिया गांव में पुरापाषाणकालीन पेंटिंग प्राप्त हुई है। 
    • राजस्थान का दूसरा साइंस पार्क झालरापाटन में बनाया जाएगा। 
    • राजस्थान का सर्वाधिक अंतर राज्य सीमा बनाने वाला जिला झालावाड़ जिला है। 
    • तिथि अंकित शीतलेश्वर महादेव मंदिर झालरापाटन (झालावाड़) में स्थित है। 
    • किसान सहकारी क्रेडिट कार्ड का राज्यस्तरीय शुभारंभ झालावाड़ जिले से किया गया। 
    • राजस्थान की पहली अश्वगंधा मंडी झालावाड़ में है। 
    • राजस्थान का एकमात्र अल्पसंख्यक प्रशिक्षण महाविद्यालय - डॉक्टर जाकिर हुसैन मुस्लिम माइनॉरिटी बीएड कॉलेज झालावाड़ में स्थित है।
    • राजस्थान का सर्वाधिक आदर्श एवं सर्वाधिक वर्षा वाला जिला झालावाड़ जिला है। 
    • राजस्थान का न्यूनतम ऊन उत्पादक जिला झालावाड़ जिला है। 
    • झालावाड़ के झालरापाटन को ब्रज नगर भी कहा जाता है। 
    • गर्मियों में न्यूनतम आंधियां झालावाड़ जिले में चलती है। 
    • कंडेला झील (मानसरोवर झील), भीमसागर झालावाड़ में स्थित है। 
    • भीम सागर बांध, कालीसिंध बांध परियोजना, गागरिन सिंचाई परियोजना, पीपलाद बांध तथा हरिश्चंद्र सागर झालावाड़ में स्थित है। 
    • संतरा मंडी (भवानी मंडी में) तथा अश्वगंधा मंडी भी झालावाड़ में स्थित है। 
    • राजस्थान टैक्सटाइल्स मिल्स - इसकी स्थापना 1968 ईस्वी में भवानी मंडी झालावाड़ में की गई थी। 
    • मालवी गोवंश बार-बार नस्ल का प्रजनन केंद्र डग झालावाड़ में स्थित है
    • बिंदोरी नृत्य - विवाह एवं होली के अवसर पर झालावाड़ में किया जाता है। 

    आज के इस पोस्ट में हमने "राजस्थान के जिला दर्शन" की श्रृंखला में "झालावाड़ जिला दर्शन" को पूरी तरह से कवर करने की पूरी कोशिश की हैं। इसमें झालावाड़ का सामान्य परिचय,  झालावाड़ के उपनाम, 2011 की जनगणना के अनुसार  झालावाड़ जिले की जनसँख्या/साक्षरता/घनत्व/लिंगानुपात,  झालावाड़ का क्षेत्रफल,  झालावाड़ की मानचित्र में स्थिति,  झालावाड़ में विधानसभा क्षेत्र,  झालावाड़ के मेले,  झालावाड़ के प्रमुख मंदिर,  झालावाड़के पर्यटन स्थल एवं इसके अलावा जितने भी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न बन सकते थे, उन सभी को शामिल कर पेश किया गया है। मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सभी पाठकों को मेरी यह पोस्ट पसंद आयी होगी। आप सभी को यह पोस्ट कैसी लगी आप मुझे कमेंट करके जरूर बताएं।
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