राजस्थान जिला दर्शन : 'डूंगरपुर जिला दर्शन'


राजस्थान में पहाड़ों की नगरी के उपनाम से प्रसिद्ध डूंगरपुर जिले को डूंगरसिंह ने 1358 ईस्वी में बसाया था। उस समय यह कस्बा डूंगरिया भील की ढाणी के नाम से प्रसिद्ध था। डूंगरसिंह के वंशज उदय सिंह के 2 पुत्र - पृथ्वीराज और जगमाल थे। 1527 ईस्वी में राणा सांगा बाबर के बीच हुए खानवा के युद्ध में उदयसिंह मारा गया। उदय सिंह ने वागड़ राज्य के दो टुकड़े कर माही नदी को उन राज्यों की सीमा रेखा मानकर पूर्व का भाग (बांसवाड़ा - बांसवाड़ा जिले की सम्पूर्ण जानकारी यहां से पढ़ें) जगमालसिंह को दे दिया तथा पश्चिम का भाग (डूंगरपुर) पृथ्वीराज को दे दिया था। बेणेश्वर के शिवालय का निर्माण पृथ्वीसिंह के उत्तराधिकारी महारावल आसकरण ने सोम व माही नदी के संगम पर करवाया था। महारावल आसकरण ने डूंगरपुर में चतुर्भुज जी का विष्णु मंदिर भी बनवाया था। डूंगरपुर की भव्य नौलखा बावड़ी का निर्माण आसकरण की चौहान वंश की रानी प्रेमल देवी ने करवाया था। महारावल सहस्त्रमल की रानी सूर्य देवी ने सूर्यपुर में माधवराय का विशाल मंदिर बनवाया था। डूंगरपुर में प्रसिद्ध गेवसागर/गैप सागर/भूपालसागर झील का निर्माण महारावल गोपाल ने करवाया था। गैबसागर (गैप सागर / भूपालसागर) तालाब की पाल पर श्रीनाथजी के विशाल मंदिर का निर्माण महारावल पूंजा ने करवाया था। डूंगरपुर के महारावल बेरीसाल की रानी शुभकुँवरी ने डूंगरपुर में मुरली मनोहर का मंदिर बनवाया था। डूंगरपुर के महारावल जसवंत सिंह द्वितीय के समय उनके राज्य की व्यवस्था एकदम बिगड़ गई थी। जिसके कारण अंग्रेजों ने 1845 में पुणे शासन से हटाकर वृंदावन भेज दिया था तथा उनकी जगह उनके जीतेजी डूंगरपुर का शासन उनके दत्तक पुत्र प्रतापगढ़ के राजकुमार दलपतसिंह को सौंप दिया था। 25 मार्च 1948 को डूंगरपुर का राजस्थान संघ में विलय हुआ था। उस समय डूंगरपुर महारावल लक्ष्मणसिंह थे। 
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Dungarpur GK : Dungarpur Jila Darshan




    डूंगरपुर का सामान्य परिचय


    • डूंगरपुर का उपनाम - पहाड़ों की नगरी
    • डूंगरपुर का क्षेत्रफल : 3770 वर्ग किलोमीटर
    • डूंगरपुर में तहसीलों की संख्या : तीन
    • डूंगरपुर में उप तहसीलों की संख्या : दो
    • डूंगरपुर में उप खण्डों की संख्या : तीन
    • डूंगरपुर में ग्राम पंचायतों की संख्या : 188 
    • डूंगरपुर एवं बांसवाडा (बांसवाड़ा जिले का संपूर्ण परिचय यहां से पढ़ें) के मध्य के भू भाग को मेवल नाम से जाना जाता है।


    डूंगरपुर जिले के मानचित्र में स्थिति | स्थिति एवं विस्तार


    ✍अक्षांशीय स्थिति : 23 डिग्री 20 मिनट से 24 डिग्री 1 मिनट उत्तरी अक्षांश तक। 

    ✍देशांतरीय स्थिति : 73 डिग्री 21 मिनट पूर्वी देशांतर से 74 डिग्री 23 मिनट पूर्वी देशांतर तक। 


    डूंगरपुर जिले की विधानसभा क्षेत्र 

    डूंगरपुर जिले में कुल 4 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनके नाम निम्नानुसार है :-

    • डूंगरपुर
    • चौरासी
    • सागवाड़ा
    • आसपुर


    2011 की जनगणना के अनुसार डूंगरपुर जिले की जनसंख्या / घनत्व / लिंगानुपात / साक्षरता के आंकड़े


    • डूंगरपुर की कुल जनसंख्या : 13,88,552
    • डूंगरपुर का लिंगानुपात : 994
    • डूंगरपुर में जनसंख्या घनत्व : 368
    • डूंगरपुर की साक्षरता दर : 59.5%
    • डूंगरपुर की महिला साक्षरता दर : 46.2%
    • डूंगरपुर की पुरुष साक्षरता दर : 72.9 प्रतिशत


    डूंगरपुर के प्रमुख मेले और त्यौहार


    • बेणेश्वर मेला - बेणेश्वर मेला डूंगरपुर के बेणेश्वर धाम स्थल पर माघ पूर्णिमा को भरता है। 
    • रथोत्स्व मेला - यह मेला डूंगरपुर में डूंगरपुर पीठ नामक स्थान पर भाद्रपद माह में भरता है। 
    • मूरला गणेश मेला - यह मेला डूंगरपुर में दीपावली की दूज पर भरता है। 
    • उर्स (दाऊदी बोहरा संप्रदाय का मेला) - यह मेला डूंगरपुर के गलियाकोट स्थान पर मुहर्रम 27 के दिन भरता है। 
    यह भी पढ़ें :-

    डूंगरपुर के शीर्ष मंदिर | डूंगरपुर के प्रमुख मंदिर




    ✍संत मावजी का मंदिर, साबला➡️

    संत मावजी को विष्णु का कल्कि (निष्कलंकी) अवतार माना जाता है। साबला ग्राम में संत मावजी का मुख्य हरि मंदिर स्थित है। यह मंदिर बेणेश्वर धाम से कुछ दूरी पर स्थित है। संत मावजी ने भील समाज के लिए धार्मिक सुधार एवं सामाजिक सुधार हेतु आंदोलन चलाया था। संत मावजी  स्वयं श्री कृष्ण के परम भक्त थे। स्वयं कृष्ण का रूप धारण कर रासलीलाएं करते थे। इन्होंने बेणेश्वर धाम की स्थापना की थी। संत मावजी द्वारा वागडी भाषा में लिखे गए उपदेश "चोपड़ा" कहलाते हैं। उनमें उन्होंने भविष्यवाणियां का वर्णन किया है। उनकी यह भविष्यवाणियां वर्तमान में अक्षरश: सत्य सिद्ध हो रही है। संत मावजी ने निष्कलंक संप्रदाय की स्थापना की थी। जिसकी प्रधान पीठ साबला में माही नदी के किनारे स्थित है। संत मावजी की प्रमुख भविष्यवाणियां - जाति प्रथा के बंधन समाप्त होने, मुद्रा अवमूल्यन, राजतंत्र एवं जागीरदारी प्रथा की समाप्ति, धातु मुद्रा के स्थान पर कागज की प्रतीक मुद्रा के प्रचलन, उत्तर से प्रलयंकारी शक्ति का आगमन, ब्राह्मणों का एकाधिकार समाप्त होने, पश्चिम से शांति स्थापित करने वाली शक्ति का अवतरण तथा भयंकर युद्ध एवं नरसंहार होने आदि थी। 

    ✍विजय राजेश्वर मंदिर➡️
    इस मंदिर का निर्माण महारावल विजय सिंह ने प्रारंभ करवाया था तथा इसे उनके पुत्र महारावल लक्ष्मण सिंह ने पूर्ण करवाया था। यह मंदिर डूंगरपुर के गैप सागर पर पारेवा प्रस्तर से चतुर्भुज आकार में निर्मित है। माही नदी के तट पर स्थित है। 

    ✍देव सोमनाथ मंदिर➡️
    सफेद पत्थरों से निर्मित देव सोमनाथ का यह मंदिर डूंगरपुर जिले में स्थित है। यह मंदिर बिना सीमेंट, चुने के विशिष्ट शिल्प विधि से पत्थरों को जोड़कर निर्मित किया गया है। इस मंदिर के आकर्षक झरोखे, कलात्मक शिखर और विशाल आकार वाला यह मंदिर राज्य के अन्य जगहों के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। 

    ✍गवरी बाई का मंदिर➡️
    वागड़ की मीरा कही जाने वाली गवरी बाई का मंदिर डूंगरपुर में महारावल शिव सिंह ने बनवाया था। 

    डूंगरपुर के दर्शनीय स्थल | डूंगरपुर के पर्यटन स्थल


    ✍शायद फखरुद्दीन की दरगाह, गलियाकोट➡️
    यह स्थान वर्तमान में दाऊदी बोहरा संप्रदाय के सैयद फखरुद्दीन की मस्जिद के लिए प्रसिद्ध है। यह दाऊदी बोहरा संप्रदाय का प्रधान तीर्थ स्थल है। यहां पर प्रति वर्ष उर्स भरता है। गोबर के कंडे से खेली जाने वाली होली गलियाकोट की प्रसिद्ध है। 

    ✍बेणेश्वर धाम डूंगरपुर➡️
    वागड़ का पुष्कर एवं वागड़ का कुंभ कहे जाने वाला माही, सोम व जाखम नदियों के संगम पर नेवटापरा  गांव के पास स्थित यह बेणेश्वर धाम आदिवासियों (वनवासियों) का महातीर्थ है। यहां पर पहाड़ी पर महारावल आसकरण द्वारा निर्मित प्राचीन शिवालय है। संत मावजी महाराज का संबंध भी इसी धाम से है। बेणेश्वर धाम में लगने वाले बेणेश्वर मेले का शुभारंभ माघ शुक्ला ग्यारस के शुभ दिन बेणेश्वर पीठाधीश्वर द्वारा बेणेश्वर धाम के प्रधान देवालय हरि मंदिर पर सात रंगों का ध्वज चढ़ाकर किया जाता है तथा यह मेला माघ पूर्णिमा तक चलता है। 

    ✍एक थम्बिया महल➡️
    एक थम्बिया महल डूंगरपुर के गेबसागर तट पर उदयविलास राजप्रासाद में स्थित है। इसका निर्माण महारावल शिवसिंह ने अपनी माता राजमहिषी ज्ञानकुंवर की स्मृति में शिव ज्ञानेश्वर शिवालय के रूप में करवाया था। कालांतर पश्चात यह शिवालय एक थम्बिया महल के रूप में जाना जाने लगा। 

    डूंगरपुर में बहने वाली नदियाँ 


    ✍ माही नदी ➡️
    माही नदी मध्यप्रदेश से राजस्थान में बांसवाड़ा के खांदू गांव से प्रवेश करती है। माही नदी राजस्थान की एकमात्र ऐसी नदी है, जो राजस्थान में दक्षिण से प्रवेश करती है और वापस दक्षिण से निकल जाती है। माही नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है। माही नदी डूंगरपुर एवं बांसवाड़ा के बीच की सीमा रेखा बनाती है। माही नदी का दक्षिणी राजस्थान में अपवाह क्षेत्र छप्पन का मैदान कहलाता है। त्रिवेणी संगम बैणेश्वर धाम के पास माही नदी में सोम एवं जाखम नदियां आकर मिलती है। इसे आदिवासियों का कुम्भ कहा जाता है। माही नदी के उपनाम - बागड़ की स्वर्ण रेखा, कांठल की गंगा आदि। 

    ✍ सोम नदी ➡️ 
    उदयपुर की बीछामेड़ा की पहाड़ियों से निकलने वाली सोम नदी बेणेश्वर धाम के पास माही नदी में मिल जाती है। सोम-कमला-अम्बा सिंचाई परियोजना सोम नदी पर डूंगरपुर में स्थित है। 


    ✍ जाखम नदी ➡️
    प्रतापगढ़ की छोटी सादड़ी तहसील के निकट भंवरमाता  के मंदिर की पहाड़ियों से निकलने वाली जाखम नदी बेणेश्वर धाम में माही नदी में मिल जाती है। 

    डूंगरपुर से निकलने वाले प्रमुख खनिज 

    • लोहा  :- तलवारा (डूंगरपुर )
    • फ्लोराइट :- मांडो की पाल 
    • हरा ग्रेनाइट :- डूंगरपुर 
    • सीसा-जस्ता :- घुँघराव मांडो 
    • संगमरमर :- नवागांव 
    • अन्य खनिज :- यूरेनियम, वोलस्टोनाइट, सोना, एस्बेस्टोस,घीया पत्थर  आदि। 


    डूंगरपुर के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न/तथ्य | Dungarpur GK in Hindi


    • स्थापक का पत्थर मंदिर - यह मंदिर डूंगरपुर में स्थित है। यहां पर पत्थरों की पूजा की जाती है। 
    • गेबसागर - इसका निर्माण गोपीनाथ ने करवाया था। इसे "एडवर्ड सागर बाँध" भी कहा जाता है। इसके पास बादल महल स्थित है। जिसका निर्माण पुंजराज ने करवाया था। 
    • जूना महल - वीरसिंह द्वारा 1939 में डूंगरपुर में निर्मित किया गया। यह महल अपने भित्ति चित्रों एवं शीशों के कार्य हेतु प्रसिद्ध है। 
    • उदयविलास महल - गैवसागर के दक्षिण तट पर उदयसिंह द्वारा शाही परिवार के रहने हेतु इसका निर्माण करवाया गया था।  
    • डूंगरपुर के प्रसिद्ध व्यक्तित्व - भोगीलाल पांड्या, महारावल लक्ष्मणसिंह, डॉ. नगेन्द्रसिंह, गवरी बाई, काली बाई। 
    • डूंगरपुर कलेक्ट्रैट परिसर में राज्य में पहली बार "ड्रेस कोड" शुरू किया गया। 
    • एकमात्र बेणेश्वर महादेव का मंदिर जहाँ खंडित शिवलिंग की पूजा होती है, डूंगरपुर में है। 
    • देश का प्रथम आदिवासी महिला सहकारी निजी बैंक -"बरबुंदनियाँ गांव" (डूंगरपुर) में स्थित है। 
    •  देश व राजस्थान का पूर्ण साक्षर आदिवासी जिला - डूंगरपुर जिला। 
    • राजस्थान में सर्वाधिक अनुकूल लिंगानुपात डूंगरपुर जिले का है। 
    • राजस्थान में अनुसूचित जाति की न्यूनतम जनसँख्या डूंगरपुर जिले में है। 
    • राजस्थान में अनुसूचित जाति का न्यूनतम अनुपात डूंगरपुर जिले में है।
    • राजस्थान का न्यूनतम तापांतर वाला जिला - डूंगरपुर जिला है। 
    • डूंगरपुर में बावड़ियाँ - नौलखा बावड़ी, त्रिमुखी बावड़ी तथा उदय बावड़ी आदि। 
    • उदयशाही सिक्के डूंगरपुर के प्रसिद्ध है। 
    • डूंगरपुर प्रजामण्डल - डूंगरपुर प्रजामण्डल की स्थापना 1944 ईस्वी में भोगीलाल पांड्या (बागड़ का गाँधी) द्वारा की गयी थी। 

    आज के इस पोस्ट में हमने "राजस्थान के जिला दर्शन" की श्रृंखला में "डूँगरपुर  जिला दर्शन" को पूरी तरह से कवर करने की पूरी कोशिश की हैं। इसमें डूँगरपुर  का सामान्य परिचय, डूँगरपुर  के उपनाम, 2011 की जनगणना के अनुसार डूँगरपुर  जिले की जनसँख्या/साक्षरता/घनत्व/लिंगानुपात, डूँगरपुर  का क्षेत्रफल, डूँगरपुर  की मानचित्र में स्थिति, डूँगरपुर  में विधानसभा क्षेत्र, डूँगरपुर  के मेले, डूँगरपुर  के प्रमुख मंदिर, डूँगरपुर  के पर्यटन स्थल एवं इसके अलावा जितने भी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न बन सकते थे, उन सभी को शामिल कर पेश किया गया है। मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सभी पाठकों को मेरी यह पोस्ट पसंद आयी होगी। आप सभी को यह पोस्ट कैसी लगी आप मुझे कमेंट करके जरूर बताएं।

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