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राजस्थान की झीलें


    राजस्थान की प्रमुख झीले

    राजस्थान में मुख्यतः दो प्रकार की झीले पाई जाती है :- 
    (1). खारे पानी की झीले तथा 
    (2). मीठे पानी की झीले। 
    राजस्थान के उत्तरी-पश्चिमी मरुस्थलीय भाग में मुख्यतः खारे पानी की झीले पाई जाती हैं। इस क्षेत्र में टेथिस सागर के अवशेष होने के कारण यहां की झीलें लवणीय हैं। यह झीलें पश्चिमी एशिया के मरुस्थल में स्थित 'प्लाया' या अर्जेंटीना के 'साल्टा' झीलों के समान हैं। राजस्थान में अरावली के पूर्वी भाग में पाई जाने वाली झीलें मीठे पानी की झीले हैं। 

    राजस्थान की खारे पानी की झीले

    राजस्थान में खारे पानी की सर्वाधिक झीलें राजस्थान के नागौर जिले में है। राजस्थान की खारे पानी की प्रमुख झीलों के प्रमुख नाम निम्न प्रकार है :- 
    • सांभर झील - जयपुर। 
    • डीडवाना झील - नागौर। 
    • नावां झील - नागौर। 
    • डेगाना झील - नागौर। 
    • कुचामन झील - नागौर। 
    • पचपदरा झील - बाड़मेर। 
    • लूणकरणसर झील - बीकानेर। 
    • कावोद झील - जैसलमेर। 
    • रेवासा झील - सीकर। 
    • काछोरा झील - सीकर। 
    • फलोदी झील - जोधपुर। 
    • तालछापर झील - चूरू। 

    राजस्थान की खारे पानी की झीलों का विस्तृत वर्णन


     ①. सांभर झील, जयपुर
    • प्रशासनिक दृष्टि से सांभर झील जयपुर जिले के फुलेरा गांव में स्थित है तथा इसका कुछ भाग नागौर जिले के अंतर्गत आता है। 
    • इस झील में प्रशासनिक कार्य जयपुर से किया जाता है। 
    • सांभर झील राजस्थान की सबसे बड़ी प्राकृतिक एवं खारे पानी की झील है। 
    • सांभर झील भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील ( चिल्का झील, उड़ीसा के बाद ) है।
    • बिजोलिया शिलालेख के अनुसार सांभर झील का निर्माण वासुदेव चौहान द्वारा करवाया गया था।
    • सांभर झील का तल समुद्र तल से भी नीचा है।
    • सांभर झील में मेंथा, रुपनगढ़, खारी तथा खंडेला नदियां आकर गिरती है।
    • सांभर झील से भारत के कुल नमक उत्पादन का (देश का सर्वाधिक नमक) 8.7 प्रतिशत नमक उत्पादित होता है।
    • यहां से प्राप्त नमक उत्तम किस्म का नमक होता है।
    • सांभर झील तीन जिला - जयपुर, अजमेर एवं नागौर की सीमा बनाती है।
    • यहां पर म्यूजियम सॉल्ट की स्थापना की गई जिसे पर्यटन के क्षेत्र में रामसर साइट के नाम से पुकारा जाता है।
    • सांभर झील से नमक प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने हिंदुस्तान सांभर साल्ट लिमिटेड नामक कारखाने की स्थापना 1964 में की थी।
    • सांभर झील के लिए नमक समझौता 1869 में किया था। 
    • रियासत काल में सांभर झील के नमक पर जयपुर और जोधपुर रियासतों का साझा अधिकार था। 
    • सांभर झील में नमक क्यारी पद्धति से बनाया जाता है। 
    • सन 1990 में सांभर झील को रामसर साइट घोषित किया गया। 

     ②. पचपदरा झील, बाड़मेर
    • पचपदरा जिला बाड़मेर के बालोतरा क्षेत्र में स्थित है।
    • इस झील का निर्माण पंचा भील ने दलदल सुखाकर किया था।
    • इस झील से भी सर्वश्रेष्ठ किस्म का नमक प्राप्त होता है, यहां से प्राप्त नमक में NaCl ( सोडियम क्लोराइड ) की मात्रा 98% होती है।
    • वर्तमान में इस झील पर खारवाल जाति के लोग मोरली झाड़ी पद्धति से नमक बनाते हैं। 
    • यहां पर मोरली झाड़ी की टहनियों का उपयोग करके नमक के स्फटिक बनाने का कार्य किया जाता है। 
    • पचपदरा झील राजस्थान की नहीं बल्कि भारत की भी सबसे खारी झील है। 

     ③. डीडवाना झील, नागौर
    • इस झील के नमक का उपयोग चमड़ा उद्योग, कांच उद्योग एवं कागज उद्योग में किया जाता है। 
    • यहां निजी संस्थाओं (जिन्हें देवल कहते हैं) के द्वारा सर्वाधिक नमक उत्पादन किया जाता है। 
    • डीडवाना झील से प्राप्त नमक में सर्वाधिक फ्लोराइड पाया जाता है, इसलिए यह नमक खाने के योग्य नहीं है। 

     ④. लूणकरणसर झील, बीकानेर
    • लूणकरणसर झील उत्तरी राजस्थान की एकमात्र खारे पानी की झील है। 
    • यह झील बीकानेर जिले के लूणकरणसर कस्बे में स्थित है, यहां से कम मात्रा में नमक उत्पादन होता है। 

     ⑤. फलोदी झील, जोधपुर
    • यह झील जोधपुर जिले के फलोदी कस्बे में स्थित है। 
    • यह भी एक खारे पानी की झील है तथा यहां से भी नमक उत्पादित किया जाता है। 

    राजस्थान की मीठे पानी की झीले

    राजस्थान में मीठे पानी की सर्वाधिक झीलें उदयपुर जिले में स्थित है, इन्हें ताजे पानी की झीले भी कहा जाता है। यह वर्षा जल द्वारा निर्मित होती है। राजस्थान की प्रमुख मीठे पानी की झीलों के नाम निम्न प्रकार है:-
    • जयसमंद झील - उदयपुर। 
    • पिछोला झील - उदयपुर। 
    • फतेहसागर झील - उदयपुर। 
    • उदयसागर झील - उदयपुर। 
    • नक्की झील - माउंट आबू (सिरोही) 
    • राजसमंद झील - राजसमंद। 
    • नंदसमंद झील - राजसमंद। 
    • आनासागर झील - अजमेर। 
    • फॉयसागर झील - अजमेर। 
    • पुष्कर झील - अजमेर। 
    • गजनेर झील - बीकानेर। 
    • कोलायत झील - बीकानेर। 
    • कायलाना झील - जोधपुर। 
    • बालसमंद झील - जोधपुर। 
    • सिलीसेढ़ झील - अलवर। 
    • तालाब-ए-शाही झील  - धौलपुर। 
    • एडवर्ड सागर झील - डूंगरपुर। 
    • अमरसागर झील - जैसलमेर। 
    • गढ़सीसागर झील - जैसलमेर। 
    • मानसरोवर झील - सवाई माधोपुर। 
    • कांडला झील-  झालावाड़। 
    • पन्ना साह तालाब - झुंझुनू। 

    राजस्थान की मीठे पानी की प्रमुख झीलों का विस्तृत वर्णन


     ①. जयसमंद झील, उदयपुर
    • यह भारत की दूसरी (गोविंद सागर झील प्रथम)  व राजस्थान की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है। 
    • जयसमंद झील का प्राचीन नाम ढेबर झील है। 
    • जयसमंद झील का निर्माण जयसिंह ने गोमती नदी पर बांध बनाकर 1685 से 1691 की अवधि में करवाया था। 
    • जयसमंद झील में गोमती, झावरी व बागर नदियों का जल गिरता है। 
    • जयसमंद झील पर कुल 7 टापू है। 
    • जयसमंद झील पर स्थित टापू में से सबसे बड़े टापू का नाम बाबा का भांगड़ा तथा छोटे टापू का नाम प्यारी है। 
    • जयसमंद झील पर स्थित एक अन्य टापू जिसका नाम बाबा का मगरा पर आइसलैंड रिसोर्ट नामक होटल है। 
    • जयसमंद झील से दो नहरें श्यामपुरा नहरभाट नहर निकाली गई है तथा इसके निकट 6 कलात्मक छतरियां व निकट पहाड़ी पर चित्रित हवामहल/रूठी रानी का महल स्थित है। 

     ②. राजसमंद झील, राजसमंद
    • राजसमंद झील का निर्माण 1662 ईस्वी में महाराणा राजसिंह द्वारा कांकरोली (राजसमंद) के निकट करवाया गया था। 
    • राजसमंद झील में गोमती नदी आकर गिरती है। 
    • यह राजस्थान की एकमात्र झील हैं, जिसके नाम पर जिले का नाम पड़ा। 
    • इस झील के उत्तरी भाग को नौ चौकी पाल कहते हैं। यह रणछोड़ भट्ट तेलंग द्वारा संस्कृत भाषा में लिखा गया। इसको राज प्रशस्ति के नाम से भी जाना जाता है। यह संसार की सबसे बड़ी प्रशस्ति है। 
    • राजसमंद झील राजस्थान की दूसरी बड़ी कृत्रिम झील है। 
    • द्वारकाधीश मंदिर और घेवर माता की छतरी राजसमंद झील के किनारे निर्मित है। 

     ③. पिछोला झील, उदयपुर

    • पिछोला झील का निर्माण 14वीं शताब्दी में राणा लाखा के शासनकाल में एक चिड़ीमार बंजारे ने बेल की स्मृति में करवाया था। 
    • पिछोला झील बेड़च नदी पर स्थित है। 
    • पिछोला झील के किनारे उदयपुर महाराणाओ के महल (सिटी पैलेस )बने हुए हैं। 
    • महाराणा उदयसिंह ने इसकी पाल को मरम्मत कर पक्की करवाई थी 
    • पिछोला झील में सीसारमा एवं बुझड़ा नदी आकर गिरती है। 
    • इस झील में बने जग मंदिर महल का निर्माण करणसिंह ने 1620 में शुरू करवाया था तथा जगत सिंह प्रथम ने 1651 में पूर्ण करवाया था।
    • जग मंदिर (ताजमहल की वास्तुकला पर भारतीय भवन जग मंदिर पैलेस उदयपुर की वास्तुकला की छाप है) में शाहजहां गुजरात अभियान के तहत एवं अंग्रेजों ने 1857 की क्रांति के समय यहां पर शरण ली थी।
    • महाराणा प्रताप एवं मानसिंह की मुलाकात यहीं पर हुई थी। 
    • इस झील में बीजारी नामक स्थान पर नटनी (गलकी) की स्मृति में नटनी का चबूतरा बनाया गया था। 

     ④. फतेहसागर झील, उदयपुर

    • फतेहसागर झील का निर्माण महाराणा जयसिंह ने 1687 में थूर के तालाब के साथ ही करवाया था। 
    • फतेहसागर झील का पुनर्निर्माण 1888 ईस्वी में राणा फतेहसिंह ने करवाया था। 
    • फतेहसागर झील को देवाली तालाब भी कहते हैं, इसकी आधारशिला ड्यूक ऑफ कनॉट द्वारा रखी गई थी। 
    • इसके एक टापू पर नेहरू उद्यान स्थित है, इसके पास मोती मगरी में प्रताप का स्मारक, सहेलियों की बाड़ी, एक सौर वेधशाला स्थापित की गई। 
    • फतेहसागर एवं पिछोला झील को जोड़ने वाली झील स्वरूप सागर झील है। 

     ⑤. नक्की झील, माउंट आबू (सिरोही)

    • नक्की झील माउंट आबू (सिरोही) में स्थित है, इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था। 
    • किंवदंती के अनुसार इसका निर्माण देवताओं ने नाखूनों से किया। 
    • यह सबसे ऊंची, सबसे गहरी, विवर्तनिकी झील है। 
    • यह झील राजस्थान में जमने वाली एकमात्र झील है। 
    • इस झील में दो चट्टानें हैं जिनकी आकृति टोड रॉक (मेंढक के समान) व नन रॉक (महिला के समान) जैसी है। 
    • नक्की झील के किनारे सनसेट का दृश्य निहारने के लिए पर्यटक माउंट आबू आते हैं। 
    • गरासिया जनजाति नक्की झील में अस्थियों का विसर्जन करती है। 

     ⑥. उदयसागर झील, उदयपुर

    • उदयसागर झील का निर्माण महाराणा उदय सिंह द्वारा 1559 से 1564 ईस्वी की अवधि में करवाया था। 
    • आयड़ नदी उदयसागर झील में आकर गिरती है, इसके बाद में आगे इसे बेड़च नदी के नाम से जाना जाता है।

     ⑦. आनासागर झील, अजमेर

    • यह झील अजमेर जिले के नाग पहाड़ व तारागढ़ के बीच स्थित है। 
    • आनासागर झील का निर्माण तुर्कों की सेना के संहार के बाद खून से रंगी धरती को साफ करने के लिए अर्णोराज ने 1137 में चंद्रा नदी के जल को रोककर करवाया था।
    • आनासागर झील के किनारे जहांगीर ने दौलत बाग/शाही बाग का निर्माण करवाया, जिसे वर्तमान में सुभाष उद्यान के नाम से जाना जाता है। 
    • आनासागर झील के किनारे शाहजहां ने संगमरमर की पांच बारहदरी का निर्माण करवाया था। 
    • इस झील में बांडी नदी का पानी आकर गिरता है।

     ⑧. पुष्कर झील, अजमेर

    • पुष्कर झील को सर्वप्रथम पुष्करणा ब्राह्मणों द्वारा खोदी जाने के कारण इसका नाम पुष्कर झील पड़ा था। 
    • मराठा सरदारों ने 1809 ईसवी में इसका पुनर्निर्माण करवाया था। 
    • यह झील एनएच-89 पर स्थित है। 
    • पुष्कर झील राजस्थान की सबसे बड़ी मीठे पानी की प्राकृतिक झील है।
    • पुष्कर झील ज्वालामुखी से निर्मित झील है, इसलिए इसे कालाडेरा झील भी कहते हैं। 
    • पुष्कर झील के किनारे ब्रह्माजी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जहां मूर्ति आदय शंकराचार्य ने रखी थी तथा इसका वर्तमान स्वरूप गोकुल चंद पारीक ने करवाया था।
    • पुष्कर के प्रमुख उपनाम - हिंदुओं का पांचवा तीर्थ, तीर्थो का मामा, तीर्थराज, सबसे पवित्र एवं सर्वाधिक प्रदूषित झील आदि।

     ⑨. फॉयसागर झील, अजमेर

    • फॉयसागर झील का निर्माण इंजीनियर फॉय के निर्देशन में अकाल राहत कार्य के तहत बांडी नदी पर बांध बनाकर करवाया था। 
    • इसमें अधिक जल भरने पर इसका पानी आनासागर झील में जाता है। 
    • अकाल राहत के लिए बनाई गई यह राजस्थान की दूसरी झील है। 

     ⑩. बालसमंद झील, जोधपुर

    • बालसमंद झील जोधपुर-मंडोर मार्ग पर स्थित है। 
    • बालसमंद झील का निर्माण परिहार शासक राव बाउक (बालक राव प्रतिहार) ने 1159 ईस्वी में करवाया था।

     ⑪. सरदार समंद झील, जोधपुर

    • सरदार समंद झील का निर्माण महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा करवाया गया था।

     ⑫. कायलाना झील, जोधपुर

    • इस झील से जोधपुर शहर को पेयजल दिया जाता है। 
    • वर्तमान में इस झील में राजीव गांधी नहर का पानी आता है। 
    • शुरू में यह प्राकृतिक झील थी, वर्तमान स्वरूप सर प्रताप ने दिया था।
    • इस झील के किनारे माचिया सफारी पार्क स्थित है। 

     ⑬. सिलीसेढ़ झील, अलवर

    • सिलीसेढ़ झील का निर्माण 1845 ईस्वी में अलवर के महाराजा विनयसिंह ने अपनी रानी शिला हेतु करवाया था।
    • सिलीसेढ़ झील दिल्ली से जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-8 पर स्थित है।
    • सिलीसेढ़ झील को राजस्थान का नंदनकानन भी कहते हैं। 
    • वर्तमान में सिलीसेढ़ को होटल लेक पैलेस में तब्दील कर दिया गया है।

     ⑭. मोती झील, भरतपुर

    • मोती झील का निर्माण रूपारेल नदी के पानी को रोककर करवाया गया।
    • मोती झील को भरतपुर की लाइफ लाइन/जीवन रेखा भी कहते हैं।
    • मोती झील में प्राप्त नील हरित शैवाल एन-2 से युक्त खाद प्राप्त होती है।

     ⑮. कोलायत झील, बीकानेर

    • यह एक प्राकृतिक झील है, यहां पर कपिल मुनि का आश्रम स्थित है।
    • यहां पर कपिल मुनि का मेला प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।
    • यह झील राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-15 पर स्थित है, इसे शुष्क मरुस्थल का सुंदर उद्यान के नाम से भी जाना जाता है।

     ⑯. गजनेर झील, बीकानेर

    • गजनेर झील को पानी का शुद्ध दर्पण भी कहा जाता है।

     ⑰. पन्नालाल साहब का तालाब, खेतड़ी (झुंझुनू)

    • इसका निर्माण 1870 ईस्वी में सेठ पन्नालाल शाह ने करवाया था।
    • खेतड़ी के राजा अजीत सिंह के आमंत्रण पर पधारे स्वामी विवेकानंद को इसी तालाब के किनारे बने आवास में ठहराया था।

     ⑱. तालाब-ए-शाही झील, धौलपुर

    • इसका निर्माण जहांगीर के मनसबदार सलेह खान ने करवाया था।
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