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Sandhi and Sandhi Vichchhed in Hindi and Sanskrit : लोग अक्सर पूछते रहते है कि संधि का टॉपिक बहुत ही कठिन है। मेडम, हमें संधि/संधि विच्छेद/संधि के उदाहरण/संधि संस्कृत में/संधि पहचानने की ट्रिक हिंदी में/संधि की पहचान/संधि Trick/संधि की ट्रिक/संधि याद करने की ट्रिक/संधि पहचानने की आसान ट्रिक आदि से सम्बंधित टॉपिक को पढ़ाओ। तो इन्हीं कमेंट और सवालों को देखकर ही मैंने आज इस पोस्ट को लिखने का विचार किया और संधि को एक आसान शब्दों में आप सभी के साथ शेयर करने का विचार किया। इसमें आपको बहुत ही सरल और संधि से सम्बंधित हर नियम को लिख आपके सामने पेश कर रही हूँ। आप इसे पूरा जरूर पढ़ें। आपके लिए यह प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। तो लीजिए यह रही पूरी पोस्ट -


    संधि किसे कहते है | संधि का क्या अर्थ है ?

    ✍संधि की परिभाषा ➡️
    निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे ही संधि कहते है अर्थात दो निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से उत्पन्न विकार को ही व्याकरण में संधि (Sandhi) कहते हैं। संधि के लिए दो वर्णों का पास-पास होना बहुत आवश्यक हैं। वर्णों की इस निकट स्थिति को संहिता भी कहा जाता है। 
    संधि दो शब्दों से मिलकर बना है - सम्+धि। जिसका शाब्दिक अर्थ होता है - 'मिलना' | संधि में जब दो शब्द मिलते है तो पहले शब्द की अंतिम ध्वनि एवं दूसरे शब्द की पहली ध्वनि आपस में मिलकर जो परिवर्तन लाती है, उसे ही संधि कहते है। वर्णों में संधि करने पर स्वर, व्यंजन अथवा विसर्ग में परिवर्तन आता है।  
    उदाहरण : विद्या+आलय = विद्यालय 

    ✍संधि विच्छेद(Sandhi Vichchhed) ➡️ 
    जब किसी एक शब्द को दो भागों में तोड़ा जाता हैं और तोड़े हुए दोनों शब्द अपने अलग-अलग सही अर्थ देते है तब इस प्रक्रिया को ही संधि विच्छेद कहते है अर्थात संधि में पदों को मूल रूप में पृथक कर देना ही संधि विच्छेद कहलाता है। 
    उदाहरण : हिमालय = हिम+आलय 

    संधि के प्रकार | संधि के भेद 

    संधि मुख्यत: तीन प्रकार की होती है, जिनके नाम निम्नानुसार है :-
    1. स्वर संधि (Swar Sandhi)
    2. व्यंजन संधि (Vyanjan Sandhi)
    3. विसर्ग संधि (Visarg Sandhi)

    स्वर संधि किसे कहते है | स्वर संधि के प्रकार 

    ✍स्वर संधि की परिभाषा➡️
    जब स्वर के स्वर का मेल होता है तब उन दो स्वरों के मिलने से तीसरा स्वर बनता है तो इसे ही स्वर संधि कहते है अर्थात जहां प्रथम शब्द का अंतिम वर्ण स्वर हो तथा दूसरे शब्द का प्रथम वर्ण स्वर हो तब उनके मेल से जो विकार (तीसरा स्वर) उत्पन्न होता है, उसे ही स्वर संधि कहते है। 
    उदाहरण : विद्या+आलय = विद्यालय
    ✍स्वर संधि के प्रकार ➡️
    स्वर संधि पांच प्रकार की होती है, जिनके नाम निम्न प्रकार है :-
    1. दीर्घ संधि
    2. गुण संधि
    3. वृद्धि संधि
    4. यण संधि
    5. अयादि संधि
     ➊ . दीर्घ संधि(Dirgh Sandhi) 
    यदि प्रथम शब्द के अंत में ह्रस्व अथवा दीर्घ स्वर अ, इ, उ में से कोई एक वर्ण हो और द्वितीय शब्द के प्रारम्भ में उसी स्वर का समान वर्ण हो तो उन दोनों के मेल से उन दोनों के स्थान पर एक दीर्घ हो जाता है, इसे ही दीर्घ संधि कहते है अर्थात जब 'अ/आ' के साथ 'अ/आ' हो तो 'आ' हो जाता है, 'इ/ई' के साथ 'इ/ई' हो तो 'ई' हो जाता है, 'उ/ऊ' के साथ 'उ/ऊ' हो तो 'ऊ' हो जाता है, इसे ही दीर्घ संधि कहते है। 
    दीर्घ संधि के उदाहरण➡️
    • पुस्तक + आलय = पुस्तकालय 
    • भानु + उदय = भानूदय
    • धर्म + अर्थ = धर्मार्थ 
    • विद्या + अर्थी = विद्यार्थी 
    अ + अ  =  आ 
    • परम + अर्थ = परमार्थ 
    • धर्म + अर्थ = धर्मार्थ 
    • वीर + अंगना = वीरांगना 
    • राम + आनंद = रामानंद 
    • अधिक + अधिक = अधिकाधिक 
    • महा + आशय = महाशय 
    • चर + अचर = चराचर 
    • पुरूष + अर्थ = पुरूषार्थ 
    • दीक्षा + अंत = दीक्षांत 
     अ + आ  =  आ 
    • पुस्तक + आलय = पुस्तकालय 
    • हिम + आलय = हिमालय 
    • देव + आलय = देवालय 
    • धर्म + आत्मा = धर्मात्मा 
    • वात + आवरण = वातावरण 
    • शिव + आलय = शिवालय 
     आ + अ  =  आ 
    • विद्या + अर्थी  = विद्यार्थी 
    • रेखा + अंकित = रेखांकित 
    • परीक्षा + अर्थी = परीक्षार्थी 
    • सीमा + अंकित = सीमांकित 
    • रेखा + अंश = रेखांश 
     आ + आ  =  आ 
    • विद्या + आलय = विद्यालय 
    • महा + आत्मा = महात्मा 
    • महा + आशय = महाशय 
    • वार्ता + आलाप = वार्तालाप 
     इ + इ   =  ई  
    • कवि + इन्द्र = कवीन्द्र 
    • रवि + इन्द्र = रवीन्द्र 
    • अति + इव = अतीव 
    • मुनि + इन्द्र = मुनीन्द्र 
     इ + ई  =  ई  
    • परि + ईक्षण = परीक्षण 
    • कवि + ईश = कवीश 
    • हरि + ईश = हरीश 
     ई + इ  =  ई  
    • मही + इंद्र = महींद्र 
    • लक्ष्मी + इच्छा = लक्ष्मीच्छा 
    • सची + इन्द्र = सचीन्द्र 
     ई + ई  =  ई  
    • नारी + ईश्वर = नारीश्वर 
    • नदी + ईश = नदीश 
    • पृथ्वी + ईश = पृथ्वीश 
    • रजनी + ईश  = रजनीश 
    • जानकी + ईश = जानकीश 
      उ + उ  =  ऊ  
    • साधु + उपकार = साधूपकार 
    • भानु + उदय = भानूदय 
    • सु + उक्ति = सूक्ति 
    • गुरु + उपदेश = गुरूपदेश 
      उ + ऊ  =  ऊ  
    • लघु + ऊर्मि = लघूर्मि 
    • सिंधु + ऊर्मि = सिंधूर्मि 
    • मंजु + ऊषा = मंजूषा 
       + उ  =  ऊ  
    • भू + उपरि = भूपरि 
    • वधू + उत्सव = वधूत्सव 
    • वधू + उल्लास = वधूल्लास 
    • भू + उत्तम = भूत्तम 
       + ऊ   =  ऊ  
    • नदी + ईश = नदीश 
    • सरयू + ऊर्मि = सरयूर्मि 
    • भू + ऊष्मा = भूषमा 
    • वधू + ऊर्जा = वधूर्जा 
     ❷ गुण संधि(Gun Sandhi)
    जब 'अ/आ' के बाद में 'इ/ई' आए तो 'ए' हो जाता है,  'अ/आ' के बाद में 'उ/ऊ' आए तो 'ओ' हो जाता है'अ/आ' के बाद में 'ऋ' आए तो 'अर्' हो जाता है तो इसे गुण संधि कहते है। 
    गुण संधि के उदाहरण ➡️
    • नर + इंद्र = नरेंद्र 
    • ज्ञान + उपदेश ज्ञानोपदेश 
    • देव + ऋषि = देवर्षि 
     अ/आ + इ/ई   =  ए  
    • देव + इंद्र = देवेंद्र 
    • मृग + इंद्र = मृगेंद्र 
    • महा + इंद्र = महेंद्र 
    • परम + ईश्वर = परमेश्वर 
    • नर + ईश = नरेश 
    • महा + ईश्वर = महेश्वर 
    • रमा + ईश = रमेश 
     अ/आ + उ/ऊ   =  ओ  
    • लोक + उपयोग = लोकोपयोग 
    • ज्ञान + उपदेश = ज्ञानोपदेश 
    • पर + उपकार = परोपकार 
    • महा + उत्सव = महोत्सव 
    • गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि 
     अ/आ + ऋ   =  अर्  
    • देव + ऋषि = देवर्षि 
    • महा + ऋषि = महर्षि 

     ❸ वृद्धि संधि(Vridhi Sandhi)
    जब 'अ/आ' के बाद 'ए/ऐ' आए तो 'ऐ' हो जाता है, 'अ/आ' के बाद 'ओ/औ' आए तो 'औ' हो जाता है, इसे ही वृद्धि संधि कहते है। 
    वृद्धि संधि के उदाहरण ➡️
    • परम + एषणा = परमैषणा 
    • तथा + एव  =  तथैव 
    • धर्म + ऐक्य = धर्मैक्य 
    • जल + ओक = जलौक 
     अ/आ + ए/ऐ   =  ऐ  
    • एक + एक = एकैक 
    • सदा + एव = सदैव 
    • मत + ऐक्य = मतैक्य 
    • महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य 
     अ/आ + ओ/औ   =  औ  
    • जल + ओक = जलौक 
    • परम + औषध = परमौषध 
    • महा + ओज = महौज 
    • महा + औदार्य = महौदार्य

     ❹ . यण संधि(Yan Sandhi)
    जब 'इ/ई' के बाद कोई असमान स्वर आए तो 'इ/ई' का 'य्' हो जाता है, 'उ/ऊ' के बाद कोई असमान स्वर आए तो  'उ/ऊ'  का 'व्' हो जाता है, 'ऋ' के बाद कोई असमान स्वर आए तो 'ऋ' का 'र्' हो जाता है, यण संधि कहलाती है। 
    सूत्र - इको यणचि 
    यण संधि के उदाहरण ➡️
    • यदि + अपि = यद्यपि 
    • इति + आदि = इत्यादि 
    • देवी + आगमन = देव्यागमन 
    • अनु + अय = अन्वय 
    • सु + आगत = स्वागत 
    • अति + आचार = अत्याचार 
    • देवी + आलय = देव्यालय 
    • मधु + आलय = मध्वालय 

     ❺ अयादि संधि(Ayadi Sandhi)
    जब ए, ऐ, ओ, औ के बाद में कोई अन्य स्वर आने पर 'ए' का 'अय्' हो जाता है, 'ऐ' का 'आय्' हो जाता है, 'ओ' का 'अव्'  हो जाता है, 'औ' का 'आव्' हो जाता है तो इसे ही अयादि संधि कहते है। 
    अयादि संधि के उदाहरण ➡️ 
    • ने + अन =  नयन 
    • शे + अन = शयन 
    • गै + अक = गायक 
    • पो + अन = पवन 
    • हो + अन = हवन 
    • पौ + अक = पावक 
    • धौ + अक = धावक 
    • भो + अन = भवन

    व्यंजन संधि | व्यंजन संधि के नियम 

    ✍व्यंजन संधि की परिभाषा ➡️
    दो व्यंजनों के मेल से या व्यंजन अथवा स्वर के मेल से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे ही व्यंजन संधि कहते हैं। 

    ✍व्यंजन संधि के नियम ➡️
     नियम 1 . जब किसी वर्ग के पहले वर्ण ( क्, च्, ट्, त्, प्) का मेल किसी वर्ग के तीसरे वर्ण से या (य्, र्, ल्, व्, ह्) से या किसी स्वर से होने पर वर्ग का पहला वर्ण ( क्, च्, ट्, त्, प्) अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्) में बदल जाता है। 
    'क्' के  'ग्' होने के उदाहरण ➡️
    • दिक् + अम्बर = दिगम्बर 
    • वाक् + ईश = वागीश 
    • दिक् + अंत = दिगंत 
    • दिक् + विजय = दिग्विजय 
    'च्' के  'ज्' होने के उदाहरण ➡️
    •  अच् + अंत = अजंत 
    • अच् + आदि = अजादि 
    'ट्' के  'ड्' होने के उदाहरण ➡️
    • षट् + आनन = षडानन
    • षट् + दर्शन = षड्दर्शन
    • षट् + अंग = षडंग
    'त्' के  'द्' होने के उदाहरण ➡️
    • तत् + उपरांत = तदुपरांत 
    • तत् + अनन्तर = तदनन्तर 
    • सत् + आशय = सदाशय 
    'प्' के  'ब्' होने के उदाहरण ➡️
    • अप् + द  = अब्द 
    • अप् + ज = अब्ज 
    • सुप् + अंत = सुबंत 
     नियम 2 .जब किसी वर्ग के पहले वर्ण ( क्, च्, ट्, त्, प्) का मेल 'न/म' वर्ण ( ङ,ञ ज, ण, न, म) से हो तो पहला वर्ण ( क्, च्, ट्, त्, प्) अपने ही वर्ग के पांचवें वर्ण में बदल जाता है।
    उदाहरण ➡️
    • वाक् + मय = वाङ्मय 
    • षट् + मास = षण्मास 
    • षट् + मूर्ति = षण्मूर्ति 
    • षट् + मुख = षण्मुख
    • उत्  + नति = उन्नति 
    • उत् + मूलन = उन्मूलन 
    • अप् + मय = अम्मय 
     नियम 3 . 'त्' का नियम ➡️जब 'त्' वर्ण का मेल 'ग, घ, ध, द, ब, भ, य, र, व' से या किसी स्वर से हो तो 'त्' वर्ण 'द्' में बदल जाता है। 'म' के साथ 'क से म' तक के किसी भी वर्ण के मेल पर 'म' वर्ण मिलने वाले वर्ण का अंतिम नासिक (अनुस्वार) वर्ण बन जाता है। 
    'त्' + 'ग/घ/ध/द/ब/भ/य/र/व/कोई स्वर' के उदाहरण ➡️ 
    • सत् + भावना = सद्भावना 
    • सत् + धर्म = सद्धर्म 
    • जगत् + ईश = जगदीश 
    'म' + क/ख/ग/घ/ड़ के उदाहरण ➡️
    • सम्  +गम = संगम 
    • सम् +कल्प = संकल्प 
    • शम् +कर = शंकर 
    • सम् +ख्या = संख्या 
    'म' + च/छ/ज/झ/ के उदाहरण ➡️
    • सम् + जीवन = संजीवन 
    • सम् + चय = संचय 
    • किम् + चित् = किंचित 
    'म' + ट/ठ/ड/ढ/ण के उदाहरण ➡️
    • खम् + ड = खंड 
    • दम् + ड = दंड 
    'म' + त/थ/द/ध/न के उदाहरण ➡️
    • सम् + देह = संदेह 
    • सम् + तोष = संतोष 
    'म' + प/फ/ब/भ/म के उदाहरण ➡️
    • सम् + भव = संभव 
    • सम् + पूर्ण = संपूर्ण 
    अन्य नियम ➡️
    'त्' के बाद यदि 'ल' हो तो 'त्', 'ल' में बदल जाता है। 
     जैसे - 
    • तत् + लीन  =  तल्लीन 
    • उत् + लास  =  उल्लास 
    • उत् + लेख  =  उल्लेख 
     'त्' के बाद यदि 'ज्', 'झ्' हो तो 'त्', 'ज्' में बदल जाता है।  
    जैसे -
    • सत् + जल = सज्जन 
    • उत् + झटिका = उज्झटिका 
     'त्' के बाद यदि 'श्', हो तो 'त्' का 'च्' और 'श्' का 'छ्' हो जाता है।  
    जैसे- 
    • उत् + श्वास = उच्छ्वास 
    • सत् + शास्त्र = सच्छास्त्र 
     'त्' के बाद यदि 'ट्', 'ड्' हो तो 'त्', 'ड्' में बदल जाता हैं।  
    जैसे-
    • उत् + डयन   = उड्डयन 
     'त्' के बाद यदि 'च्', 'छ्' हो तो 'त्' 'च्' में बदल जाता है।  
    जैसे -   
    • उत् + चारण = उच्चारण 
    • जगत् + छाया = जगच्छाया 
     'त्' का मेल यदि 'ह्' से हो तो 'त्' का 'द्' और 'ह्' का 'ध्' हो जाता है। 
    जैसे- 
    • तत् + हित  = तद्धित 
    • उत् + हार = उद्धार 
    • उत् + हरण = उद्धरण 
    यदि स्वर के बाद 'छ्' वर्ण आये तो 'छ्' से पहले 'च्' वर्ण बढ़ा दिया जाता है। 
    जैसे -
    • अनु + छेद  = अनुच्छेद 
    • आ + छादन  =  आच्छादन 
    • स्व + छंद  = स्वच्छंद 
    'म्'  के बाद य्, र्, ल्, व्, श्, ष्, स्, ह् में से कोई व्यंजन होने पर 'म्' का अनुस्वार हो जाता है। 
    जैसे- 
    • सम् + वाद  =  संवाद 
    • सम् + योग  =  संयोग 
    • सम् + विधान  =  संविधान 
    • सम् + रक्षण  =  संरक्षण 

     नियम 4  'स्' का नियम ➡️
    जब प्रथम शब्द का अंतिम वर्ण 'अ', 'आ' से भिन्न स्वर हो एवं द्वितीय शब्द का प्रथम वर्ण 'स' हो तो 'स' का 'ष' हो जाता है। 
    उदाहरण ➡️
    • सु + समा = सुषमा 
    • वि + सम = विषम 
    • वि + साद = विषाद 

    विसर्ग संधि | विसर्ग संधि के नियम 

    ✍ विसर्ग संधि की परिभाषा ➡️
    विसर्ग के बाद जब स्वर अथवा व्यंजन आये तब जो विकार उत्पन्न होता है, उसे ही विसर्ग संधि कहते है। 
    विसर्ग संधि के उदाहरण-
    • नि: + अक्षर = निरक्षर 
    • नि: + पाप  =  निष्पाप 
    • मन: + अनुकूल = मनोनुकूल 
    ✍ विसर्ग संधि के नियम➡️
     नियम 1 . विसर्ग का 'ओ' हो जाना ➡️
    यदि विसर्ग के पहले 'अ' और बाद में भी 'अ' वर्ण अथवा तीसरा, चौथा और पांचवा वर्ण अथवा य, र, ल, व, ह हो तो विसर्ग का 'ओ' हो जाता है। 
    उदाहरण
    • अध: + गति  =  अधोगति 
    • मन: + अनुकूल = मनोनुकूल 
     नियम 2 विसर्ग का 'श्' हो जाना ➡️
    यदि विसर्ग के पहले स्वर हो और बाद में 'च' या 'छ' हो तो विसर्ग 'श्' में बदल जाता है। 
    उदाहरण -
    • नि: + छल  =  निश्छल 
    • नि: + चय  = निश्चय 
    • दु: + चरित्र  =  दुश्चरित्र 
     नियम 3 . विसर्ग का 'र्' हो जाना ➡️
    यदि विसर्ग के पहले अ, आ को छोड़कर कोई दूसरा स्वर हो और बाद में आ अथवा तीसरा, चौथा व पांचवा वर्ण अथवा य, र, ल, व में से कोई भी वर्ण आये तो विसर्ग का 'र्' हो जाता है। 
    उदाहरण-
    • नि: + आशा  =  निराशा 
     नियम 4 विसर्ग का 'ष' हो जाना ➡️
    जब विसर्ग के पहले इ, उ और बाद में क, ख, ट, ठ, प, फ में से कोई वर्ण  हो तो विसर्ग का 'ष्' हो जाता है। 
    उदाहरण -
    • नि: + कपट = निष्कपट 
    • धनु: + टंकार = धनुष्टंकार 
     नियम 5 विसर्ग का 'स्' हो जाना ➡️
     विसर्ग के बाद यदि त और स हो तो विसर्ग का 'स्' हो जाता है। 
    उदाहरण-
    • नि: + तेज  =  निस्तेज 
    • नम: + ते  =  नमस्ते 
     नियम 6 विसर्ग का लोप हो जाना ➡️
    जब विसर्ग के बाद 'र' आये तो विसर्ग का लोप हो जाता है और उसके पहले वाला स्वर दीर्घ हो जाता है। 
    उदाहरण -
    • नि: + रस  =  नीरज 
    • नि: + रोग  =  नीरोग 
    • दु: + रम्य  = दूरम्य 
     नियम 7 विसर्ग का परिवर्तन न होना ➡️
    यदि विसर्ग के पहले अ हो तथा बाद में क या प हो तो विसर्ग में परिवर्तन नहीं होता है। 
    उदाहरण -
    • प्रात: + काल   =  प्रात:काल 
    • अंत:  + करण  =  अंत:करण 
    आज की इस पोस्ट में हमने "हिंदी व्याकरण" की श्रृंखला में संधि, संधि विच्छेद, संधि की परिभाषा, संधि के प्रकार, स्वर संधि के प्रकार, स्वर संधि के उदाहरण, व्यंजन संधि, विसर्ग संधि आदि यानि की संधि को पूरी तरह से इस एक पोस्ट में पूरा करने की कौशिक की है। मैं उम्मीद करती हूँ कि आपको मेरी यह पोस्ट अच्छी लगी होंगी। आपको यह पोस्ट कैसी लगी आप मुझे कमेंट करके जरूर अवगत करावे।   
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