आज की इस पोस्ट में आप सभी प्रिय पाठकों के लिए राजस्थान की प्रमुख नदियों के 'आंतरिक प्रवाह क्षेत्र' से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी लिखी गई है। Rajasthan ki aantrik pravah ki nadiya, antrik pravah ki nadiya.
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Rajasthan ki aantrik pravah ki nadiya, antrik pravah ki nadiya
राजस्थान का आंतरिक प्रवाह तंत्र

राजस्थान की आंतरिक प्रवाह तंत्र की नदियां

राजस्थान की ऐसी नदियां जो अपना जल समुंद्र तक नहीं ले जाती है तथा वे अपने प्रवाह क्षेत्र में ही विलुप्त हो जाती हैं, उन्हें आंतरिक प्रवाह की नदियां कहा जाता है। आंतरिक प्रवाह की मुख्य रूप से नदियां निम्न है - घग्घर नदी, साबी नदी, काकनी नदी, रूपनगढ़ नदी, कांतली नदी, रूपारेल नदी, मेंथा नदी आदि। 

①. घग्गर नदी ( Ghaggar River )
  • घग्गर नदी का उद्गम स्थल - घग्गर नदी का उद्गम हिमाचल प्रदेश की शिवालिक पहाड़ी (कालका माता के मंदिर के पास) से होता है। 
  • घग्घर नदी के उपनाम - घग्गर नदी को नट नदी, मृत नदी, सोतर नदी, सरस्वती नदी, राजस्थान का शौक, लेटी हुई नदी, द्वेषवती नदी आदि नामों से जाना जाता है। 
  • घग्घर नदी का बहाव क्षेत्र - घग्घर नदी हिमाचल प्रदेश की शिवालिक पहाड़ी से निकल कर पंजाब एवं हरियाणा राज्यों में बहती हुई राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी नामक स्थान पर राजस्थान में प्रवेश करती है तथा यह अक्सर भटनेर दुर्ग के पास जाते-जाते समाप्त हो जाती है। कभी-कभी अत्यधिक वर्षा होने की स्थिति में यह नदी गंगानगर जिले में प्रवेश करती है और सूरतगढ़-अनूपगढ़ में बहती हुई पाकिस्तान के बहावलपुर जिले में प्रवेश करती है और अंत में फोर्ट अब्बास नामक स्थान पर जाकर समाप्त हो जाती है। घग्गर नदी राजस्थान में प्रवेश करने पर थोड़े ही दूर हनुमानगढ़ में तलवाड़ा झील का निर्माण करती है, जो राजस्थान की सबसे नीची झील है। 
  • घग्गर नदी की कुल लंबाई - घग्गर नदी की कुल लंबाई 465 किलोमीटर है। 
  • घग्घर नदी के बहाव वाले राज्य - घग्गर नदी हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान राज्य में बहती है। 
  • घग्गर नदी के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न - राजस्थान के हनुमानगढ़ जंक्शन का धरातल स्थल उसके पास की नदी के पेटे के स्तर से भी नीचे है। घग्गर नदी के मुहाने पर  हनुमानगढ़ में कालीबंगा सभ्यता विकसित है। घग्गर नदी आंतरिक प्रवाह की दृष्टि से राजस्थान की सबसे लंबी नदी है। घग्गर नदी का राजस्थान में बहाव क्षेत्र नाली/पाट कहलाता है। घग्घर नदी का पाकिस्तान में बहाव क्षेत्र हकरा (फारसी भाषा का शब्द) कहलाता है। 


②. कांतली नदी ( Kantli River )
  • कांतली नदी का उद्गम - कांतली नदी का उद्गम सीकर जिले की खंडेला की पहाड़ियां (रेवासा) से होता है। 
  • कांतली नदी का बहाव क्षेत्र - कांतली नदी अपने उद्गम स्थल रेवासा (सीकर) से उत्तर की ओर बहती हुई झुंझुनू जिले में प्रवेश करती है तथा यह झुंझुनू जिले को दो भागों में विभाजित करती हुई चूरू एवं झुंझुनूं जिलों की सीमा पर विलुप्त हो जाती है। 
  • कांतली नदी की कुल लंबाई - कांतली नदी की कुल लंबाई 100 किलोमीटर है। 
  • कांतली नदी के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न - कांतली नदी के किनारे गणेश्वर सभ्यता विकसित है। कांतली नदी का बहाव क्षेत्र तोरावाटी प्रदेश कहलाता है। 


③. काकनी नदी ( Kakni River )
  • काकनी नदी का उद्गम स्थल - काकनी नदी का उद्गम जैसलमेर जिले के कोठारी गांव से होता है। 
  • काकनी नदी के उपनाम - काकनी नदी को काकनेय नदी भी कहा जाता है। स्थानीय भाषा में काकनी नदी को मसूरदी नदी भी कहते हैं। 
  • काकनी नदी की कुल लंबाई - काकनी नदी की कुल लंबाई 17 किलोमीटर है। 
  • काकनी नदी का बहाव क्षेत्र - काकनी नदी जैसलमेर जिले के कोठारी गांव से निकलकर कुछ दूरी पर बहने के बाद जैसलमेर में ही बुझ झील का निर्माण करती है तथा उसके आगे कुछ दूरी पर स्थित मीठा खाड़ी में विलुप्त हो जाती है। यह कुल 17 किलोमीटर चलती है।  काकनी नदी राजस्थान की आंतरिक प्रवाह की सबसे छोटी नदी है। 


④. साबी नदी ( Sabi River )
  • साबी नदी का उद्गम - साबी नदी का उद्गम जयपुर जिले की सेवर की पहाड़ियों से होता है। 
  • साबी नदी का बहाव क्षेत्र - साबी नदी सेवर की पहाड़ियां (जयपुर) से निकलने के बाद अलवर जिले की बानसूर, बहरोड, किशनगढ़ बास, मंडावर, तिजारा तहसील से होकर बहती है। साबी नदी अलवर जिले से हरियाणा राज्य में प्रवेश करती है तथा यह हरियाणा के गुड़गांव जिले में कुछ दूरी तक प्रवाहित होकर पटौदी के उत्तर में भूमि में विलीन हो जाती है। 
  • साबी नदी की कुल लंबाई - साबी नदी की कुल लंबाई 222 किलोमीटर है। यह राजस्थान में 157 किलोमीटर बहती है।
  • साबी नदी के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न - साबी नदी के किनारे जोधपुरा सभ्यता (जयपुर) विकसित है। साबी नदी वर्षा ऋतु में अपनी विनाश लीला के लिए प्रसिद्ध है। साबी नदी अलवर जिले की सबसे बड़ी नदी है। मानसून काल में साबी नदी का पाट अत्यधिक चौड़ा हो जाता है। 


⑤. रूपारेल नदी ( Ruparel River )
  • रूपारेल नदी का उद्गम - रूपारेल नदी का उद्गम अलवर जिले के थानागाजी में उदयनाथ की पहाड़ी से होता है। 
  • रूपारेल नदी की कुल लंबाई : 104 किलोमीटर। 
  • रूपारेल नदी के उपनाम - रूपारेल नदी को लसवारी नदी तथा स्थानीय भाषा में वराह नदी भी कहा जाता है। 
  • रूपारेल नदी की प्रमुख सहायक नदियां - सुकरी, गोलारी, नारायणपुर, नालाक्रोती, शानगंगा आदि। 
  • रूपारेल नदी के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न - रूपारेल नदी मुख्य रूप से अलवर और भरतपुर जिलों में बहती है तथा यह भरतपुर में सिकरी बांध तक आते विलुप्त हो जाती है। रूपारेल नदी को भरतपुर की जीवन रेखा भी कहा जाता है। 


⑥. मेंथा नदी ( Mentha River )
  • मेंथा नदी का उद्गम - मेंथा नदी का उद्गम जयपुर जिले के मनोहरपुर से होता है। 
  • मेंथा नदी का बहाव क्षेत्र - मेंथा नदी जयपुर में अपने उद्गम स्थल मनोहरपुर से बहती हुई कुछ ही दूरी पर स्थित सांभर झील में अपना जल उड़ेल देती है। 


⑦. रुपनगढ़ नदी ( Rupangarh River )
  • रूपनगढ़ नदी का उद्गम - रुपनगढ़ नदी का उद्गम अजमेर जिले के सलेमाबाद (किशनगढ़) से होता है। 
  • रूपनगढ़ जिले का बहाव क्षेत्र - रूपनगढ़ नदी अजमेर में अपने उद्गम स्थल से निकलकर नागौर व जयपुर की सीमा पर स्थित सांभर झील में मिल जाती है। 


⑧. खारी नदी ( Khari River )
  • इस नदी का उद्गम जयपुर के आसपास की पहाड़ियों से होता है तथा यह सांभर झील में आकर गिरती है। 

⑨. खंडेला नदी ( Khandela River )
  • इस नदी का उद्गम भी जयपुर के आसपास की पहाड़ियों से होता है तथा यह सांभर झील में आकर गिरती है। 

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