यदि आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हो और आप पढ़ना चाहते हो 'Rajasthan GK/Rajasthan GK in Hindi/Rajsamand District GK in Hindi/Rajsamand Zila Darshan/Rajasamand Jila GK' तो आप 'राजस्थान सामान्य ज्ञान' के 'राजसमंद जिला दर्शन' की इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें। इसमें आपको 'राजस्थान जिला दर्शन' की श्रृंखला में राजस्थान का 'राजसमंद जिला दर्शन' को विस्तृत तरिके से बताएंगे। 
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Rajsamand GK : Rajsamand jila darshn


    राजसमंद जिले का सामान्य परिचय

    • 10 अप्रैल 1991 को उदयपुर से अलग कर राजसमंद को स्वतंत्र जिला बनाया गया। 
    • राजसमंद नगर को महाराणा राजसिंह ने बसाया था। 
    • राजसमंद जिले का क्षेत्रफल : 3860 वर्ग किलोमीटर। 
    • राजसमंद जिले का संभागीय मुख्यालय - उदयपुर। 
    • राजसमंद जिले की अक्षांशीय स्थिति : 24 डिग्री 46 मिनट तक उत्तरी अक्षांश से 26 डिग्री 1 मिनट उत्तरी अक्षांश तक। 
    • राजसमंद जिले की देशांतरीय स्थिति : 73 डिग्री 28 मिनट पूर्वी देशांतर से 74 डिग्री 18 मिनट पूर्वी देशांतर तक। 



    राजसमंद जिले के प्रमुख मेले एवं त्यौहार

    • देव झुलनी मेला - यह मेला राजसमंद जिले के चारभुजा स्थान पर जलझूलनी एकादशी को भरता है। 
    • आमज माता का मेला - यह मेला राजसमंद जिले के रिछेड़ गांव में जेष्ट सुदी नवमी को भरता है। 
    • प्रताप जयंती का मेला - यह मेला राजसमंद में हल्दीघाटी स्थान पर ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया को भरता है। 
    • चेतक अश्व मेला - यह मेला भी राजसमंद जिले के हल्दीघाटी स्थान पर महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर भरता है। 
    • जन्माष्टमी मेला - यह मेला राजसमंद जिले के नाथद्वारा में जन्माष्टमी के अवसर पर भरता है। 
    • अन्नकूट मेला - यह मेला राजसमंद जिले के नाथद्वारा एवं कांकरोली में गोवर्धन पूजा के अवसर पर भरता है। 
    • आमेट पशु मेला - यह पशु मेला राजसमंद जिले के आमेट में आसोज कृष्णा 11 से शुक्ला एकम तक भरता है। 
    • जोहिड़ा भेरूजी का मेला - यह मेला राजसमंद जिले के कुंवारिया ग्राम में आश्विन शुक्ला एकम से पंचमी तक भरता है। 



    राजसमंद जिले के प्रमुख मंदिर/शीर्ष मंदिर

    • द्वारिकाधीश मंदिर, कांकरोली - कांकरोली (राजसमंद) में पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय का सुप्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर स्थित है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण की प्रतिमा विराजमान है। 
    • गड़बोर का चारभुजा नाथ मंदिर - इस मंदिर में चारभुजा नाथ जी की बड़ी पौराणिक चमत्कारी प्रतिमा स्थापित है। यहां पर होली एवं देवझुलनी एकादशी पर मेले भरते हैं। इस मंदिर के पास से होकर गोमती नदी बहती है। 
    • श्रीनाथजी मंदिर, श्री नाथद्वारा (राजसमंद) - नाथद्वारा वल्लभ संप्रदाय के वैष्णवो का प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहां पर श्रीनाथ जी का मंदिर स्थित है। श्रीनाथजी के नाम पर ही इस गांव को श्री नाथद्वारा के नाम से जाना जाने लगा। इस मंदिर में काले मार्बल की प्रतिमा स्थापित है, जो मथुरा से यहां लाई गई थी। यह मंदिर महाराणा राज सिंह के काल में निर्मित है। 
    • पिपलाज माता का मंदिर - इस मंदिर का निर्माण गुहिल सम्राट अल्लट  के शासनकाल में हुआ था। 
    • घेवर माता का मंदिर - घेवर माता का मंदिर राजसमंद झील की पाल पर स्थित है। 
    • चारभुजा देवी का मंदिर - चारभुजा देवी का मंदिर खमनोर (राजसमंद ) में स्थित है। 


    राजसमंद जिले के पर्यटन स्थल/दर्शनीय स्थल


    • हल्दीघाटी - राजसमंद जिले के हल्दीघाटी स्थान पर 21 जून 1576 को महाराणा प्रताप एवं अकबर की सेनाओं के मध्य भयंकर हल्दीघाटी का युद्ध हुआ था। जिसमें अकबर को विजय प्राप्त हुई थी। इस युद्ध स्थल को रक्ततलाई के नाम से भी जाना जाता है। कर्नल जेम्स टॉड ने इस युद्ध को मेवाड़ का थर्मोपोली/राजस्थान का थर्मोपल्ली भी कहा है। अबुल फजल ने खमनौर का युद्ध तथा बंदायूनी ने गोगुन्दा का युद्ध कहा है। यहां का गुलाबजल, शरबत व गुलकंद सुविख्यात है। रक्त तलाई में हकीम खां सूरी की मजार, ग्वालियर के तवर नरेश की छतरियां तथा झाला मन्ना की छतरी स्थित है। 
    • दिवेर - राजसमंद जिले के दिवेर स्थान पर प्रसिद्ध दिवेर का युद्ध लड़ा गया था। दिवेर के युद्ध को कर्नल जेम्स टॉड ने मेवाड़ का मैराथन कहा है। दिवेर का युद्ध 1582 ईस्वी में महाराणा प्रताप एवं अकबर के मध्य हुआ था। जिसमें महाराणा प्रताप को विजय प्राप्त हुई थी। 
    • कुंभलगढ़ दुर्ग - कुंभलगढ़ दुर्ग का निर्माण 1443 ईस्वी से 1456 ईसवी के मध्य राजसमंद के सादड़ी गांव के पास अरावली की जरगा पहाड़ी पर महाराणा कुंभा ने करवाया था। कुंभलगढ़ दुर्ग का वास्तुकार/शिल्पी मंडन था। कुंभलगढ़ दुर्ग की दीवार की लंबाई 36 किलोमीटर है तथा इसकी चौड़ाई (7 मीटर) इतनी है कि उस पर 4 घुड़सवार एक साथ चल सकते हैं। इसलिए कुंभलगढ़ दुर्ग की प्राचीर को भारत की महान दीवार कहते हैं। पृथ्वीराज सिसोदिया का बचपन इसी दुर्ग में गुजरा था तथा यहीं पर उसकी 12 खंभों की छतरी भी स्थित है। कर्नल जेम्स टॉड ने इस दुर्ग के सुदृढ़ बना होने के कारण इसे एस्ट्रास्कोन की उपमा दी है। कुंभलगढ़ दुर्ग में ही उदय सिंह का 1537 ईस्वी में राज्याभिषेक हुआ था। कुंभलगढ़ दुर्ग के भीतर कुंभा का निवास स्थान कटार गढ़ कहलाता है। जिसमें महाराणा कुंभा रहकर मेवाड़ के साम्राज्य की देखरेख करता था। इसलिए इस कटारगढ़ दुर्ग को मेवाड़ की आंख भी कहा जाता है। इसी कटारगढ़ दुर्ग में 1540 ईसवी में महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था। यहीं पर कुंभा की हत्या पुत्र उदा ने की थी। कुंभलगढ़ दुर्ग के प्रमुख उपनाम - कुंभपुर, कमलमीर, संकटकाल में मेवाड़ के राजाओं की शरण स्थली, कुंभलमेऊ, मच्छेंद्र आदि। 
    • राजसमंद झील - कांकरोली (राजसमंद) में मेवाड़ के शासक राज सिंह के नाम पर 1600  से 1662 के दौरान निर्मित राजसमंद झील स्थित है। यह एकमात्र झील है, जिसके नाम पर जिले का नाम पड़ा है। इस झील में गोमती नदी का पानी आकर गिरता है। इसके उत्तरी भाग को नौ चौकी कहते हैं, जहां रणछोड़ भट्ट तैलंग द्वारा संस्कृत भाषा में 25 खंडों में शिलालेख लिखा हुआ है, जिसमें मेवाड़ का इतिहास वर्णित है। इसे राज प्रशस्ति भी कहा जाता है। यह संसार की सबसे बड़ी प्रशस्ति है। राज्य सरकार ने धार्मिक दृष्टि से राजसमंद झील को पवित्र झील घोषित किया है। यह राजस्थान की दूसरी बड़ी कृत्रिम झील है। 
    • कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्ययह - यह अभ्यारण्य राजसमंद, उदयपुर तथा पाली जिले में फैला हुआ है। इस अभ्यारण्य को भेड़ियों की प्रजनन स्थली भी कहा जाता है। यह राजस्थान का एकमात्र अभयारण्य है, जहां से प्रदेश की दो अलग-अलग दिशा में बहने वाली बनास एवं साबरमती नदी का उद्गम होता है। यहां पर जंगली धूसर मुर्गे, कुंभलगढ़ दुर्ग, रणकपुर के मंदिर, परशुराम महादेव मंदिर, चंदन के वृक्ष आदि प्रसिद्ध है। 
    • चेतक का चबूतरा - हल्दीघाटी के निकट बलीचा गांव में महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की याद में बना चबूतरा चित्र का चबूतरा कहलाता है। 
    • पृथ्वीराज सिसोदिया की छतरी - कुंभलगढ़ दुर्ग में 12 खंभों की छतरी बनी हुई है, जिसे पृथ्वीराज सिसोदिया के छतरी भी कहा जाता है। 
    • गिलूण्ड - बनास नदी के किनारे विकसित ताम्र युगीन सभ्यता है। 


    राजसमंद जिले के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न/तथ्य


    • जेके टायर का कारखाना - यह दक्षिणी एशिया/राज्य का सबसे बड़ा टायर ट्यूब बनाने का कारखाना है। यह का राजसमंद के कांकरोली में स्थित है। 
    • नाथद्वारा (राजसमंद) शैली - इस शैली को वल्लभ शैली भी कहा जाता है। इसमें कृष्ण की बाल लीलाएं, गायों, केले के वृक्ष, कृष्ण-यशोदा के चित्र आदि का चित्रण मिलता है। इस शैली का प्रारंभ एवं स्वर्णकाल राजसिंह के शासनकाल को माना जाता है। यह शैली उदयपुर शैली एवं ब्रज शैली का मिश्रण है। नाथद्वारा शैली की पिछवाईयाँ, भित्ति चित्र एवं हवेली संगीत प्रसिद्ध है। नाथद्वारा शैली के प्रख्यात चित्रों का विषय श्रीनाथजी के सहस्त्रा स्वरूप है। 
    • वल्लभ संप्रदाय - वल्लभ संप्रदाय के संस्थापक वल्लभाचार्य (श्री कृष्ण के बाल रूप की पूजा) थे। इनकी प्रधान पीठ नाथद्वारा (राजसमंद) में है व दूसरी पीठ कोटा में है। 'श्रीकृष्ण शरणम मम:' इस संप्रदाय का संबोधन है। 
    • राजस्थान के राजसमन्द जिले की आकृति तिलक के समान है। 
    • विश्व की सबसे बड़ी प्रशस्ति 'राज प्रशस्ति' राजसमंद झील पर राजसमंद जिले में स्थित है। 
    • भारत का पहला ट्रांसपोर्ट हब - 'रेलमगरा' में है। 
    • राजस्थान में प्रथम एचआईवी (एड्स जाँच मोबाइल सेंटर राजसमंद जिले में है। 
    • राजस्थान का न्यूनतम सिंचाई वाला जिला - राजसमंद जिला है। 
    • दमश्क/चेती गुलाब की खेती खमनौर (राजसमंद) में की जाती है। 
    • राजसमंद के राजपुरा एवं दरीबा से सीसा, जस्ता एवं चांदी प्राप्त होती है। 
    • सफेद रंग का संगमरमर राजसमंद जिले से प्राप्त होता है। 
    • तारकशी (चांदी के जेवर), पिछवाईयाँ (कपड़े पर कृष्ण की बाल लीलाओं का अंकन) व केले के पत्तों की सांझी नाथद्वारा की प्रसिद्ध है। 
    • टेराकोटा/मिट्टी की मूर्तियां मोलेला गांव राजसमंद की प्रसिद्ध है। 
    • डांग नृत्य - नाथद्वारा (राजसमंद) में किया जाता है। 

    आज के इस पोस्ट में हमने "राजस्थान के जिला दर्शन" की श्रृंखला में "राजसमंद जिला दर्शन" को पूरी तरह से कवर करने की पूरी कोशिश की हैं। इसमें राजसमंद का सामान्य परिचय, राजसमंद के उपनाम, राजसमंद का क्षेत्रफल, राजसमंद की मानचित्र में स्थिति, राजसमंद में विधानसभा क्षेत्र, राजसमंद के मेले, राजसमंद के प्रमुख मंदिर, राजसमंद के पर्यटन स्थल एवं इसके अलावा जितने भी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न बन सकते थे, उन सभी को शामिल कर पेश किया गया है। मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सभी पाठकों को मेरी यह पोस्ट पसंद आयी होगी। आप सभी को यह पोस्ट कैसी लगी आप मुझे कमेंट करके जरूर बताएं।


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