पाली का प्राचीन नाम पालिका था। पाली इतिहास प्रसिद्ध दानी भामाशाह की जन्मस्थली रहा है, जोकि महाराणा प्रताप के साथी थे।
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Pali GK : Pali Jila Darshan





    पाली जिले का सामान्य परिचय

    • पाली जिले की अक्षांशीय स्थिति : 24 डिग्री 45 मिनट उत्तरी अक्षांश से 26 डिग्री 75 मिनट उत्तरी अक्षांश तक। 
    • पाली जिले की देशांतरीय स्थिति : 72 डिग्री 48 मिनट पूर्वी देशांतर से 74 डिग्री 20 मिनट पूर्वी देशांतर तक। 



    पाली जिले के प्रमुख मेले और त्यौहार


    • बाली पशु मेला - यह मेला पाली जिले के बाली में 1 फरवरी से 7 फरवरी तक भरता है। 
    • रणकपुर मेला - यह मेला पाली के रणकपुर में फाल्गुन शुक्ला 4 एवं 5 को भरता है। 
    • निंबाज पशु मेला - यह मेला निंबाज (पाली) में 8 फरवरी को प्रतिवर्ष भरता है। 
    • परशुराम महादेव मेला - यह मेला (परशुराम महादेव ) पाली में  श्रावण कृष्ण 6 और 7 को भरता है। 
    • चौटिला पीर का मेला - यह मेला पीर दुल्लेशाह दरगाह (पाली) में कार्तिक कृष्ण पक्ष 1  एवं 2  को भरता है। 
    • सोनाणा खेतलाजी मेला - यह मेला पाली की देसूरी तहसील में सोनाणा स्थान पर चैत्र शुक्ला एकम को भरता है। 
    • गौतमेश्वर (भूरिया बाबा) मेला - यह मेला पाली में गौतमेश्वर नाणा स्टेशन पर 13 अप्रैल से 15 मई तक का भरता है। 
    • बिरांटिया महादेव मेला - यह मेला बिरांटिया खुर्द (पाली) में भादवा कृष्णा 11  एवं 12  को भरता है। 



    पाली जिले के प्रमुख मंदिर/शीर्ष मंदिर


    • चौमुखा जैन मंदिर, रणकपुर - प्रसिद्ध श्वेतांबर जैन मंदिर पाली की देसूरी तहसील में स्थित रणकपुर काचौमुखा जैन मंदिर है। यह मंदिर रणकपुर गांव (पाली) में महाराणा कुंभा के काल में धरणकशाह  द्वारा शिल्पी देपा की देखरेख में 1439 ईस्वी में बनवाया गया था। यह पूरा मंदिर 1444 स्तंभों पर खड़ा है। यह मंदिर माद्री पर्वत की छाया में स्थित है। रणकपुर के इस जैन मंदिर में भगवान आदिनाथ का मंदिर है। इस मंदिर की एक खास विशेषता है कि इसके किसी भी कोने पर खड़े होकर आप भगवान के दर्शन कर सकते हो, इसमें 1444 स्तंभों में से कोई भी स्तंभ आड़े नहीं आता है। इस मंदिर के चारों दिशाओं में भगवान आदिनाथ की प्रतिमाएं स्थापित है, इसीलिए इस मंदिर को 'चतुर्मुख जिन प्रासाद' भी करते हैं
    • गौतमेश्वर मंन्दिर - गौतमेश्वर का यह मंदिर पाली जिले में सुकड़ी नदी के किनारे स्थित है। गौतमेश्वर को मीणा जनजाति के लोग अपना इष्ट देव मानते हैं और इन्हें प्रेम से भूरिया बाबा के नाम से संबोधित करते हैं। भूरिया बाबा के मेले में मीणा जनजाति के लोग आते हैं तथा वे अपने पूर्वजों की अस्थियां वहां से बहने वाली सुकड़ी नदी में विसर्जित करते हैं। 
    • मूंछाला महावीर मंदिर - इनके मंदिर में मूछों वाले महावीर स्वामी की मूर्ति स्थापित है। 
    • सांडेराव का शांतिनाथ जिनालय - यह पाली जिले में स्थित है। इसका निर्माण पांडवों के वंशधर गंधर्वसेन ने करवाया था। 
    • राता महावीर का जैन मंदिर - यहां पर भी भव्य मंदिर स्थित है जिनकी स्थापत्य कला की तुलना रणकपुर जैन मंदिर से की जाती है। 
    • सोमनाथ मंदिर, पाली - पाली में स्थित इस सोमनाथ मंदिर का निर्माण विक्रम सामान 1209 में गुजरात के राजा कुमारपाल सोलंकी ने करवाया था। 



    पाली जिले के दर्शनीय स्थल/पर्यटन स्थल


    • कुम्भलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण्य - यह अभ्यारण्य पाली, राजसमंद एवं उदयपुर जिलों में फैला हुआ है। इस अभ्यारण्य को 'भेड़ियों की प्रजनन स्थली' भी कहते है। इस अभ्यारण्य में चंदन के वृक्ष, परशुराम महादेव का मंदिर, जंगली धूसर मुर्गे, कुम्भलगढ़ दुर्ग आदि प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। 
    • सोजत दुर्ग - सोजत दुर्ग पाली  जिले की सोजत तहसील में सुकड़ी नदी के मुहाने पर नानी सीरड़ी नामक डूंगरी पर स्थित है। इसका निर्माण 1460 ईस्वी के आसपास राव जोधा के पुत्र नीम्बा के द्वारा करवाया गया था। 
    • बाली - यह स्थान जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। बाली मिश्री नदी के किनारे स्थित है। 
    • सिरियारी - पाली जिले के इस छोटे से गांव सिरियारी में जैन श्वेतांबर तेरापंथ के प्रथम आचार्य श्री भिक्षु का निर्वाण हुआ था। 
    • वरकाणा - यह स्थान जैन समाज का एक बड़ा तीर्थ है। यहां पर पार्श्वनाथ भगवान का प्राचीन मंदिर स्थित है। 
    • मीरागढ़ - पाली जिले में मीरा की जन्मस्थली कुड़की गांव स्थित है। यहां पर मीरा मंदिर भी स्थित है। 
    • सोजत - सोजत कस्बा सुकड़ी नदी के किनारे स्थित है। यहां पर पीर मस्तान की दरगाह एवं सोजत किला स्थित है। 
    • घानेराव - यह स्थान जैन एवं हिंदू मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर सर्वाधिक प्रसिद्ध गजानंद का मंदिर, जिसमें देवी रिद्धि व सिद्धि के आदम कद बुत है। 
    • सादड़ी - यहां वराह अवतार मंदिर, खुदा बक्श बाबा की प्राचीन दरगाह, वराह अवतार मंदिर एवं पार्श्वनाथ जैन मंदिर आदि प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। 
    • रणकपुर - यहां के नेमिनाथ का मंदिर, चौमुखा जैन मंदिर आदि प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। विशेषकर अद्वितीय शिल्प से युक्त जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है, जिनका निर्माण महाराणा कुंभा के काल में हुआ था। 
    • देसूरी - यहां के नवी माता के मंदिर, परशुराम महादेव मंदिर आदि प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। 


    पाली जिले के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न/तथ्य

    • डी.एल.एफ. बिनानी सीमेंट का कारखाना - इसकी स्थापना 1996 में पोर्टलैंड सीमेंट देश की D.L.I. सीमेंट कम्पनी द्वारा दयालपुरा व पाटन केरपुरा गांव में 410 करोड़ की लागत से सीमेंट संयंत्र की स्थापना की गयी। 
    • एरियनपुरा छावनी में (21 अगस्त, 1857) - यहां पर सैनिको ने 21 अगस्त, 1857 को एजेंट टू  गवर्नर जनरल के पुत्र शिवनाथ सिंह के नेतृत्व में विद्रोह किया और 'चलो दिल्ली मारो फिरंगी' का नारा देते हुए दिली की ओर कुछ किया था। 
    • गिरी सुमेल/जैतारण का युद्ध - गिरी सुमेल का युद्ध 1544 ईस्वी में शेरशाह सूरी व मालदेव के मध्य हुआ जिसमे शेरशाह सूरी विजयी रहा था। 
    • सुगाली माता - सुगाली  माता को 1857 की क्रांति की देवी भी कहते है। यह आऊवा के ठाकुर कुशालसिंह चम्पावत की इष्टदेवी है। इसकी मूर्ति वर्तमान में पाली के संग्रहालय में रखी गई है। 
    • सूकड़ी नदी - सूकड़ी नदी का उद्गम देसूरी (पाली के पास) से होता है। 
    • महाराजा उम्मेदसिंह मिल्स लिमिटेड - इसकी स्थापना 1942 ईस्वी में पाली में की गयी थी। यह राजस्थान की सबसे बड़ी एवं सर्वाधिक उत्पादन करने वाली मिल है। 
    • जवाई नदी - जवाई नदी का उद्गम पाली जिले की बाली तहसील के गौरया गांव से होता है। इस जवाई नदी में जल प्रदूषण का प्रमुख कारण रंगाई और छपाई उद्योग है। 
    • जवाई बांध - पाली जिले के सुमेरपुर के निकट जवाई नदी पर यह जवाई बांध स्थित है। यह बांध पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध है।  इस बांध को मारवाड़ का अमृतसरोवर भी कहा जाता है। इसका निर्माण जोधपुर के महाराजा उम्मेदसिंह के द्वारा इंजीनियर एडगर की देखरेख 13 मई, 1946  में करवाया गया था। 
    • पाली जिले के अन्य बांध - बीठन बांध, पादरा टेंक, हेमावास बांध, बांकली बांध आदि। 
    • सात रंग का संगमरमर ख़ानदरी गांव (पाली जिले) से प्राप्त होता है। 
    • राजस्थान में जैन धर्म का प्रथम स्वर्ण मंदिर - फालना (पाली जिले) में है। 
    • राजस्थान का सर्वाधिक आठ जिलों की सीमा से लगने वाला जिला - पाली जिला है। 
    • राजस्थान का सर्वाधिक राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या (07) वाला जिला   -  पाली जिला। 
    • सोनमुखी व मेहँदी की मंडी सोजत (पाली) में है। 
    •  गरासियों की फ़ाग - सोजत (पाली) की प्रसिद्ध है। 
    • राजस्थान में भूमिज शैली का सबसे पुराना मंदिर पाली जिले का सेवाड़ी जैन मंदिर है। 
    • पीर दुल्लेशाह की दरगाह - सोजत (पाली) में है। 
    • खुदा बक्श बाबा की दरगाह - सादड़ी (पाली) में है। 
    • मस्तान बाबा की दरगाह - सोजत (पाली) में है। 
    • लल्लू लिया नामक रुपया रियासत कालीन सोजत में प्रचलित था। 

    आज के इस पोस्ट में हमने "राजस्थान के जिला दर्शन" की श्रृंखला में "पाली जिला दर्शन" को पूरी तरह से कवर करने की पूरी कोशिश की हैं। इसमें पाली का सामान्य परिचय, पाली के उपनाम, पाली का क्षेत्रफल, पाली की मानचित्र में स्थिति, पाली में विधानसभा क्षेत्र, पाली के मेले, पाली के प्रमुख मंदिर, पाली के पर्यटन स्थल एवं इसके अलावा जितने भी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न बन सकते थे, उन सभी को शामिल कर पेश किया गया है। मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सभी पाठकों को मेरी यह पोस्ट पसंद आयी होगी। आप सभी को यह पोस्ट कैसी लगी आप मुझे कमेंट करके जरूर बताएं।

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