राजस्थान में पेयजल एवं सिंचाई परियोजनाएं - आज की इस पोस्ट में राजस्थान की प्रमुख बहुद्देशीय परियोजनाएं, वृहद सिंचाई परियोजनाएं पर एक महत्वपूर्ण लेख लिखा गया है। इसमें राजस्थान में सिंचाई परियोजना, राजस्थान की बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजनाएं, माही बजाज सागर बांध परियोजना, राजस्थान की प्रमुख प्रियोजना, सावन भादो परियोजना, मानसी वाकल परियोजना, परवन सिंचाई परियोजना, राजस्थान में बहुद्देशीय परियोजनाएं Trick PDF Download आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य शामिल किये गए है।
राजस्थान में पेयजल एवं सिंचाई परियोजनाएं - Irrigation Projects in Rajasthan
राजस्थान में पेयजल एवं सिंचाई परियोजनाएं

राजस्थान की बहुद्देशीय परियोजनाएं

बहुद्देशीय परियोजनाएं - ऐसी परियोजनाएं जो अनेक उद्देश्यों यथा- पेयजल, विधुत, सिंचाई, उद्योग तथा अन्य कार्यों हेतु जल उपलब्ध करवाती हो, बहुद्देशीय परियोजनाएं कहलाती है। प्रमुख बहुद्देशीय परियोजनाएं निम्न है - भाखड़ा नागल, चम्बल, व्यास तथा माही बजाजसागर आदि।

माही बजाज परियोजना -

इस परियोजना को वर्ष 1971 में स्वीकृति मिली तथा 1983 में इसका शुभारम्भ इंदिरा गाँधी द्वारा किया गया। यह परियोजना राजस्थान राज्य (45% जल ) तथा गुजरात राज्य (55% जल) दोनों की सयुंक्त परियोजना है। इस परियोजना की कुल विधुत उत्पादन क्षमता 140 मेगावाट है। इस परियोजना में बनने वाली सम्पूर्ण ऊर्जा (100 %) राजस्थान को मिलती है। इस नदी परियोजना से डूंगरपुर एवं बांसवाड़ा में सिंचाई की जाती है। यह परियोजना माही नदी पर संचालित है। इस परियोजना से राजस्थान के बांसवाड़ा जिले को सर्वाधिक लाभ मिलता है। इसमें माही नदी पर बांसवाड़ा शहर के निकट बोरखेड़ा गांव में माही बजाज सागर बांध (पक्का बांध) तथा गुजरात में कडाना बांध बनाया गया है। माही परियोजना का नामकरण स्वतंत्रता सेनानी एवं राष्ट्रीय नेता जमनालाल बजाज के नाम पर ही माही बजाज सागर परियोजना किया गया।

चम्बल नदी घाटी परियोजना -

यह परियोजना राजस्थान (50%) एवं मध्यप्रदेश (50%) की सयुंक्त परियोजना है। इसकी कुल विधुत उत्पादन क्षमता 386 मेगावाट है, जिसमे से 50% यानि की 193 मेगावाट राजस्थान को एवं इतनी ही मध्यप्रदेश को विधुत मिलती है। इस परियोजना के तहत माही नदी पर तीन बांध बनाकर ऊर्जा उत्पादन की जाती है, जो निम्न प्रकार है:- 
  • गांधीसागर बांध (मध्यप्रदेश में) - इससे 115 मेगावाट विधुत उत्पादन होता है।
  • राणा प्रताप सागर बांध (चित्तौड़गढ़) - इससे 172 मेगावाट विधुत का उत्पादन होता है।
  • जवाहर सागर बांध (कोटा) - इससे 99 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन होता है।
इस परियोजना से मुख्यत: कोटा, बूंदी तथा बारां जिलों एवं मध्यप्रदेश में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई है।
चम्बल परियोजना की नहरें - 
  • बायीं मुख्य नहर - इस नहर की कुल लम्बाई 259 किलोमीटर है। इससे कोटा जिले की लाडपुरा तहसील तथा बूंदी जिले का केशवरायपाटन, बूंदी एवं इंदरगढ़ तहसील में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई गयी।
  • दायीं मुख्य नहर - इस नहर की कुल लम्बाई 124 किलोमीटर है। इससे बारां जिले की अंता तथा मांगरोल तहसील तथा कोटा जिले की लाडपुरा, दीगोद, पीपल्दा को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई गयी।
चम्बल लिफ्ट परियोजनाएं - 
  • जालीपुरा लिफ्ट स्किम (कोटा)
  • अंता लिफ्ट स्किम (बारां)
  • पचेल लिफ्ट स्किम (बारां)
  • सोरखंड लिफ्ट स्किम (बारां)
  • गणेशगंज लिफ्ट स्किम (बारां)
  • कचारी लिफ्ट स्किम (बारां)
  • अंता लिफ्ट माइनर (चक्षणाबाद-बारां)
  • दीगोद लिफ्ट स्किम (कोटा)

भाखड़ा नांगल परियोजना -

यह परियोजना सतलज नदी पर राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा राज्यों की सयुंक्त परियोजना है। इसकी कुल विधुत उत्पादन क्षमता 1493 मेगावाट है। इसमें से राजस्थान को 15.22% यानि की 227.3 मेगावाट ऊर्जा प्राप्त होती है।इस परियोजना से राजस्थान का हनुमानगढ़ जिला लाभान्वित होता है। भाखड़ा बांध विश्व का दूसरा तथा एशिया का सबसे ऊँचा कंक्रीट से बना गुरुत्व सीधा बांध है। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसे 'पुनरुत्थित भारत का नवीन मंदिर' तथा 'चमत्कारी विराट वस्तु की संज्ञा' दी थी। इसके तहत नांगल बांध से निकली गयी 'भाखड़ा नहर' से राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा को जलापूर्ति तथा सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होती है। जबकि बिस्त दोआब नहर से पंजाब को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई है।

व्यास परियोजना -

यह परियोजना राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा की सयुंक्त परियोजना है। इसमें दो विधुत गृह (देहर एवं पोंग) स्थापित कर विधुत उत्पादन किया जाता है। इस परियोजना से राजस्थान को कुल विधुत 422.64 मेगावाट प्राप्त होती है, जिनमे देहर से उत्पादित कुल विधुत 990 मेगावाट का 20% यानि की 198 मेगावाट तथा पोंग से उत्पादित कुल विधुत 384 मेगावाट का 58.5% यानि की 224.64 मेगावाट विधुत प्राप्त होती है। 

राजस्थान की वृहद सिंचाई परियोजनाएं

इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना -

इस परियोजना की आधारशिला तत्कालीन गृह मंत्री श्री गोविंद वल्लभ पंत ने 31 मार्च, 1958 में रखी, लेकिन नहर में सर्वप्रथम पानी तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् ने 11 अक्टूबर, 1961 को नोरंग देसर (हनुमानगढ़) से छोड़ा। इस परियोजना का मूल नाम 'राजस्थान नहर' था। जिसे 2 नवम्बर, 1984 को नाम परिवर्तित करके 'इन्दिरा गाँधी नहर' कर दिया गया। इसे 'राजस्थान की मरुगंगा व राज्य की जीवन रेखा' आदि नामों से जाना जाता है। इस परियोजना के योजनाकार बीकानेर रियासत के मुख्य सिंचाई अभियंता 'कँवर सेन' थे, जिन्होनें 1948 में अपनी पुस्तक ''बीकानेर राज्य के लिए पानी की आवश्यकता'' में इसका प्रारूप रखा। उन्हें इस नहर को बनाने की प्रेरणा "गंग नहर' से मिली। इसका उद्गम पंजाब में फिरोजपुर के निकट सतलज व व्यास नदी के संगम पर हरि के बेराज बाँध से हुआ। यह परियोजना में दो चरणों में पूरी हुई - प्रथम चरण के तहत "राजस्थान फीडर" 204 किमी हरि के बेराज से मसीता वाली हेड तक 1992 में पूरी हो गई। दूसरे चरण के तहत 256 किमी. का निर्माण करना था, जिसे बाद में 445 किमी. कर दिया। यह चरण मसीता वाली हेड (हनुमानगढ़) से मोहनगढ़ (जैसलमेर) तक था जिसे 165 किमी. और बढ़ाकर अंतिम स्थान गडरा रोड (बाड़मेर) कर दिया जिसे जीरो पॉइन्ट कहा जाता है। पोंग बांध राजस्थान में इंदिरा गाँधी नहर वृहद् परियोजना का अंग है। 
इंदिरा गाँधी नहर की 7 लिफ्ट नहरें -
  • नोहर-साहवा लिफ्ट नहर (चौधरी कुम्भाराम लिफ्ट नहर) - इससे हनुमानगढ़, चूरू, बीकानेर तथा झुंझुनूं जिले लाभान्वित हुए।
  • कंवरसेन लिफ्ट नहर (बीकानेर-लूणकरणसर लिफ्ट नहर) - बीकानेर एवं गंगानगर जिले लाभान्वित।
  • पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर (गजनेर लिफ्ट नहर) - इससे बीकानेर एवं नागौर जिले लाभान्वित।
  • वीर तेजाजी लिफ्ट नहर (बांगड़सर लिफ्ट नहर) - इससे बीकानेर जिला लाभान्वित।
  • डॉ. करणीसिंह लिफ्ट नहर (कोलायत लिफ्ट नहर) - इससे जोधपुर एवं बीकानेर जिले लाभान्वित।
  • गुरु जम्भेष्वर लिफ्ट नहर (फलौदी लिफ्ट नहर) - इससे जोधपुर, बीकानेर एवं जैसलमेर जिले लाभान्वित।
  • जय नारायण व्यास लिफ्ट नहर (पोकरण लिफ्ट नहर) - इससे जोधपुर एवं जैसलमेर जिले लाभान्वित।

गंगनहर परियोजना -

गंगनहर को बीकानेर नहर के नाम से भी जाना जाता है। गंगनहर की आधारशिला बीकानेर के शासक महाराजा गंगा सिंह द्वारा 5 सितंबर 1921 ईस्वी को रखी गई थी तथा इसका उद्घाटन 26 अक्टूबर 1927 ईस्वी को वायसराय लॉर्ड इरविन ने किया था। यह राजस्थान की पहली नहर सिंचाई परियोजना है। इस नहर का उद्गम पंजाब के फिरोजपुर के निकट हुसैनीवाला नामक स्थान पर सतलज नदी से होता है। 

राजीव गाँधी सिद्धमुख एवं नोहर सिंचाई परियोजना - 

1982 के रावी तथा व्यास नदियों के जल बंटवारे के समझौते में राजस्थान को जल का उपयोग करने के लिए इस परियोजना का शिलान्यास 5 अक्टूबर, 1989 को श्री राजीव गाँधी द्वारा भिरानी गांव के निकट किया गया तथा इसका लोकार्पण 12 जिले, 2002 को किया गया। इस परियोजना से हनुमानगढ़ जिले की नोहर एवं भादरा तहसील तथा चूरू जिले की राजगढ़ तहसील के गांवों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई गयी।

बीसलपुर बांध परियोजना -

यह परियोजना राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है। जो राजस्थान के टोंक, अजमेर एवं जयपुर जिलों को जलापूर्ति करती है, टोंक जिले के राजमहल (टोडारायसिंह) में बनास, खारी एवं डाई नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित है। यह राजस्थान का एकमात्र कंक्रीट से बना बांध है।

ईसरदा बांध परियोजना -

बनास नदी के अतिरिक्त जल को जयपुर, टोंक, सवाई माधोपुर जिलों में पेयजल आपूर्ति तथा साईमाधोपुर जिले में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने के उदेश्य से सवाई माधोपुर जिले के ईसरदा गांव में बांध बनाया गया। ईसरदा बांध के ऊपरी बहाव क्षेत्र में एक कॉफर बांध बनाया जायेगा, जिससे टोंक जिले को पेयजल उपलब्ध होगा।

नर्मदा नहर परियोजना - 

नर्मदा नहर परियोजना राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र की संयुक्त परियोजना है। गुजरात में सरदार सरोवर बांध से नर्मदा नहर निकलती है, जहां से यह बहकर राजस्थान की सीमा पर जालौर जिले की सांचोर तहसील के सीलू गांव से राजस्थान में प्रवेश करती है। इसका पानी पहली बार सीलू गांव 18 मार्च, 2008 को पहुंचा था। 27 मार्च, 2008 को भव्य समारोह में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा इसका पानी राजस्थान में प्रवेश कराया गया। यह राजस्थान की पहली परियोजना है, जिसमें सिंचाई केवल स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई पद्धति से करने का प्रावधान है। इस परियोजना के तहत अभी तक जालौर एवं बाड़मेर जिलों को पेयजल सुविधा एवं सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई गयी। इस नहर परियोजना से तीन लिफ्ट नहर - सांचोर लिफ्ट नहर, भादरेड़ा लिफ्ट नहर तथा पनोरिया लिफ्ट नहर का निर्माण किया गया। अन्य प्रमुख वितरिकाएं - बालेरा, रतौड़ा, कैरिया, गांधव, जैसला, मानकी, भीमगुड़ा आदि है।

जाखम बांध परियोजना -

प्रतापगढ़ जिले के अनूपपुरा गांव में जाखम नदी पर बांध (जाखम बांध) बनाकर प्रतापगढ़ जिले की धरियावद एवं प्रतापगढ़ तहसील को पेयजल एवं सिंचाई हेतु जल उपलब्ध करवाया गया।

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