राजस्थान का एकीकरण : आज की इस पोस्ट में राजस्थान के एकीकरण पर एक महत्वपूर्ण लेख लिखा है। आप सभी इसको पूरा जरूर पढ़ें। इसमें राजस्थान के एकीकरण के सात चरण, उनके प्रधानमंत्री, उद्घाटनकर्ता, राजप्रमुख, उपराजप्रमुख, महाराजप्रमुख, राजधानी, स्थापना कब हुई, कौनसी रियासत कब मिलाई, राजस्थान एकीकरण के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, तथ्य आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी है।
राजस्थान का एकीकरण - Political Integration of Rajasthan in Hindi
राजस्थान का एकीकरण

राजस्थान का एकीकरण

  • 1800 ई. में जार्ज थॉमस ने इस भू-भाग का सर्वेक्षण एवं अध्ययन किया और उन्होंने इसे 'राजपूताना' का नाम दिया।
  • कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक 'एनाल्स एण्ड एन्टीक्विटीज ऑफ राजस्थान' में सर्वप्रथम 1829 में इस भू-भाग के लिए राजस्थान शब्द का प्रयोग किया।
  • राजस्थान में रियासती विभाग सचिवालय की स्थापना 5 जुलाई, 1947 ई. की गई।
  • राजस्थान के एकीकरण का श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता है।
  • राजस्थान का एकीकरण कुल सात चरणों में 18 मार्च, 1948 से शुरू होकर 1 नवम्बर, 1956 में पूरी हुई, जिसमें कुल 8 वर्ष 7 माह 14 दिन का समय लगा।
  • राजस्थान के एकीकरण के समय राजस्थान में कुल 26 जिले थे, राजस्थान का 26 वां जिला अजमेर था, जो 1  नवंबर,1956 को बना था।
  • राजस्थान में स्वतंत्रता प्राप्ति के समय 19 रियासतें, 3 ठिकाने व एक केन्द्र शासित प्रदेश (अजमेर-मेरवाड़ा) था।
  • राजस्थान की 19 रियासतें - अलवर, धौलपुर, उदयपुर, करौली, भरतपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, शाहपुरा, डूंगरपुर, कोटा, बूंदी, झालावाड़, किशनगढ़, जयपुर, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, टोंक, सिरोही।
  • राजस्थान के 3 ठिकानें - कुशलगढ़ (बाँसवाड़ा), नीमराणा (अलवर), लावा (टोंक - वर्तमान में जयपुर)
  • राजस्थान की सबसे पुरानी रियासत - मेवाड़ रियासत।
  • राजस्थान की सबसे नवीनतम रियासत - झालावाड़ रियासत (एकमात्र रियासत जिसका निर्माण अंग्रेजों ने किया)।
  • राजस्थान की क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी रियासत - मारवाड़ रियासत।
  • राजस्थान की जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ी रियासत -जयपुर रियासत।
  • राजस्थान की क्षेत्रफल व जनसंख्या की दृष्टि से सबसे छोटी रियासत - शाहपुरा रियासत।
  • राजस्थान की शाहपुरा व किशनगढ़ रियासत को तोप की सलामी का अधिकार नहीं था।
  • राजस्थान में एकमात्र मुस्लिम रियासत - टोंक रियासत।
  • राजस्थान की जाट रियासतें - धौलपुर व भरतपुर रियासतें।
  • बांसवाड़ा के राजा चन्द्रवीर सिंह ने "मैं अपने डेथ वारण्ट पर हस्ताक्षर कर रहा हूँ" कहते हुये राजस्थान में अपनी रियासत का विलय किया।
  • बीकानेर रियासत के भारतीय संघ में विलय के समय वहां के महाराजा शार्दुल सिंह थे।
  • अजमेर व सिरोही रियासतों का राजस्थान में दो सौपानों में विलय हुआ।
  • राजस्थान की शाहपुरा एकमात्र रियासत थी, जिसने अपने राज्य में पूर्ण उत्तरदायी शासन की स्थापना 14 अगस्त, 1947 को ही कर दी थी।
  • कोटा के महाराव भीमसिंह कोटा, बूंदी और झालावाड़ को मिलकर हाड़ोती संघ बनाना चाहते थे।
  • आजादी के बाद राजस्थान राज्य भारतीय संविधान के अनुसार द्वितीय श्रेणी का राज्य था।

प्रथम चरण (मत्स्य संघ) -

  • स्थापना - 18 मार्च, 1948 
  • मत्स्य संघ - अलवर, भरतपुर, धौलपुर व करौली रियासतें तथा अलवर का नीमराना ठिकाना को 18 मार्च, 1948 को मिलकर मत्स्य संघ का निर्माण किया गया।
  • मत्स्य संघ की राजधानी - अलवर।
  • मत्स्य संघ के प्रधानमंत्री - शोभाराम कुमावत (अलवर प्रजामण्डल के प्रमुख)।
  • मत्स्य संघ के राजप्रमुख - धौलपुर के शासक उदयभान सिंह।
  • मत्स्य संघ के उपराजप्रमुख - करौली के महाराजा तेजसिंह।
  • के.एम. मुंशी के आग्रह पर इस संघ का नाम मत्स्य संघ रखा गया।
  • मत्स्य संघ का उद्घाटनकर्ता - एन. वी. गॉडगिल।

द्वितीय चरण (राजस्थान संघ या पूर्व राजस्थान) -

  • स्थापना - 25 मार्च, 1948 
  • राजस्थान संघ - 25 मार्च, 1948 ई. को कोटा, बूंदी, झालावाड़, बाँसवाड़ा, शाहपुरा, प्रतापगढ़, किशनगढ़, टोंक, डूंगरपुर रियासत तथा कुशलगढ़ ठिकाने (9 रियासतें तथा 1 ठिकाना) को मिलाकर राजस्थान संघ या पूर्व राजस्थान का गठन किया गया।
  • राजस्थान संघ की राजधानी - कोटा।
  • राजस्थान संघ के प्रधानमंत्रीगोकुललाल असावा (शाहपुरा के)।
  • राजस्थान संघ के राजप्रमुखकोटा महाराव भीमसिंह
  • राजस्थान संघ के उपराजप्रमुखबूंदी के महाराव बहादुर सिंह
  • राजस्थान संघ का उद्घाटनकर्ता - एन. वी. गॉडगिल।

तृतीय चरण (संयुक्त राजस्थान) -

  • स्थापना - 18 अप्रैल, 1948
  • संयुक्त राजस्थान - 18 अप्रैल, 1948 को राजस्थान संघ में उदयपुर रियासत (मेवाड़) के विलय से संयुक्त राजस्थान का निर्माण हुआ।
  • संयुक्त राजस्थान की राजधानी - उदयपुर।
  • संयुक्त राजस्थान के प्रधानमंत्री - माणिक्य लाल वर्मा
  • संयुक्त राजस्थान के राजप्रमुख - उदयपुर के महाराणा भूपालसिंह
  • संयुक्त राजस्थान के उपराजप्रमुख - कोटा महाराव भीमसिंह
  • संयुक्त राजस्थान का उद्घाटनकर्ता - जवाहर लाल नेहरू

चतुर्थ चरण (वृहद् राजस्थान) -

  • स्थापना - 30 मार्च, 1949
  • वृहद् राजस्थान - 30 मार्च, 1949 को संयुक्त राजस्थान में जयपुर, बीकानेर, जोधपुर व जैसलमेर तथा लावा ठिकाना को मिलाकर वृहद् राजस्थान का निर्माण किया गया।
  • वृहद् राजस्थान की राजधानी - जयपुर।
  • वृहद् राजस्थान के प्रधानमंत्री - हीरालाल शास्त्री
  • वृहद् राजस्थान के राजप्रमुख - जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय 
  • वृहद् राजस्थान के उपराजप्रमुख - कोटा महाराव भीमसिंह
  • वृहद् राजस्थान का उद्घाटनकर्ता - सरदार वल्लभ भाई पटेल
  • वृहद् राजस्थान के महाराजप्रमुख - उदयपुर के महाराणा भूपालसिंह
  • राममनोहर लोहिया की अध्यक्षता में समाजवादी दल ने राजस्थान आंदोलन समिति का गठन कर वृहद् राजस्थान के निर्माण की योजना बनाई।
  • श्री पी. सत्यनारायण राव की अध्यक्षता में गठित कमेठी की सिफारिशों पर जयपुर को राजस्थान की राजधानी घोषित किया गया।
  • 30 मार्च, 1949 को वृहद् राजस्थान के रूप में राजस्थान के मौलिक एवं महत्त्वपूर्ण इकाई का गठन होने के कारण 30 मार्च को राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • जोधपुर में उच्च न्यायालय, बीकानेर में शिक्षा विभाग, उदयपुर में खनिज विभाग तथा भरतपुर में कृषि विभाग स्थापित किया गया।

पंचम चरण (संयुक्त वृहद् (वृहत्तर) राजस्थान) -

  • स्थापना - 15 मई, 1949
  • संयुक्त वृहद् राजस्थान - 15 मई, 1949 को वृहद् राजस्थान में  शंकर राव देव समिति की सिफारिश पर मत्स्य संघ का विलय होने से संयुक्त वृहद् राजस्थान का निर्माण किया गया।
  • संयुक्त वृहद् राजस्थान की राजधानी - जयपुर।
  • प्रधानमंत्री पद को समाप्त कर मुख्यमंत्री का पद सृजित किया गया तथा राजस्थान का प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री को बनाया गया। इनको शपथ राजप्रमुख मानसिंह द्वितीय ने दिलाई थी।
  • मत्स्य संघ के प्रधानमंत्री श्री शोभाराम कुमावत को हीरालाल शास्त्री मंत्रिमण्डल में शामिल किया गया।

षष्टम चरण (राजस्थान) -

  • स्थापना -  26 जनवरी, 1950
  • राजस्थान की राजधानी - जयपुर।
  • मुख्यमंत्री - हीरालाल शास्त्री।
  • राजप्रमुख - मानसिंह द्वितीय।
  • सरदार वल्लभ भाई पटेल सिरोही को गुजरात में शामिल करना चाहते थे।
  • सरदार पटेल ने 1950 ई. में सिरोही के दो टुकड़े कर दिए जिसके फलस्वरूप सिरोही के दो प्रमुख आकर्षण देलवाड़ा व आबूरोड गुजरात में चले गए।
  • राजस्थान में गोकुलभाई भट्ट के नेतृत्व में इसका तीव्र विरोध किया।
  • सिरोही का औपचारिक रूप से राजस्थान में विलय 07 फरवरी, 1950 को हुआ था।
  • 26 जनवरी, 1950 ई. को शेष सिरोही को संयुक्त वृहद् राजस्थान में शामिल किया गया तथा राजस्थान 'ब' श्रेणी का राज्य घोषित किया गया तथा संवैधानिक तौर पर राज्य का नाम 'राजस्थान' हुआ।  

सप्तम चरण (वर्तमान राजस्थान) -

  • स्थापना - 1 नवम्बर, 1956 
  • 1 नवम्बर, 1956 को फजल अली आयोग (राज्य पुनर्गठन आयोग) की सिफारिशों के आधार पर अजमेर - मेरवाड़ा तथा आबू-देलवाड़ा को राजस्थान में शामिल कर लिया गया।
  • मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील का सुनेल टप्पा क्षेत्र राजस्थान में मिलाया गया तथा झालावाड़ जिले का सिरोंज क्षेत्र मध्यप्रदेश में मिलाया गया।
  • 1 नवम्बर, 1956 को राजप्रमुख पद समाप्त कर दिया गया तथा राज्यपाल का पद सृजित किया गया। राजस्थान के प्रथम राज्यपाल के रूप में सरदार गुरुमुख निहाल सिंह को शपथ दिलाई गई।
  • प्रारम्भ में राजस्थान 'ब' श्रेणी का राज्य था किन्तु राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के लागू होने के बाद राजस्थान 'अ' श्रेणी का राज्य बना।
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