राजस्थान जिला दर्शन : 'कोटा जिला दर्शन'

'राजस्थान के कानपुर' के रूप में विख्यात कोटा जिले का नाम वहां के प्रारंभिक शासक कोटिया भील के नाम पर कोटा पड़ा। कोटा जिला शुरू में बूंदी राज्य का भाग था। मुगल बादशाह शाहजहां ने 1631 ईस्वी में बूंदी रियासत से पृथक कर बूंदी के शासक राव रतनसिंह के पुत्र माधोसिंह को इसका शासन सौंप दिया था। उसके बाद से ही कोटा रियासत एक स्वतंत्र रियासत बनी थी। 

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Kota GK : Kota Jila Darshan


    कोटा जिले के उपनाम/प्राचीन नाम


    • राजस्थान की औद्योगिक नगरी
    • राजस्थान का कानपुर
    • राजस्थान की शैक्षणिक नगरी
    • शिक्षा का तीर्थ स्थल
    • राजस्थान का नालंदा
    • उद्यानों का नगर
    • राजस्थान का सोया जिला
    • इंद्रप्रस्थ नगर
    • कोटा जिले का उपनाम - नन्द गांव


    कोटा जिले का सामान्य परिचय

    • कोटा जिले के पश्चिम में चित्तौड़गढ़ जिला एवं बूंदी जिला, दक्षिण में झालावाड़ जिला, पूर्व में बारां जिला, उत्तर में सवाई माधोपुर जिला एवं टोंक जिला है। 
    • विध्य पहाड़ियों की मुकुंदरा श्रेणी कोटा जिले में स्थित है। 
    • कोटा जिले में बारहमासी बहने वाली चंबल नदी बहती है। 
    • कोटा जिला कोटा संभाग के अंतर्गत आता है (कोटा संभाग के अंतर्गत जिले - कोटा, बूंदी, बारां एवं झालावाड़ )
    • कोटा संभाग राजस्थान का सर्वाधिक नदियों वाला संभाग है।
    • कोटा जिले का राजस्थान के एकीकरण के दूसरे चरण में राजस्थान में विलय हुआ।  तथा इसकी राजधानी भी कोटा रखी गयी थी। 


    कोटा जिले की अक्षांशीय/देशांतरीय स्थिति


    • कोटा जिले की अक्षांशीय स्थिति : 23 डिग्री 56 मिनट उत्तरी अक्षांश से 25 डिग्री 51 मिनट उत्तरी अक्षांश तक। 
    • कोटा जिले की देशांतरीय स्थिति : 75 डिग्री 37 मिनट पूर्वी देशांतर से 76 डिग्री 38 मिनट पूर्वी देशांतर तक। 

    कोटा जिले के प्रमुख मेले और त्योहार


    • शिवरात्रि मेला - यह मेला चारचौमा (कोटा) में फाल्गुन सुदी तेरस को भरता है। 
    • दशहरा मेला - यह मेला कोटा में आश्विन शुक्ला दशमी को भरता है। 
    • तेजाजी मेला - यह मेला बूढ़ादीत (कोटा) में तेजा दशमी को लगता है।
    • महाशिवरात्रि मेला - यह मेला गेपरनाथ (कोटा) में फाल्गुन त्रयोदशी को लगता है। 
    • नरसिंह देव - मेला यह चेचट (कोटा) में वैशाख सुदी तृतीया को भरता है। 

    कोटा जिले के प्रमुख मंदिर/शीर्ष मंदिर

    • विभीषण मंदिर, कैथून (कोटा) - यह भारत का एकमात्र विभीषण मंदिर है। 
    • कंसुआ का शिव मंदिर - ऐसा माना जाता है कि कण्व ऋषि का आश्रम यही हुआ करता था। यह मंदिर आठवीं शताब्दी में निर्मित है। यहां पर सहस्त्र शिवलिंग है। यह मंदिर गुप्तोत्तरकालीन निर्मित है। 
    • गेपरनाथ शिवालय - कोटा में कोटा-रावतभाटा मार्ग पर स्थित यह मंदिर गुप्तकालीन मंदिर है। 
    • मथुराधीश मंदिर - पाटनपोल के निकट कोटा में स्थित मथुराधीश का यह मंदिर वल्लभाचार्य संप्रदाय के प्रथम महाप्रभु की पीठिका है। इस मंदिर का निर्माण राजा शिवगण ने करवाया था। 
    • मुकंदरा का शिव मंदिर - यह राजस्थान का गुप्तकालीन शिव मंदिर है।
    • भीम चौरी मंदिर - यह दर्रा मुकुंदरा के बीच स्थित गुप्तकालीन शिव मंदिर है। इस मंदिर को भीम का मंडप माना जाता है। 
    • चारचौमा का शिवालय - यह शिवालय कोटा के चारचौमा  गांव में स्थित गुप्तकालीन शिव मंदिर है। 
    • बूढ़ादीत का सूर्य मंदिर - पंचायतन शैली में निर्मित यह सूर्य मंदिर दीगोद (कोटा) में स्थित है। 
    • त्रिकाल चौबीसी मंदिर - कोटा जिले में स्थित इस मंदिर में तीन कालों के 72 तीर्थकरो की प्रतिमाएं विराजमान है। 
    • खुटुंबरा शिव मंदिर - यह एक प्राचीन शिव मंदिर है, जो उड़ीसा के मंदिरों के शिखरों से साम्य रखता है। 

    कोटा जिले के दर्शनीय स्थल/पर्यटन स्थल

    • कोटा का हवामहल - कोटा के हवामहल का निर्माण महाराव रामसिंह द्वितीय द्वारा करवाया गया। 
    • यातायात पार्क - यह राजस्थान का प्रथम यातायात पार्क है, जिसका निर्माण जुलाई, 1992 में हाडोती यातायात प्रशिक्षण पार्क के रूप में किया गया। 
    • छत्र विलास उद्यान - इस उद्यान का निर्माण महाराजा छत्रसाल ने करवाया था। 
    • जग मंदिर महल - कोटा जिले में किशोर सागर तालाब के मध्य स्थित उदयपुर के लेक पैलेस की तर्ज पर बने जग मंदिर महल का निर्माण 1739 ईस्वी में मेवाड़ के महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय की पुत्री तथा कोटा राज्य के तत्कालीन शासक महाराव दुर्जनसालसिंह हाड़ा  की रानी ब्रज कुमार ने करवाया था। 
    • चंबल उद्यान - रावतभाटा मार्ग पर चंबल नदी के किनारे 1972-1976 की अवधि में चंबल उद्यान का निर्माण करवाया गया। इस उद्यान को चट्टानी भूमि पर विकसित किया गया है। 
    • मौखरी यूप (बड़वा) - कोटा जिले में बड़वा गांव में थाम तोरण स्थान पर महासेनापति राजा बल के राजकुमारों द्वारा 238 में स्थापित चार स्तूप नौकरी मौखरी यूप कहलाते हैं। 
    • बांसथूनी का शिवालय - यह शिवालय कोटा जिले में कोटा शाहबाद सड़क मार्ग पर गोरा जी का सारण नाले पर बना हुआ है। 
    • क्षार बाग - इस स्थान पर कोटा नरेशों की कलात्मक छतरियां है। 
    • अहिंसा वाटिका - इसका निर्माण 1993 में करवाया गया था। यह वाटिका सर्वधर्म समभाव का संदेश देती है। इसमें एकता सूर्य स्तंभ स्थापित है। 
    • अभेड़ा महल - यह महल कोटा जिले में कोटा-डाबी मार्ग पर चम्बल नदी के किनारे स्थित है। यह राज्य सरकार के द्वारा पर्यटक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। 
    • समाधि उद्यान - इसका निर्माण राव किशोर सिंह प्रथम के समय करवाया गया था। कोटा में शैव महंतो द्वारा चंबल नदी के किनारे दो कलात्मक समाधिया बनाई गई, जिसे समाधि उद्यान कहा जाता है। इस परिसर में नगर निगम द्वारा आकर्षक उद्यान लगाया गया है। 
    • अकेलगढ़ - यहां पर चंबल नदी के तट पर दुर्गों के खंडहर स्थित है। 
    • दर्रा वन्यजीव अभयारण्य - यह अभ्यारण्य कोटा एवं झालावाड़ जिला में स्थित है। वर्ष 2003 में इस अभयारण्य का नाम दर्रा अभयारण्य से बदलकर राजीव गांधी नेशनल पार्क कर दिया था तथा 2006 में वसुंधरा सरकार ने इसका नाम बदलकर मुकुंदरा हिल्स पार्क रखा तथा इसे राष्ट्रीय उद्यान का स्तर प्रदान करने के लिए प्रस्ताव पारित किया था लेकिन इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी। इस अभयारण्य में राजस्थान का दूसरा ताजमहल (अबली मीणी का महल) कोटा जिले में स्थित है। इसके अलावा यहां पर गुप्तकालीन हूणों का शिव मंदिर स्थित है। इस अभयारण्य में गागरोनी/हीरामन तोते/हिंदुओं का आकाश लोशन (मनुष्य की आवाज में बोलने वाला), सारस तथा सर्वाधिक घड़ियाल पाए जाते हैं। इस अभयारण्य को राजस्थान का तीसरा राष्ट्रीय उद्यान 9 जनवरी, 2012 को घोषित किया गया तथा राजस्थान का तीसरा टाइगर प्रोजेक्ट अभयारण्य 9 अप्रैल 2013 को घोषित किया गया। इस अभयारण्य के अंतर्गत तीन अभयारण्य आते हैं - दर्रा वन्यजीव अभयारण्य, जसवंत सागर वन्यजीव अभयारण्य, चंबल वन्य जीव अभ्यारण्य। 
    • जवाहर सागर वन्यजीव अभयारण्य - यह अभ्यारण्य एक जलीय अभयारण्य है। यह अभ्यारण्य उत्तरी भारत का प्रथम सर्प उद्यान है। इस अभयारण्य में सर्वाधिक मगरमच्छ पाए जाते हैं।
    • राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्य जीव अभ्यारण्य - यह अभ्यारण्य राजस्थान के करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर तथा कोटा जिला में फैला हुआ है। इसे घड़ियालो का संसार भी कहा जाता है। यह एकमात्र जलीय अभयारण्य है, जो अन्तर्राज्य अभयारण्य (राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश में) है। इस अभयारण्य में ऊदबिलाव, शिशुमार एवं गांगेय सूप जैसे स्तनधारी जीव पाए जाते हैं। 
    • कोटा जंतुआलय - कोटा जंतुआलय की स्थापना 1954 ईस्वी में की गई थी। यह राजस्थान का सबसे नवीन जंतुआलय है। 
    • देववन - यह कोटा में स्थित राजस्थान का सर्वाधिक जैव विविधता वाला वन है। 
    • अलनीयां - यह शैल चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं। 
    • गुलाब महल - गुलाब महल का निर्माण राव जैतसिंह हाडा ने करवाया था। 
    • मुफ्ती की मजार - देश की एकमात्र मुफ्ती की मजार विज्ञान नगर (कोटा) में हैं। 
    • कोटा दुर्ग - कोटा दुर्ग की नींव जैतसिंह ने चम्बल नदी के किनारे रखी थी। कोटा दुर्ग के बारे में कर्नल जेम्स टॉड ने कहा है कि "आगरा के किले को छोड़कर किसी भी किले का परकोटा इतना बड़ा नहीं जितना कि कोटा गढ़ का है।" इस दुर्ग में स्थित झाला हवेली के बारे में खंडेलवाला ने कहा है कि 'यहां के भित्ति चित्र एशिया में अपने सानी नहीं रखते। '


    कोटा जिले (राजस्थान) में उद्योग

    • कोटा सुपर थर्मल पावर संयंत्र - इसकी स्थापना 1978 ईस्वी में कोटा जिले में की गई थी। यह राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा बिजली घर व सुपर थर्मल पावर प्लांट है। यह संयंत्र कोयले पर आधारित है। इसकी क्षमता 1240 मेगावाट है। कोटा थर्मल पावर संयंत्र का प्रारंभ 1983 ईस्वी में राजस्थान के प्रथम कोयला प्रज्वलित पावर प्लांट के रूप में की गई थी।
    • इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड - इसकी स्थापना 1964-65 में इलेक्ट्रॉनिक्स यंत्रों के निर्माण हेतु की गई थी। इसका प्रधान कार्यालय जयपुर जिले में स्थित है।
    • वैगन फैक्ट्री - इस फैक्ट्री में बड़ी लाइन के रेल के डिब्बे बनाए जाते हैं।
    • कोटा टेक्सटाइल - इसकी स्थापना 1956 में की गई थी। यह स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद में राजस्थान की प्रथम सूती वस्त्र मिल है।
    • सेमकार ग्लास इंडस्ट्रीज कोटा - यह इंडस्ट्रीज कोटा जिले में स्थित है। यहां पर सैमसंग टीवी की फिक्चर ट्यूब का निर्माण किया जाता है।
    • श्री राम केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड - कोटा के श्रीरामनगर में स्थापित यह राजस्थान का सबसे बड़ा खाद का उत्पादक कारखाना है।
    • श्रीराम सीमेंट का कारखाना - यह राजस्थान का सबसे कम उत्पादन क्षमता वाला कारखाना है। इसकी स्थापना 1985 ईस्वी में कोटा जिले के रामनगर में की गई थी।
    • चंबल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड - कोटा जिले के गढ़ेपान गांव में गैस पर आधारित यह निजी क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा खाद का कारखाना है। 
    • मंगलम सीमेंट का कारखाना - इसकी स्थापना सन 1982 ईस्वी में कोटा जिले के मोडक गांव में बिरला ग्रुप द्वारा की गई थी। 


    कोटा जिले के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न/तथ्य


    • वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय - यह राजस्थान का पहला खुला मुक्त विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना 7 नवंबर 1987 में की गई।
    • राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय - यह तकनीकी विश्वविद्यालय राजस्थान का प्रथम तकनीकी विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना अकेलगढ़ (कोटा) में 16 फरवरी, 2006 में की गई।
    • कोटा शैली - चित्रकला की कोटा शैली को शिकार शैली भी कहा जाता है क्योंकि इस शैली में युद्ध व रानियों के शिकार खेलते हुए दृश्य दर्शाए गए हैं। इस शैली का स्वर्ण काल महाराव रामसिंह के शासनकाल को माना जाता है। इस शैली पर वल्लभ संप्रदाय का प्रभाव पड़ा है। नूर मोहम्मद कोटा राज्य का प्रमुख चित्रकार था। 
    • जवाहर सागर बांध - यह एक कागदी पिकअप बांध है, जो कोटा जिले में स्थित है। यह बांध चंबल नदी पर बना हुआ है। 
    • कोटा बैराज बांध - इस बांध का सर्वाधिक केचमेंट एरिया है।
    • कोटा जिले में अन्य बांध -  सावन भादो बांध, आलनिया बांध, कोटा बैराज बांध आदि। 
    • बड़गांव की बावड़ी - इस बावड़ी का निर्माण कोटा के शासक शत्रुसाल की पटरानी जादौणा द्वारा किया गया।
    • कोटा डोरिया साड़ी/मसूरिया साड़ी - राजस्थान की कोटा डोरिया साड़ी को उसके पंख जैसे हल्के वजन के लिए जाना जाता है। 
    • भदाणा माता - यह माता हाड़ा चौहानों की कुल देवी हैं। यहां मूंठ की चपेट में आये लोगों का इलाज होता है। 
    • कोटा जिले के रियासत कालीन सिक्के - झालीमशाही सिक्के, लक्ष्मणशाही सिक्के, गुमानशाही सिक्के आदि। 
    • कोटा में 1857 का विद्रोह - कोटा जिले में यह विद्रोह 15 अक्टूबर, 1857 को जयदयाल एवं मेहराब खां के नेतृत्व में किया गया था। 
    • कोटा प्रजामण्डल - 1939 ईस्वी में अभिन्न हरि (हाड़ोती सेवा संघ का संस्थापक) व पंडित नयनूराम शर्मा (कोटा में राष्ट्रीयता के जनक) द्वारा स्थापित। 
    • राजस्थान का पहला झूलता हुआ पुल (हैंगिंग ब्रिज) कोटा में है, जो 24 दिसंबर 2009 को टूट गया था। 
    • राजस्थान का पहला यातायात प्रशिक्षण पार्क जुलाई, 1992 में कोटा जिले में स्थापित किया गया। 
    • राजस्थान में पहली बार 2007 में गणतंत्र दिवस समारोह जयपुर से बाहर कोटा जिले में आयोजित किया गया। 
    • राजस्थान का दूसरा स्पाइस पार्क कोटा जिले में स्थित है। 
    • देश व राजस्थान का पहला जैविक कृषक क्लब - खेला रसूलपुर (कोटा जिले) में है। 
    • राजस्थान का पहला एग्रो फूड पार्क - रामपुर (कोटा) में स्थित है। 
    • राजस्थान का पहला तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा जिले में स्थित है। 
    • राजस्थान का पहला खुला विश्वविद्यालय कोटा जिले में स्थित है। 
    • राजस्थान का पहला टेलीमेडिसिन वाला गांव कैथून (कोटा) है। 
    • राजस्थान की पहली निजी क्षेत्र की कृषि मंडी - कैथून (कोटा) में है। 
    • राजस्थान का सर्वाधिक साक्षरता प्रतिशत वाला जिला - कोटा जिला। 
    • राजस्थान का सर्वाधिक नदियां वाला जिला - कोटा जिला। 
    • राजस्थान का सर्वाधिक महिला साक्षरता वाला जिला - कोटा जिला। 
    • राजस्थान का सर्वाधिक शहरी जनसँख्या वाला जिला - कोटा जिला। 
    • राजस्थान का प्रथम उर्दू कॉलेज कोटा जिले में स्थापित है। 
    • किशोर सागर तालाब कोटा जिले में स्थित है। 
    • ताकली सिंचाई परियोजना कोटा जिले में स्थित है। 
    • धनिया मंडी (रामगंज मंडी में) कोटा में है।
    • कोटा स्टोन कोटा से प्राप्त होता है। 
    • नापतोल के यंत्र तथा स्ट्रॉबोर्ड का कारखाना भी कोटा जिले में स्थित है।
    • श्रीराम रेयन्स एंड टायर कॉर्ड कोटा जिले में स्थापित है। 
    • श्री गोपाल इंडस्ट्रीज मिल्स कोटा जिले में स्थित है। 
    • दशहरा महोत्सव आश्विन शुक्ल दशमी को कोटा में आयोजित होता है।
    • नेहर खां की मीनार कोटा जिले में हैं। 
    • झाला जी की हवेली एवं बड़ेदेवता की हवेली कोटा जिले में हैं। 
    • 1857 की क्रांति के समय कोटा के राजा महाराव रामसिंह द्वितीय एवं पोलिटिकल एजेंट मेजर बर्टन था। 
    आज के इस पोस्ट में हमने "राजस्थान के जिला दर्शन" की श्रृंखला में "कोटा जिला दर्शन" को पूरी तरह से कवर करने की पूरी कोशिश की हैं। इसमें कोटा का सामान्य परिचय, कोटा के उपनाम, 2011 की जनगणना के अनुसार कोटा जिले की जनसँख्या / साक्षरता / घनत्व / लिंगानुपात, कोटा का क्षेत्रफल, कोटा की मानचित्र में स्थिति, कोटा में विधानसभा क्षेत्र, कोटा के मेले, कोटा के प्रमुख मंदिर,कोटा के पर्यटन स्थल एवं इसके अलावा जितने भी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न बन सकते थे, उन सभी को शामिल कर पेश किया गया है। मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सभी पाठकों को मेरी यह पोस्ट पसंद आयी होगी। आप सभी को यह पोस्ट कैसी लगी आप मुझे कमेंट करके जरूर बताएं। 
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