यदि आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और आप पढ़ना चाहते हैं - 'Rajasthan GK/Rajasthan GK in Hindi/Tonk District GK in Hindi/Tonk jila gk in hindi/tonk jila darshan' आदि तो। आप 'राजस्थान सामान्य ज्ञान' के 'टोंक जिला दर्शन' की इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें। इसमें आपको 'राजस्थान जिला दर्शन' की श्रृंखला में राजस्थान का 'टोंक जिला दर्शन' को विस्तृत तरीके से बताएंगे। इसमें टोंक का सामान्य परिचय, टोंक के उपनाम, टोंक का अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार, टोंक का क्षेत्रफल, टोंक के प्रमुख मेले और त्यौहार, टोंक के प्रमुख मंदिर, टोंक के पर्यटन स्थल एवं इसके अलावा जितने भी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न टोंक जिले से सम्बंधित बन सकते थे, उन सभी को शामिल कर पेश किया गया है। 

राजस्थान जिला दर्शन : 'टोंक जिला दर्शन'


टोंक को भोला ब्राह्मण ने भूमगढ़ नाम से बसाया था। 1817 ईस्वी में आमिर खान पिंडारी ने इसे अपनी रियासत का केंद्र बनाया। आमिर खान पिंडारी को राजस्थान के कोटा के जालिम सिंह ने सरंक्षण दिया। एकमात्र रियासत जहां मुस्लिम नवाबों ने शासन किया था। 
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    टोंक जिले का सामान्य परिचय


    • टोंक जिले का क्षेत्रफल : 7194 वर्ग किलोमीटर। 
    • टोंक जिले की अक्षांश स्थिति : 25 डिग्री 41 मिनट उत्तरी अक्षांश से 26 डिग्री 34 मिनट उत्तरी अक्षांश तक। 
    • टोंक जिले की देशांतरीय स्थिति : 75 डिग्री 7 मिनट पूर्वी देशांतर से 76 डिग्री 19 मिनट पूर्वी देशांतर तक। 
    • टोंक जिले के उपनाम : टाटानगर, नवाबों की नगरी। 
    • टोंक जिले का संभागीय मुखलाय - अजमेर है। 



    टोंक जिले के प्रमुख मेले एवं त्यौहार

    • डिग्गी कल्याण जी का मेला - यह मेला टोंक जिले के डिग्गी मालपुरा में अक्टूबर माह (श्रावण शुक्ल एकादशी) में भरता है।  
    • पुलानी एकादशी का मेला - यह मेला टोंक जिले के डिग्गी में भादवा ग्यारस को भरता है। 
    • चांदसेन पशु मेला - यह मेला टोंक जिले के मालपुरा कस्बे के पास चांदसेन  नामक  बांध पर भरता है। यह मार्च-अप्रैल माह में भरता है। 



    टोंक जिले के प्रमुख मंदिर/शीर्ष मंदिर

    • कल्याण जी का मंदिर, डिग्गी मालपुरा : इस मंदिर का निर्माण मेवाड़ के महाराणा संग्राम सिंह के राज्य काल में हुआ था। यहां श्रद्धालु तारकेश्वर मंदिर (जयपुर) से दंडवत लगाते हुए आते हैं। मुस्लिम इसे कलंह पीर के नाम से पुकारते हैं। डिग्गी के कल्याणजी  को याद करते हुए श्रद्धालु लोकगीत गाते हैं - 'म्हारा डिग्गीपुरी का राजा थारे बाजे छे नोपत बाजा' |  यहां पर भाद्रपद एकादशी एवं वैशाख माह की पूर्णिमा को विशाल मेले लगते हैं। 
    • जलदेवी का मंदिर - जल देवी का मंदिर टोंक जिले की टोडारायसिंह तहसील के बावड़ी गांव में स्थित है। 
    • देवनारायण जी का मंदिर - यह मंदिर मासी, बांडी व खारी नदी के संगम पर जोधपुरिया गांव में है। 
    • गोकर्णेश्वर महादेव का मंदिर - यह बीसलपुर (टोंक) में स्थित है। 



    टोंक जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल/पर्यटन स्थल

    • लाला पठान दुर्ग - यह दुर्गा टोंक जिले के टोडारायसिंह में स्थित है। 
    • ककोड़ का किला - यह किला टोंक जिले में टोंक-सवाई माधोपुर मार्ग पर स्थित है। 
    • सुनहरी कोठी - टोंक जिले की सुनहरी कोठी का निर्माण टोंक के नवाब वजीउद्दौला खां ने 1824 ईसवी में शीशमहल के नाम से करवाया था। इसका प्राचीन नाम जरगिनार था। 
    • मांडकला -टोंक जिले के देवली तहसील में स्थित  मांडकला में एक पवित्र जलाशय है। मांडकला मांडव ऋषि की तपोस्थली थी। 
    • राजमहल - टोंक जिले का राजमहल बनास, खारी एवं डाई नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित है। 
    • हाड़ीरानी का कुंड - यह भव्य महल टोंक जिले के टोडारायसिंह में स्थित है। 
    • संत पीपा की गुफा - यह गुफा टोंक जिले के टोडारायसिंह के निकट टोडा गांव में स्थित है। इस गुफा में गागरोन के संत पीपा जी ने तपस्या की थी। 
    • जालंधरनाथ - यहां पर जालंधर नाथ की गुफा भी स्थित है। यह स्थल नाथ संप्रदाय का प्राचीन स्थल है। 
    • हाथी भाटा - टोंक जिले के गुमानपुरा गांव में स्थित एक चट्टान पर विशाल पत्थर को उत्कीर्ण कर हाथी बनाया गया है, जो जीवित हाथी की तरह दौड़ता हुआ प्रतीत होता है। पर्यटन की दृष्टि से यह एक आकर्षण का केंद्र है। 
    • बीसलपुर वन्यजीव अभयारण्य - यह अभ्यारण्य टोंक जिले की टोडारायसिंह तहसील के राजमहल गांव में स्थित है। यह राजस्थान का नवीनतम अभयारण्य है, इसे वसुंधरा सरकार ने 2006 में अभयारण्य घोषित किया था। 
    • पचेवर का किला - इस किले को चौबुर्जा का किला भी कहा जाता है। यह टोंक जिले के मालपुरा तहसील में स्थित है। यहां पाड़ा चक्की बनी हुई है। 
    • अंसीरगढ़ - इसे दक्खिन की चाबी/भूमगढ़ आदि नामों से जाना जाता है। इसका निर्माण भोला ब्राह्मण ने शुरू किया था, जबकि आमिर खां से पूरा करवाया था। 
    • रजिया सुल्तान का मकबरा - एक मत के अनुसार टोंक  के बड़े कुएं के पास रजिया सुल्तान को दफनाया गया था। 



    टोंक जिले के प्रमुख बांध एवं बावड़ियां

    • बीसलपुर बांध परियोजना - यह परियोजना राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है। जो राजस्थान के टोंक, अजमेर एवं जयपुर जिलों को जलापूर्ति करती है, टोंक जिले के राजमहल (टोडारायसिंह) में बनास, खारी एवं डाई नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित है। यह राजस्थान का एकमात्र कंक्रीट से बना बांध है। 
    • हाड़ी रानी की बावड़ी/कुंड - यह बावड़ी टोंक जिले के टोडारायसिंह कस्बे के मध्य स्थित है। इस बावड़ी पर पहेली फिल्म फिल्माई गई थी। 
    • टोरड़ी सागर बांध - यह बांध भी टोंक जिले में बना हुआ है। इसकी सभी मोरिया (गेट) खोलने पर बांध में एक बूंद भी जल शेष नहीं बचता है। 
    • बुद्ध/शुद्ध सागर - यह टोंक जिले के टोडारायसिंह कस्बे में स्थित है। इस सागर के निकट पहाड़ी के ऊपर संत पीपा की गुफा स्थित है। 



    टोंक जिले के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न/तथ्य

    • राजस्थान के टोंक जिले की आकृति पतंगाकार है। 
    • भारत में एकमात्र जगह जहां बकरा ईद पर ऊंट की कुर्बानी दी जाती थी, मुबारक महल (नहरी कोठी, टोंक) है। 
    • राज्य की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना एवं प्रथम कंक्रीट से निर्मित बांध - बीसलपुर बांध (टोंक जिले में) है। 
    • संपूर्ण परिवार का फोटो वाला बीपीएल कार्ड जारी करने वाला प्रथम जिला - टोंक जिला। 
    • राजस्थान का सर्वाधिक लिंगानुपात वाला नगर - टोंक है। 
    • केंद्रीय भेड़ प्रजनन एवं ऊन अनुसंधान संस्थान - अविकानगर (मालपुरा, टोंक) में स्थित है। 
    • मौलाना अब्दुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान टोंक जिले में स्थित है ( कसरे इल्म नाम से 4 दिसंबर 1978 में स्थापित वर्तमान नाम 1987 में पड़ा था) 
    • मिर्च मंडी टोंक जिले में है। 
    • टोंक जिले के बरला, मानखंड एवं धौली से अभ्रक का उत्पादन होता है तथा राजमहल (टोंक) से तामड़ा का उत्पादन होता है। 
    • मयूर बीड़ी का कारखाना टोंक जिले में स्थित है। 
    • पेन एशिया एग्रो ऑइल्स मालपुरा (टोंक जिले) में है। 
    • चारबैत -  यह पठानी मूल का लोकनाट्य है। राजस्थान में सर्वप्रथम टोंक के नवाब फैजुल्ला खां के समय अब्दुल करीम खान एवं खलीफा करीम खान, निहंग खान द्वारा शुरू किया गया था। 
    • जामा मस्जिद मालपुरा टोंक में स्थित है। 
    • रैढ़/रहड़ सभ्यता - यह टोंक जिले की निवाई तहसील में स्थित है। यहां से गजमुखी यक्ष की मूर्ति एवं एशिया का सबसे बड़ा सिक्कों का भंडार मिला है। 
    • नगर सभ्यता - यह भी टोंक जिले में है। 

    आज की इस पोस्ट में 'राजस्थान जिला दर्शन' की श्रृंखला में 'टोंक जिला दर्शन' को पूरी तरह से कवर करने की कोशिश की है। इसमें आप सभी पाठकों के लिए टोंक का सामान्य परिचय, टोंक के उपनाम, टोंक का अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार, टोंक का क्षेत्रफल, टोंक के प्रमुख मेले और त्यौहार, टोंक के प्रमुख मंदिर, टोंक के पर्यटन स्थल, टोंक जिले के बांध एवं बावड़ियां एवं इसके अलावा जितने भी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न टोंक जिले से सम्बंधित बन सकते थे, उन सभी को शामिल कर पेश किया गया है। मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सभी पाठकों को मेरी यह पोस्ट पसंद आयी होगी। आप सभी को मेरी यह पोस्ट कैसी लगी। आप मुझे कमेंट करके जरूर बताये। 


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