राजस्थान की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं - इस पोस्ट में राजस्थान के इतिहास की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं को उनके घटित होने के वर्ष सहित एक लिस्ट में दिया गया है। इससे सम्बंधित अक्सर प्रश्न परीक्षाओं में पूछ ही लिया जाता है। इसलिए यह टॉपिक आप सभी अभ्यर्थियों के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होगा। आप सभी इसको पूरा जरूर पढ़ें:- 
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राजस्थान की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं

राजस्थान की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं

78 ई. शक संवत का प्रारंभ।
150 ई. प्रथम रुद्रदामन ने पश्चिम राजस्थान को जीता।
566 ई. मेवाड़ में गुहिल द्वारा राज्य स्थापित किया गया।
622 ई. हिजरी सन् का प्रारंभ।
647 ई. हर्षवर्धन की मृत्यु।
728 ई. बप्पा रावल ने मौर्य राजा से चित्तौड़ का राज्य छीना।
731 ई. अरबों का राजस्थान से सीधा संघर्ष प्रारंभ।
736 ई. गुर्जर राज्य की समाप्ति पर चौहान राजस्थान के शासक बने।
738 ई. प्रतिहारों ने अपनी राजधानी भीनमाल के स्थान पर जालौर बनाई
755 ई. बप्पा रावल ने कुकुटेश्वर से चित्तौड़ को जीता।
836 ई. मिहिरभोज का राज्यारोहण ।
944 ई. सपादलक्ष के चौहानों ने रणथम्भौर दुर्ग का निर्माण करवाया।
947 ई. रामसिंह ने टोंकरा (वर्तमान टोंक) बसाया।
956 ई. सिंहराज प्रथम ने शेखावाटी में हर्षनाथ पहाड़ सीकर पर शिव मंदिर बनाया।
972 ई. मालवा के परमार भुंज (वाक्पति) ने चित्तौड़ पर कब्जा किया।

991 ई. जयपाल ने मुसलमानों के आक्रमण के विरुद्ध सांभर कालिंजर और कन्नौज के राजाओं का संघ बनाया।
1008 ई. आनन्दपाल ने महमूद के खिलाफ उज्जैन, ग्वालियर कालिंजर और कन्नौज दिल्ली तथा सांभर के राजाओं का संघ बनाया।
1013 ई. लोकदेवता तेजाजी जाट की मृत्यु ।
1024 ई. महमूद गजनवी ने अजमेर पर आक्रमण किया और गढ़ बीठढी पर घेरा डाला लेकिन घायल हो जाने पर वह घेरा उठाकर अन्हीलवाड़ा चला गया।
1026 ई. महमूद गजनवी ने वाराह (जैसलमेर) पर हमला किया।
1031 ई. विमल शाह ने आबू पहाड़ पर आदिनाथ जैन मंदिर की स्थापना करवाई।
1040 ई. यादव विजयपाल ने मथुरा से अपनी राजधानी हटा कर विजय मंदिर गढ़ में स्थापित की। जिसे अब बयाना गढ़ के नाम से जाना जाता है।
1042 ई. बसन्तगढ़ (सिरोही) को परमार नरेश पूर्णपाल ने अपनी राजधानी बनाया।
1113 ई. चौहान अजयराज ने अजमेर नगर बसाया।
1119 ई. मुहम्मद बाहलीम ने नागौर का किला बनवाया।
1135 ई. अर्णोराज ने मुसलमान आक्रमणकारियों को हराकर युद्ध स्थल पर आनासागर झील (अजमेर) का निर्माण करवाया।
1137 ई. दुल्हेराय ने बड़गुर्जरों को हराकर दौसा पर कब्जा किया और ढुंढाड़ राज्य की स्थापना की।
1151 ई. अजमेर के विग्रहराज-IV ने चित्तौड़ पर कब्जा कर मेवाड़ा
का कुछ हिस्सा अपने राज्य में मिलाया।
1152 ई. बीसलदेव (IV-विग्रहराज) ने अपने पितृहन्ता भाई जगदेव को पराजित कर अजमेर की गद्दी प्राप्त की।
1153 ई. बीसलदेव बिस्सी की जीतकर भारत का प्रथम चौहान सम्राट बना।
1155 ई. राव जैसल द्वारा जैसलमेर दुर्ग की स्थापना।
1158 ई. यादव तवनपाल ने बयाना से 15 मील दूर तवनगढ़ बसाया।
1175 ई. गुहिलवंशीय सामन्त सिंह ने बागड़ पर अधिकार किया।
1178 ई. आबू के परमार नरेश धारावर्ष ने मुहम्मद गौरी को हराया। मोहम्मद गौरी ने नाडोल तथा किराडू को लुटा।

1187 ई. पृथ्वीराज तृतीय ने गुजरात पर आक्रमण किया एवं आबू के परमार शासक धारावर्ष को हराया।
1190 ई. जयानक ने अजमेर में पृथ्वीराज विजय नामक प्रसिद्ध महाकाव्य की रचना की।
1191 ई. पृथ्वीराज-III ने थानेश्वर के निकट तरावडी मैदान मोहम्मद गौरी को प्रथम बार हराया। (तराईन का प्रथम युद्ध)
1192 ई. तरावडी का दूसरा युद्ध (तराईन-II युद्ध) जिसमें पृथ्वीराज मोहम्मद गौरी से हारा, मारा गया।
1192 ई. कुतुबुद्दीन ऐबक ने अजमेर तथा मेरठ के विद्रोह को दबाया। बीसलदेव के सरस्वती मंदिर को तोड़ा।
1193 ई. हरिराज ने दिल्ली पर आक्रमण किया।
1194 ई. कन्नोज का जयचंद मोहम्मद गौरी से इटावा के पास चंदावर में मारा गया। कुतुबुद्दीन ऐबक ने अजमेर पर पन: कब्जा कर उस स्वतंत्र राज्य को समाप्त किया, वहाँ मुस्लिम शासक नियुक्त किया।
1195 ई. ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेर आया। मोहम्मद गौरी ने बयाना के जाटों भट्टी राजपूतों को हराया।
1197 ई. मोहम्मद गौरी द्वारा तवनगढ़ व बयाना पर कब्जा।
1206-1210 ई. अढ़ाई दिन के झोपड़े का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा करवाया गया।
1210 ई. लाहौर में चौगान (पोलो) खेलते समय कुतुबुद्दीन की मृत्यु। अजमेर का सरस्वती मंदिर, मस्जिद में परिवर्तित किया गया, जो अढाई दिन का झोपड़ा कहलाया।
1226 ई. दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने रणथम्भौर पर कब्जा किया इसके पश्चात् उसने बयाना, अजमेर, नागौर, जालौर पर भी कब्जा किया।
1230 ई. तेजपाल ने नेमीनाथ (लुणवसाही) मंदिर का निर्माण आबू पर्वत पर करवाया।
1234 ई. मेवाड़ के राणा जैत्रसिंह ने शमशुद्दीन इल्तुतमिश को हराया।
1236 ई. ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की मृत्यु।
1237 ई. मेवाड़ राणा समर सिंह ने तुर्कों को हराया।
1243 ई. राव सीहा पाली आया।
1246 ई. बारडदेव परमार ने बारड़मेर (वर्तमान बाड़मेर) बसाया।
1248 ई. बलबन (उलुग खाँ) ने रणथम्भौर, बूंदी, चित्तौड़ पर हमला किया, तथा यहां से काफी धन माल ले गया।
1252 ई. नसीरुद्दीन महमूद ने बयाना विजय की।
1258 ई. उलुग खाँ (बलबन) ने रणथम्भौर व मेवात पर आक्रमण किया।
11 जुलाई 1301 रणथम्भौर पर अलाउद्दीन खिलजी का अधिकार। यहां साका हुआ था।
25 अगस्त, 1303 अलाउद्दीन खिलजी द्वारा चित्तौड़ विजय अपने पुत्र खिज्र खाँ को चित्तौड़ का हाकिम नियुक्त किया। यहां साका हुआ था।
9 नवंबर, 1308 सिवाणा का सातलदेव मारा गया, सिवाणा पर अलाउद्दीन का कब्जा।  यहां साका हुआ था।
1316 ई. जैसलमेर पर अलाउद्दीन की विजय, साका
1326 ई. हम्मीर सिसोदिया ने चित्तौड़ पर अधिकार किया।
1330ई. राव घड़सी ने घडसिया तालाब (जैसलमेर) बनवाया।
1341 ई. बम्बावदा के राव देवा ने जैता मीणा से बूंदी जीता।
21 मार्च, 1352 रामदेव का जन्म।
1354 ई. राव नरसिंह ने तारागढ़ (बूंदी) का दुर्ग बनवाया।
1358 ई. डूंगरसिंह ने डुंगरपुर बसाया।
1362 ई. रावल मल्लीनाथ का जन्म।
1364 ई. क्षेत्रसिंह मेवाड़ की राजगद्दी पर बैठा।
1382 ई. मेवाड़ के राणा लाखा का राज्याभिषेक।
1383 ई. राजपूतों व चारणों की देवी करणी का जन्म।
1385 ई. रामदेव ने समाधि ली।
1394 ई. वीरम के पुत्र चूंडा की सहायता से ईन्द्रा प्रतिहार ने मण्डोर पर कब्जा किया तथा उसे चूंडा राठौड़ को दे दिया। राव चूंडा ने चामुण्डा माता का मंदिर बनवाया।
1398 ई. मेवाड के चूडा ने राजगद्दी से अपना अधिकार छोड़ा। तैमूर का भारत पर हमला।
1399 ई. चूंडा राठौड़ ने अजमेर पर कब्जा किया। मालानी के रावल मल्लीनाथ का स्वर्गवास।
1405 ई. शिवभाण देवडा ने शिवपुरी (पुराना सिरोही) शहर बसाया।
1438 ई. मण्डौर का रणमल राठौड़, मेवाड़ में मारा गया।
1440 ई. रणकपुर में त्रिलोक्य दीपक मंदिर की प्रतिष्ठा हुई।
1443 ई. अप्रैल, 26, महाराणा कुम्भा तथा मालवा के सुल्तान महमूदशाह खिलजी के बीच कुम्भलगढ़ के निकट युद्ध। महमूद विफल होकर लौट गया।
1444 ई. मालवा के महमूद ने गागरोन पर कब्जा किया।
1451 ई. बिश्नोई मत के प्रवर्तक जांभाजी का पीपासर में जन्म।
1453 ई. महाराणा कुंभा ने अचलगढ़ दुर्ग की प्रतिष्ठा कराई।
1455 ई. मालवा के सुल्तान महमूद ने अजमेर पर कब्जा किया।
1458 ई. कुम्भलगढ़ की प्रतिष्ठा।
1458 ई. राव जोधा का राज्याभिषेक।
1459 ई. राव जोधा द्वारा जोधपुर नगर बसाया गया।
1460 ई. मंडोर की चामुण्डा की मूर्ति जोधपुर के किले में स्थापित की गई।
1472 ई. राव बीका ने कोडमदेसर में राजधानी स्थापित की व अपने आपको राजा घोषित किया।
1478 ई. वल्लभ सम्प्रदाय के संस्थापक श्री वल्लभाचार्य तैलंग का जन्म। राव बीका का भाटियों से युद्ध।
12 अप्रैल, 1482 महाराणा संग्राम सिंह का जन्म।
1483 ई. राजस्थान में घोर अकाल।
13 अप्रैल,1488 राव बीकाने बीकानेर नगर बसाया।
1508 महाराणा संग्राम सिंह मेवाड़ की राजगद्दी पर बैठा।
1516 ई. महाराणा सांगा के ज्येष्ठ कुंवर भोजराज का मीरा बाई से विवाह हुआ।
1517 ई. दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी व मेवाड़ के महाराणा सांगा के बीच बूंदी के निकट खातौली का युदध हुआ। जिसमें महाराणा सांगा की विजय हुई।
1518 ई. खातौली (बूंदी राज्य) के युद्ध में महाराणा सांगा ने इब्राहीम लोदी को हराकर बूंदी राज्य जीता।
1527 ई. बिश्नोई धर्म के प्रवर्तक जांभा की तालवा गाँव (बीकानेर) में मृत्यु।
16 मार्च, 1527 महाराणा सांगा व बाबर के बीच खानवा के मैदान में युद्ध हुआ जिसमें महाराणा सांगा की हार हुई।
1532 ई. मालदेव मारवाड़ की राजगद्दी पर बैठा। उसका राज्याभिषेक सोजत दुर्ग में हुआ।
1535 ई. मेवाड़ की राजमाता कर्मावती ने बहादुरशाह के 8 मार्च आक्रमण पर 13000 स्त्रियों के साथ जौहर किया।
25 अप्रैल, 1535 चित्तौड़ पर वापस सिसोदियाओं का कब्जा।
1536 ई. मालदेव ने नागौर के खानजादे पर चढ़ाई कर नागौर पर कब्जा किया। मालदेव का विवाह जैसलमेर के रावल की पुत्री उमादे (रूठी रानी) से हुआ।
9 मई, 1540 महाराणा प्रताप का जन्म।
30 जुलाई, 1541 राव चंद्रसेन राठौड़ का जन्म।
5 जनवरी, 1544 रावल मालदेव और शेरशाह की सेनाओं के बीच गिरीसुमेल का युद्ध हुआ।
जून, 1545 मालदेव ने पुन: जोधपुर पर अधिकार किया।
1549 ई. राजस्थान के प्रसिद्ध कवि पृथ्वीराज का जन्म।
1556 ई. जोधपुर नरेश मालदेव की सेना अजमेर के सूबेदार हाजी खाँ की सेना से हारी। इस युद्ध में मेवाड़ के राणा उदयसिंह व बीकानेर नरेश कल्याण मल ने हाजी खाँ की सहायता की।
24 जनवरी, 1557 हरमाड़ा के युद्ध में मालदेव और हाजी खाँ की सम्मिलित सेना ने राणा उदय सिंह व उसके सहायक मेड़ता के जयमल को पराजित किया।
1559 ई.महाराणा उदयिंसह ने उदयसागर तालाब बसाया। महाराणा उदयसिंह ने उदयपुर बसाया।
1560 ई. विक्रम सिंह ने देवलिया (प्रतापगढ़) को राजधानी बनाया। वल्लभ सम्प्रदाय के वल्लभाचार्य की मृत्यु।
1562 ई. जनवरी 20, भारमल ने अकबर की अधीनता उसके सांगानेर के पड़ाव पर स्वीकार की।
6 फरवरी 1562  आमेर की भारमल की पुत्री हरखा बाई (मरियम उज्जमानी) का विवाह अकबर से हुआ। जिसके गर्भ ने बादशाह जहाँगीर का जन्म हुआ।
10 फरवरी 1562  आमेर के भगवंत दास व मानसिंह की मुगल दरबार में नियुक्ति ।
10 नवम्बर 1562 मारवाड़ के मालदेव की मृत्यु।
1565  जोधपुर पर मुगलों का अधिकार हो जाने से, वहाँ मुगल बादशाह के सिक्कों का प्रचलन हुआ।
25 फरवरी 1568  चित्तौड़ का तीसरा साका।
2 मार्च, 1568 मीरा बाई की मृत्यु।
5 नवम्बर, 1570 अकबर का नागौर दरबार आयोजित ।
28 फरवरी 1572 महाराणा प्रताप की गोगुन्दा में राजगद्दी।
18 जून 1576 महाराणा प्रताप तथा कछवाह राजा मानसिंह (मुगल सेनापति) के बीच हल्दीघाटी का युद्ध हुआ।
3 अप्रेल 1578 शाहबाज खाँ ने कुंभलगढ़ पर कब्जा किया।
4 अप्रैल, 1578 शाहबाज खाँ ने उदयपुर पर कब्जा किया।
1580ई. बादशाह अकबर द्वारा जोधपुर पर पूर्ण कब्जा।
1581ई. राव चन्द्रसेन की मृत्यु।
1582 ई. महाराजा रायसिंह ने बीजा देवड़ा से सिरोही छीनकर आधा भाग राव सुरतान को दे दिया।
1583 ई. बादशाह अकबर ने जोधपुर के राव मालदेव की पौत्री तथा आमेर के भगवंत दास के चचेरे भाई जयमल कच्छवाहा की पत्नी को सती होने से रोका।
1583 ई. सिरोही के देवड़ा सुरतान ने सिसोदिया जगमाल पर दत्ताणी गांव में आक्रमण किया, जिसमें सुरतान की विजय हुई, जगमाल मारा गया राठौड व सिसोदिया हारे।
1585 ई. महाराणा प्रताप ने चावण्ड को अपनी राजधानी बनाया।
1585 ई. आमेर के भगवान दास की पुत्री मानबाई का शहजादा सलीम के साथ लाहौर में विवाह हुआ।
1586 ई. महाराणा प्रताप ने चित्तौड़गढ़ तथा माण्डलगढ़ को छोड़कर सारे मेवाड़ पर पुन: कब्जा कर लिया।
1586 ई. जोधपुर के राजा उदयसिंह की पुत्री भानमती (जगत गुसाई) का शहजादा सलीम से विवाह हुआ। यह बेगम बाद में जोधा बाई कहलाई।
1589 ई. बीकानेर के राय सिंह ने बीकानेर के किले का शिलान्यास किया।
1593 ई. तिलराज में पशुमेला भरना आरंभ हुआ।
19 जनवरी 1597 महाराणा प्रताप की मृत्यु।
1600 ई. महाराज रायसिंह को नागौर जागीर में दिया।
1603 ई. नरायणा (जयपुर) में संत दादू की मृत्यु ।
1606 ई. जोधपुर नगर के बाहर महाराज सूर सिंह ने सूर सागर तालाब बनवाया।
1612 कृष्ण सिंह राठौड़ ने किशनगढ़ नगर बसाया।
1614 ई. आमेर के मिर्जा राजा मानसिंह का देहांत ।
5 फरवरी 1615 महाराणा अमर सिंह शहजादा खुर्रम से गोगुन्दा में मिला।
16 फरवरी 1615 उदयपुर का कुँवर कर्ण सिंह बादशाह जहाँगीर के दरबार में उपस्थित हुआ।
1616 ई. सर जेम्स का राजदूत टामस रो अजमेर में जहाँगीर के दरबार में संधि हेतु पहुँचा।
1621 ई. बादशाह जहाँगीर ने गजसिंह को दलथम्भन की पदवी तथा जालौर का परगना मनसब की जागीर में दिया।
1625 ई. बूंदी के राव रतन को बादशाह ने 5 हजारी जात व 5 हजार सवार का मनसब तथा राव राय की पदवी दी।
1627 ई. बादशाह ने माधोसिंह को कोटा का स्वतंत्र शासक नियुक्त किया।
1630 ई. जोधपुर नरेश गजसिंह को बादशाह जहाँगीर ने महाराज की पदवी दी।
1637 ई. शाहजहाँ ने अजमेर की आना सागर झील पर बारहदरिया बनवाई।
1638 ई. राठौड दुर्गादास का जन्म।
1639 ई. आमेर नरेश जयसिंह को बादशाह ने मिर्जा राजा की पदवी दी।
1644 ई. बीकानेर व नागौर के शासकों की सेना के बीच मतीरे के राड की लडाई हुई।
1649 ई. मिर्जा राजा जयसिंह की मनसब में पाँच हजार जात व पाँच हजार सवार किये गये। जिसमें तीन हजार सवार दो अस्पा सेइ अस्पा थे।
1652 ई. उदयपुर में जयसिंह प्रथम ने जगदीश मंदिर का निर्माण पूर्ण करवाया।
1654 ई. जोधपुर नरेश जसवंत सिंह को मनसब में 6000 जात व 6000 सवार जिसमें 5000 दो अस्पा सेह अस्पा के दी जाकर महाराज की पदवी दी गई।
1657 ई. जोधपुर नरेश जसवंत सिंह का मनसब 7000 जात व 7000 सवार किया गया। मालवे की सूबेदारी देकर औरंगजेब के विरुद्ध भेजा गया।
16 अप्रैल 1658 धरमत के युद्ध में दारा की सेना हारी। शाहपुरा नरेश सुजान सिंह और कोटा नरेश मुकुन्द सिंह
धरमत के युद्ध में मारे गये। मारवाड़ नरेश जसवंत सिंह शाहजहाँ की ओर से धरमत के युद्ध में औरंगजेब से हारा।
1660 ई. महाराणा राजसिंह का किशनगढ़ की राजकुमारी से विवाह ।
1662 ई. राजसमुद्र (राजसमंद झील) निर्माण प्रारंभ।
1664 ई. औरंगजेब ने मिर्जा राजा जयसिंह को शिवाजी को दबाने के लिए नियुक्त किया।
12 जून 1665 शिवाजी ने मिर्जा राजा जयसिंह से पुरन्दर की संधि की।
1667 ई. आमेर के मिर्जा राजा जयसिंह की बुरहानपुर में मृत्यु।
1669 ई. मथुराधीश की प्रतिमा बूंदी लाई गई जो 1744 में कोटा ले जाई गई।
1670 ई.  राजसमन्द झील का निर्माण कार्य पूर्ण ।
1671ई. कल्याणसिंह नरुका को माचेड़ी (अलवर) की जागीर आमेर नरेश रामसिंह ने दी।
1672 ई. नाथद्वारा में गोवर्धन नाथ की मूर्ति स्थापित।
1676 ई. राजसमुंद्र का नामकरण।
1678 ई. बांसवाड़ा का फरमान महारावल कुशल सिंह के नाम पर।
1680 ई. मुगल सेना ने देबारी (मेवाड़) पर अधिकार किया। औरंगजेब ने आमेर के मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया
22 अक्टूबर 1680 महाराज राजसिंह का देहांत ।
1681 ई. मुहम्मद अकबर ने देसूरी में औरंगजेब के विरुद्ध विद्रोह कर अपने आपको बादशाह घोषित कर दिया।
1688 ई. सवाई जयसिंह का जन्म।
1707  ई. मेहराब खां जोधपुर का फौजदार नियुक्त। महाराज अजीत सिंह ने जोधपुर दुर्ग में प्रवेश किया।
1708 ई. बादशाह आमेर पहुँचा तथा आमेर का नाम मोमीनाबाद (बहादुर शाह) रखा तथा उसे खालसा घोषित किया।
1710 ई. बादशाह ने जोधपुर नरेश अजीत सिंह को 4000 जगत व 4000 सवार का मनसब दिया।
1712 ई. जोधपुर नरेश अजीत सिंह ने अजमेर पर अधिकार कर लिया। बादशाह जहाँदार शाह ने जजिया कर बंद करने की घोषणा की।
1713 ई.  जहाँदार शाह और फर्रुखसियर के बीच सामूगढ़ युद्ध के अंत में चूड़ामन जाट ने दोनों पक्षों को लूटा।
1714 ई. जोधपुर नरेश अजीत सिंह को गुजरात का सूबेदार नियुक्त करने का फरमान भेजा।
1718 ई. चूड़ामन अपने भतीजे के साथ दिल्ली बादशाह से समझौता करने गया। दुर्गादास राठौड़ की मृत्यु।
1719 ई. जजिया कर बंद कर दिया गया तथा हिन्दुओं पर धार्मिक स्थानों की यात्रा करने पर प्रतिबंध हटाए गये।
1727 ई. जयपुर नगर की नींव सवाई जयसिंह ने रखी।
1730  ई. जोधपुर के पास खेजड़ली गाँव में हरे वृक्षों को बचाने के लिए 363 स्त्री-पुरुषों ने बलिदान दिया।
1735  ई. मराठों ने सांभर को लूटा।
1736  ई. पेशवा चौथ वसूलने के उद्देश्य से उदयपुर पहुँचा।
1743  ई. जयपुर नरेश सवाई जयसिंह की मृत्यु।
1744  ई. कोटा का बूंदी पर कब्जा।
1745  ई. बूंदी नरेश उम्मेदसिंह ने जयपुर की सेना को बिथौड़ (बूंदी) के युद्ध में हराया।
1750  ई. बख्त सिंह व रामसिंह की सेना के बीच पीपाड़ के निकट युद्ध। जयपुर नरेश ईश्वरी सिंह ने आत्महत्या की। सूरजमल को राजा का खिताब बादशाह से मिला।
1751  ई. जयपुर ने मराठों के विरुद्ध दंगे। बख्तसिंह ने जोधपुर पर अधिकार किया।
1755  ई. विजय सिंह ने मराठों से संधि की।
1759  ई. रणथम्भौर के किले पर कब्जा करने के लिए कांकोड के मैदान में जयपुर व होल्कर की सेना के बीच युद्ध ।
1763 ई. भरतपुर महाराज सुरजमल का मुगल सेनापति नजीबुद्दौला से दिल्ली के निकट युद्ध।
1765 ई. माहदजी सिंधिया ने कोटा नरेश से 16 लाख रुपये की खण्डनी तप कर 6 लाख वसूले।
1774 ई. मिर्जा नजफ ने भरतपुर नरेश से आगरा खाली करवाया।
1779 ई. बादशाह ने जयपुर नरेश प्रताप सिंह का टीका किया तथा 18 दोनों के बीच समझौता।
1781 ई. जोधपुर टकसाल में शुद्ध सोने की मोहरे बनने लगी।
1786 ई. महादजी सिंधिया तथा बादशाह ने कर प्राप्ति के लिए जयपुर में प्रवेश किया।
1787 ई. तुंगा का युद्ध, जिसमें जयपुर तथा जोधपुर की सम्मिलित सेना ने मराठों को हराया।
1789 ई.जयपुर नरेश प्रताप सिंह तथा मराठों के बीच पाटन का युद्ध जिसमें मराठों की विजय।
1791 ई. अजमेर दुर्ग सिंधिया के सुपुर्द ।
1796 ई. झाला जालिम सिंह द्वारा झालरापाटन कस्बे की नींव रखी गई।
1799 ई. जयपुर में हवामहल का निर्माण।
1800 ई. जॉर्ज टोमस (थॉमस) ने अपने इतिहास ग्रंथ में सबसे पहले राजपूताना शब्द का प्रयोग किया।
25 सितंबर 1803 भरतपुर नरेश रणजीत सिंह ने अंग्रेजों से स्थायी मित्रता की संधि की जिसके अनुसार कृष्णगढ़ कठुम्बर, रेवाड़ी, गोकुल और सेहड़ के पाँच परगने भरतपुर राज्य में माने गये।
12 दिसंबर 1803 जयपुर महाराजा की मित्रता पारस्परिक सहायता के लिए अंग्रेजों से संधि की।
1804 ई. भरतपुर नरेश ने होल्कर को अंग्रेजों के विरुद्ध सहायता दी।
17 अप्रैल 1805  भरतपुर नरेश ने अंग्रेजों से दुबारा मित्रता व आपसी सहायता की संधि की। इस संधि से 1803 में अंग्रेजों द्वारा दिये गये 5 परगने भरतपुर से ले लिये गये तथा भरतपुर नरेश ने 20 लाख युद्ध के हर्जाने के रूप में अंग्रेजों को दिये।
1807 ई. जयपुर व जोधपुर की सेना के बीच परबतसर की घाटी (गिंगोली) में युद्ध हुआ। जोधपुर की सेना हारी।
1810 ई. उदयपुर के महाराणा भीमसिंह ने अमीर खाँ के प्रस्ताव पर कृष्णा कुमारी को जहर पीला कर मार डाला।
1817 ई. नवम्बर 9, करौली राज्य ने अंग्रेजों से मित्रता व सहायता की संधि की।
26 दिसंबर 1817 कोटा राज्य ने अंग्रेजों से मित्रता व सहायता की संधि की।
31 अक्टूबर 1818 सिरोही राज्य की अंग्रेजों से मित्रता व सहायता की संधि हुई।
1832 ई. अजमेर में राजपूताना रेजीडेन्सी कायम।
1834 ई. कोटा तथा उदयपुर राज्यों में कन्यावध गैर कानूनी घोषित।
1835 ई. जोधपुर लीजियन का गठन।
1837 ई. एरिनपुरा छावनी (सिरोही) स्थापित की गई।
1839 ई. अजमेर कमिश्नर सदरलैण्ड ने अंग्रेजी सेना लेकर जोधपुर दुर्ग पर कब्जा किया।
1841 ई. मेवाड भील कोर की स्थापना।
1842 ई. अलवर व भरतपुर राज्यों में अंग्रेजी शिक्षा की पहली स्कूल स्थापित।
1844 ई. जयपुर, जोधपुर, उदयपुर राज्यों में कन्या वध गैर कानूनी घोषित।
1847 ई. जयपुर राज्य में बच्चों को बेचने को अवैध घोषित किया।
1848 ई. अजमेर नगर की पहली बार जनगणना।
1853 ई. उदयपुर में डाकन प्रथा गैर-कानूनी घोषित।
1856 ई.जयपुर में रामनिवास बाग की नींव रखी गयी।
1857 ई. भारत में सिपाही विद्रोह मेरठ से प्रारंभ।
1860 ई. झालावाड़ नरेश पृथ्वी सिंह ने झालरापाटन के पास नवलखा दुर्ग की नींव रखी।
1861 ई. बीकानेर नरेश को सिपाही विद्रोह के वक्त की सेवा के उपलक्ष्य में सिरसा जिले के टी.बी. परगने के 41 गाँव मिले।
1863 ई. बूंदी में अंग्रेजी स्कूल खुला।
1864 ई. आऊवा के कुशाल सिंह, आजादी की अलख जगाने वाले सूरमा का उदयपुर में स्वर्गवास हुआ।
1865 ई. उदयपुर में अंग्रेजी भाषा की शिक्षा दी जाने लगी।
1867 ई. टोंक का नवाब राजगद्दी से हटाया गया तथा लावा ठिकाना टोंक से स्वतंत्र किया गया।
1867 ई. जोधपुर में प्रथम अंग्रेजी स्कूल खुला।
1872 ई. बीकानेर में पहला सरकारी स्कूल खुला।
1873 ई. कोटा में पहला डाकघर खुला।
12 जून, 1874 स्वामी दयानंद सरस्वती की सत्यार्थ प्रकाश ग्रन्थ की रचना। प्रकाशन 1882, उदयपुर से।
10 अप्रैल, 1875 आर्य समाज की मुम्बई में स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापना।
1883 1863 ई. आर्य समाज की परोपकारिणी सभा का पुनर्गठन कर उदयपुर में पंजीयन हुआ।
1890 ई. भीलवाड़ा में कपास और ऊन ओटने का कारखाना स्थापित
1897 ई. बिजौलिया किसान आंदोलन प्रारंभ।
1908 ई. अजमेर में राजपूताना संग्रहालाय स्थापित।
1912 जोधपुर में चीफ कोर्ट की स्थापना।
23 दिसम्बर, 1912 दिल्ली में वायसराय हार्डिंग पर चाँदनी चौक में फेंका गया।
1913 ई. बांसवाड़ा में शासन द्वारा आक्रांत किये जाने पर भील आंदोलन का प्रारंभ।
1915 जोधपुर में मरुधरा हितकारिणी सभा स्थापित। जोधपुर में अजायबघर तथा पुस्ताकालय की स्थापना।
1916 ई. बिजौलिया किसान आंदोलन का नेतृत्व विजयसिंह पथिक ने संभाला।
1918 ई. झालावाड़ नरेश को वंशानुगत महाशाज राणा की पदवी भारत सरकार द्वारा।
1920 ई. जोधपुर में मारवाड़ सेवा संघ का भंवरलाल सर्राफ की अध्यक्षता में गाठन हुआ।
1921 ई. जमना लाल बजाज ने राव बहादुर की पदवी त्यागी।
1922 ई. सिरोही राज्य की शोहिड़ा तहसील में मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में भील व रास्सिया आंदोलन हुआ।
1924 ई. मरुधर मित्र हितकारिणी सभा का नाम बदलकर मारवाड़ हितकारिणी सभा किया गया।
1925 ई. जोधपुर के इतिहासाकार जगदीश सिंह गहलोत ने पहली बार राजस्थान की भाषा राजस्थानी घोषित करने तथा राजस्थानी साम्मोलान (अकादमी) स्थापित करने की माँग विभिन्न रियासतों से की।
1926 ई. जोधपुर राज्य ने दणोणा प्रथा बंद की।
जुलाई, 1931 - जयपुर प्रजामण्डल की स्थापना।
सितम्बर, 1931 - कोटा में हाड़ौती प्रजामण्डल की स्थापना।
नवम्बर, 1931 - जोधपुर हवाई क्लब खुला।
नवम्बर, 1931 - बूंदी में प्रजामण्डल की स्थापना।
1933 ई. झालावाड़ नरेश ने मंदिरों में अछूतों को दर्शन करने की छूट दी और छुआछूत समाप्त किया।
1934 ई. मारवाड़ प्रजामण्डल स्थापित।
1935 ई. लोहारू के सिंहानी तथा आसपास के अन्य गाँवों में भीषण गोलीकाण्ड व नृशंस हत्याकाण्ड।
4 अक्टूबर, 1936 बीकानेर प्रजामण्डल की स्थापना।
नवम्बर, 1936 जयपुर प्रजामण्डल का पुनर्गठन।
1938 ई. जोधपुर में मारवाड़ लोकपरिषद् की स्थापना की गई।
1939 ई. सिरोही में प्रजामण्डल की स्थापना।
1941 ई. टोंक में मजलिसे आम का उद्घाटन।
1942 ई. प्रजामण्डल के स्थान पर बीकानेर राज्य प्रजा परिषद् स्थापित हुई। जयपुर में हाईकोर्ट स्थापित किया गया।
1942 ई. जोधपुर में उत्तरदायी शासन मांग दिवस मनाया गया।
1943 ई. बीकानेर नरेश गंगासिंह का देहान्त हुआ।
1944 ई. जोधपुर राज्य के उन समस्त कैदियों को जो भारत रक्षा नियम के अन्तर्गत जेल में थे, मुक्त कर दिया।
1945 ई. बीकानेर में संवैधानिक सुधारों की घोषणा की गई।
1946 ई. जैसलमेर जेल में सागरमल गोपा को पेट्रोल से जलाकर मार डाला।
26 नवम्बर, 1946 झालावाड़ प्रजामण्डल की स्थापना।
1947 ई. राजपूताना विश्वविद्यालय की स्थापना।
1 अप्रैल, 1947 जोधपुर राज्य का नया संविधान लागू। जोधपुर में हाईकोर्ट स्थापित।
1948 ई. सिरोही को गुजरात राज्य ऐजेन्सी का भाग बना दिया गया।
30 मार्च, 1949 जयपुर, जोधपुर बीकानेर, जैसलमेर राज्य वृहत राजस्थान सम्मिलित।
7 अप्रैल 1949 राजस्थान प्रशासन अध्यादेश बनाया जाकर लागू किया गया। जयपुर में राजस्थान का प्रथम मंत्रिमण्डल हीरालाल शास्त्री की अध्यक्षता में बनाया गया। जयपुर नरेश मानसिंह राज प्रमुख बने।
15 मई, 1949 मत्स्य संघ राज्य में सम्मिलित।
22 दिसंबर 1949 राजस्थान लोकसेवा आयोग कानून लागू किया गया।
1950ई. अजमेर भारत में विलीन हुआ। तथा सिरोही राज्य की आबू तथा देलवाड़ा तहसीलों को छोड़कर, जो बम्बई राज्य में मिलाई गई थी, राजस्थान में सम्मिलित।
1951 ई. हीरालाल शास्त्री ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा। जयनारायण व्यास राजस्थान के मुख्यमंत्री बने।

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