रणथम्भौर का किला - आज की इस पोस्ट में "रणथम्भौर दुर्ग/रणथम्भौर का किला" पर विस्तृत लेख लिखा गया है। Ranthambore Ka Kila History in Hindi - इसमें रणथम्भौर के किले का इतिहास, रणथम्भौर का युद्ध कब हुआ, रणथम्भौर किला सवाई माधोपुर राजस्थान, रणथम्भौर का निर्माण किसने करवाया, रणथम्भौर के दर्शनीय/पर्यटन स्थल आदि बिंदुओं को शामिल किया गया है। आप इसको पूरा जरूर पढ़ें:- 
रणथम्भौर दुर्ग/रणथम्भौर का किला - Ranthambore Fort | Ranthambore Ke Kile Ka Itihas
रणथम्भौर दुर्ग

रणथम्भौर के किले का इतिहास

  • रणथम्भोर दुर्ग का वास्तविक नाम - 'रन्त:पुर' जिसका शाब्दिक अर्थ होता है - रण की घाटी में स्थित नगर।
  • रणथम्भौर दुर्ग के उपनाम - दुर्गाधीराज, हम्मीरकी आन बान का प्रतीक, चित्तौड़गढ़ के किले का छोटा भाई आदि।
  • रणथम्भोर दुर्ग का निर्माण - रणथंबोर दुर्ग का निर्माण आठवीं शताब्दी में महेश्वर के ठाकुर रंतिदेव ने करवाया था। एक अन्य मत के अनुसार नागिल जाटों द्वारा 944 ईसवी में रणथम्भोर दुर्ग का निर्माण करवाया गया था।
  • रणथम्भोर दुर्ग का आकार अंडाकार है।
  • अबुल फजल ने कहा है कि 'अन्य सब दुर्ग तो नंगे है जबकि यह दुर्ग बख्तरबंद है' |
  • रणथम्भोर दुर्ग राजस्थान का एकमात्र ऐसा दुर्ग है जिसमें मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर स्थित है।
  • रणथम्भोर दुर्ग में 32 खंभों की छतरी (जिसे न्याय की छतरी का जाता है) स्थित है।
  • इस दुर्ग में गुप्त गंगा, त्रिनेत्र गणेश मंदिर स्थित है।
  • रणथम्भोर दुर्ग में 11 जुलाई, 1301 ईस्वी को साका हुआ था। यह राजस्थान का पहला साका था।
  • रणथम्भोर दुर्ग में प्रसिद्ध स्थल - जोहर महल, गणेश जी का मंदिर, पीर सदरुद्दीन की दरगाह, सुपारी महल, जोगी महल, बादल महल, जोरां-भोरां, हम्मीर महल, फौजी छावनी, रनिहाड़ तालाब, लक्ष्मी नारायण मंदिर आदि।
  • रणथम्भोर दुर्ग के प्रमुख दरवाजे - नौलखा दरवाजा, गणेश पोल, हाथीपोल, सूरजपोल, त्रिपोलिया दरवाजा आदि।
  • तराइन के द्वितीय युद्ध 1192 में अजमेर शासन पृथ्वीराज चौहान तृतीय के मोहम्मद गोरी के हाथों पराजित होने के बाद उसके पुत्र गोविंद राज ने यहां शासन स्थापित किया था।
  • रणथम्भोर दुर्ग का प्रथम साका - रणथम्भोर का सबसे प्रतापी एवं प्रसिद्ध शासक हम्मीर देव चौहान था। जिसने दिल्ली सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के विद्रोही सेनापति मुहमदशाह को शरण प्रदान की थी। जिस वजह से अलाउद्दीन खिलजी क्रोधित होकर 1300 ईस्वी में रणथम्भोर दुर्ग पर आक्रमण किया था। कई दिनों तक डेरा डालने के बाद भी सफल न होने पर अलाउद्दीन खिलजी छल-कपट से हम्मीर देव के दो विश्वस्त मंत्रियों को अपनी ओर झुका लेता है जिनसे दुर्ग के गुप्त रास्ते पता कर दुर्ग को भेद कर अंदर पहुंच गया था। राणा हम्मीर लड़ता हुआ वीरगति को प्राप्त होता है तथा हम्मीर की रानी रंगदेवी, अन्य रानियों एवं दुर्ग की स्त्रियों ने जोहर किया था। जुलाई 1301 ईस्वी में रणथंबोर दुर्ग पर अलाउद्दीन खिलजी का अधिकार हो गया था। यह शाखा राजस्थान का प्रथम शाखा था।
  • 1569 ईस्वी में मुगल बादशाह अकबर की सेना ने रणथम्भोर दुर्ग पर आक्रमण किया था परंतु विफल रहे। तब आमेर के शासक भगवंतदास के प्रयासों से रणथम्भोर दुर्ग के अधिपति बूंदी के राव सुरजन हाडा ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली एवं रणथम्भोर दुर्ग को अकबर को सौंप दिया था। अकबर ने रणथम्भोर को अजमेर सुबे का एक सरकार बना दिया था एवं यहां एक सिक्के ढालने की टकसाल स्थापित की थी।
  • रणथम्भौर दुर्ग के बारे में जलालुद्दीन ने कहा है कि "मैं ऐसे 10 दुर्गों को मुसलमान के एक बाल के बराबर भी नहीं समझता"
  • रणथम्भौर दुर्ग के बारे में अमीर खुसरो ने कहा है कि "कुफ्र का गढ़ इस्लाम का घर हो गया है।"

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