राजस्थान  जिला दर्शन : 'अलवर जिला दर्शन'

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Alwar GK : Alwar Jila Darshan


    "राजस्थान का सिंह द्वार" नाम से प्रसिद्ध अलवर जिले की स्थापना कच्छवाहा वंश के राव राजा प्रताप सिंह द्वारा की गई थी। महाजनपद काल में यह क्षेत्र मत्स्य जनपद के नाम से प्रसिद्ध था और इसकी राजधानी विराटनगर (वर्तमान में बैराठ) थी।

    अलवर के उपनाम | अलवर जिले के प्राचीन नाम


    • राजस्थान का सिंह द्वार
    • पूर्वी राजस्थान का कश्मीर
    • राजस्थान का स्कॉटलैंड
    • साल्व प्रदेश
    • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)

    अलवर का सामान्य परिचय | Alwar ka Introduction


    • अलवर जिले का क्षेत्रफल 8380 वर्ग किलोमीटर (लगभग)
    • अलवर की सीमा पर पड़ोसी जिले - भरतपुर, दौसा, जयपुर, व सीकर है .

    अलवर जिले की मानचित्र के अनुसार स्थिति


    🔰अक्षांशीय स्थिति 27 डिग्री 4 मिनट उत्तरी अक्षांश से 28 डिग्री 4 मिनट उत्तरी अक्षांश तक

    🔰देशांतरीय स्थिति : 76 डिग्री 7 मिनट पूर्वी देशांतर से 77 डिग्री 13 मिनट पूर्वी देशांतर तक

    अलवर जिले की तहसीलें | Alwar ki Tahsil


    'राजस्थान का सिंह द्वार',अलवर जिले में कुल 16 तहसीलें हैं जिनके नाम निम्नानुसार है:-

    • अलवर 
    • मालाखेड़ा 
    • थानागाजी 
    • कोटकासिम 
    • किशनगढ़ बास 
    • लक्ष्मणगढ़ 
    • तिजारा 
    • राजगढ़ 
    • गोविंदगढ़ 
    • मुंडावर 
    • कठूमर 
    • बहरोड 
    • बानसूर 
    • नीमराना 
    • रैणी 
    • रामगढ़

    अलवर के विधानसभा क्षेत्र | Alwar me Vidhansabha xetr ke name


    'राजस्थान का स्कॉटलैंड' अलवर में कुल 11 विधानसभा क्षेत्र है, जिनके नाम इस प्रकार है:-

    • तिजारा 
    • मुंडावर 
    • किशनगढ़ बास 
    • बानसूर 
    • अलवर शहर 
    • कठूमर 
    • रामगढ़ 
    • बहरोड 
    • थानागाजी 
    • अलवर ग्रामीण 
    • राजगढ़-लक्ष्मणगढ़

    2011 की जनगणना के अनुसार अलवर जिले की जनसंख्या/घनत्व/लिंगानुपात साक्षरता के आंकड़े


    • अलवर की कुल जनसंख्या : 36,74,179
    • अलवर की पुरुष जनसंख्या : 19,39,026 
    • अलवर की महिला जनसंख्या : 17,35,153
    • अलवर में जनसंख्या घनत्व : 438 प्रति वर्ग किलोमीटर
    • अलवर में दशकीय वृद्धि दर : 22.8 प्रतिशत। 
    • अलवर में लिंगानुपात : 895
    • अलवर में ग्रामीण लिंगानुपात : 900
    • अलवर में शहरी लिंगानुपात : 872

    अलवर के प्रमुख मेले एवं त्यौहार | Rajasthan ke mele 


     मेला 
    स्थान  
    दिन  
     भृर्तहरि 
    भृर्तहरि (महान योगी भृर्तहरि की तपो भूमि)

    भाद्रपद शुक्ला 08  
     बिलारी माता 
    बिलारी  
    चैत्र शुक्ला 7-8  
     चंद्र प्रभु मेला 
    तिजारा, अलवर  
    फाल्गुन शुक्ला सप्तमी व श्रावण शुक्ला दशमी  

    अलवर का ऐतिहासिक परिदृश्य/विवरण | Alwar ki Complete Details 

    अलवर की स्थापना कछवाहा वंश के राव राजा प्रताप सिंह ने 1770 ईस्वी में की थी। अलवर महाजनपद काल में मत्स्य जनपद के नाम से प्रसिद्ध था और इसकी राजधानी विराटनगर थी।  ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने अपना अज्ञातवास विराटनगर के राजा के यहां पर ही बिताया था। स्वतंत्रता के पश्चात राजस्थान के एकीकरण का प्रथम चरण 18 मार्च, 1948 को संपन्न हुआ था, जिसमें मत्स्य संघ की स्थापना की गई थी। मत्स्य संघ में कुल 4 जिले यथा अलवर, भरतपुर, धौलपुर तथा करौली शामिल है। वर्तमान में अलवर जिला जयपुर संभाग के अंतर्गत आता है।

    अलवर जिले के प्रमुख मंदिर | अलवर के शीर्ष मंदिर

    • बाबा मोहनराम का थान
    • नारायणी माता का मंदिर
    • तिजारा जैन मंदिर, तिजारा में
    • नौगजा जैन मंदिर
    • रावण पार्श्वनाथ मंदिर
    • नौगांवा के जैन मंदिर

    अलवर के दर्शनीय स्थल | अलवर के पर्यटन स्थल

    ✍मूसी महारानी की छतरी:-

    मुसी महारानी की छतरी का निर्माण सन् 1815 में महाराजा विनय सिंह ने महाराजा बख्तावर सिंह की पासवान महारानी मूसी महारानी की स्मृति में करवाया था। यह छतरी लाल पत्थर व सफेद संगमरमर से बनी हुई है। यह छतरी दो मंजिली है। यह छतरी संगमरमर के कुल 80 कलात्मक खंभों पर टिकी हुई है, इसलिए इस छतरी को 80 खंभों की छतरी भी कहते हैं। यह छतरी अलवर राज महल के पिछवाड़े में सागर तालाब के किनारे बनी हुई है।

    ✍सिलीसेढ़ झील :-

    इस झील को राजस्थान का 'नंदनकानन' भी कहा जाता है। यह झील अलवर की सबसे प्रसिद्ध और सुंदर झील है। इस झील का निर्माण महाराजा विनय सिंह ने 1845 में अपनी रानी शीला के लिए करवाया था। 

    ✍अलवर का किला ( बाला किला ) :-

    अलवर के किले का निर्माण कोकिल देव के पुत्र अलघुराय ने करवाया था तथा इस दुर्ग का पुन:निर्माण हसन खान मेवाती ने करवाया था। यह दुर्ग 'गिरी दुर्ग' की श्रेणी में आता है। इस किले के किनारे जहांगीर (सलीम) ने सलीम महल तथा सलीम सागर का निर्माण करवाया।

    बाला किले में प्रवेश के लिए 6 प्रवेश द्वार हैं - चांदपोल, सूरजपोल ,जयपोल, किशनपोल, अंधेरी गेट एवं लक्ष्मणपुर। इस किले में 3359 कंगूरे, 15 बड़ी और 51 छोटी बुर्जें है। इस किले पर कभी युद्ध नहीं हुआ, इसलिए इस किले को बाला किला अथवा कुंवारा किला के नाम से भी जाना जाता है।

    ✍सिटी पैलेस :-

    अलवर के महाराजा विनय सिंह ने 1776 में विनय विलास महल के नाम से इसका निर्माण करवाया था जिसे अब सिटी पैलेस के नाम से जाना जाता है।

    ✍सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण:-

    'सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण' की स्थापना 1955 में की गई थी। इसे "बाघों की मांद" नाम से भी जाना जाता है। यह अभ्यारण 1978-79 में राज्य की दूसरी बाघ परियोजना के अंतर्गत शामिल हो गया। यह अभ्यारण हरे कबूतरों के लिए प्रसिद्ध है। कांकणवाडी का किला भी सरिस्का अभ्यारण में स्थित है।

    ✍विजय मंदिर पैलेस :-

    इसका निर्माण महाराजा जयसिंह द्वारा विजय सागर बांध के तट पर सन 1918 में करवाया गया। यहां पर सीताराम का मंदिर है।

    ✍पांडुपोल :-

    ऐसा माना जाता है कि पांडवों के अज्ञातवास के दौरान जब कौरवों की सेना ने उन्हें घेर लिया था तब भीम ने अपनी गदा से पहाड़ पर प्रहार करके एक रास्ता बनाया था जिसे ही पांडुपोल कहते है। यहां पर भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी व पंचमी को हनुमानजी का लक्खी मेला भरता है। यहां पर लेते हनुमानजी की प्रतिमा है।

    अलवर के अन्य पर्यटक स्थल | अलवर के दर्शनीय स्थल

    • तिजारा :- अलाउद्दीन आलमशाह का मकबरा और चंद्रप्रभुजी का प्रसिद्ध जैन मंदिर।
    •  डीकर :- आदिमानव के बनाए हुए शैल चित्र।
    • होप सर्कस (कैलाश बुर्ज) :-  1939-40 ईस्वी में तत्कालीन वायसराय लार्ड लिनलिथगो के अलवर आगमन पर उनकी पुत्री मिस होप के नाम पर बनाया गया। 
    • विजय सागर बांध :- विजय सागर बांध 1903 में जयसिंह ने बनवाया। 
    • भृर्तहरि :  यहां पर प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ला अष्टमी को  भृर्तहरि का मेला भरता है। यह नाथों का प्रसिद्ध स्थल है। 
    • पुर्जनविहार :-  इसे 'कंपनी गार्डन' भी कहते है।  
    • अन्य पर्यटक स्थल :- ताल वृक्ष, फतहगंज गुंबद, सरिस्का पैलेस, शिमला, सागर, नीलकंठेश्वर धाम, अलवर संग्रहालय, अहीरवाटी, ईटराना की कोठी, नारायणी माता का मंदिर इत्यादि। 

    अलवर के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न | अलवर के तथ्य

    • राजस्थान की 'प्रथम प्याज मंडी' अलवर में स्थित है। 
    • भारत का पहला 'इंटीग्रेटेड ट्रेफिक मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट' अलवर में खुलेगा। 
    • भारत का पहला 'राष्ट्रीय स्तर का खेल गांव' जरौली, तिजारा (अलवर)
    • भारत का प्रथम 'जल विश्वविद्यालय' अलवर में। 
    • राजस्थान के चंदोली (अलवर ) स्थान पर भारत के प्रथम 'माइनॉरिटी साइबर विलेज' का उद्घाटन किया गया। 
    • देश का प्रथम राष्ट्रीय उत्पादन एवं निवेश केंद्र अलवर में। 
    • देश का प्रथम 'मॉडल जिला'  अलवर हैं। 
    • करेंसी नोटों की स्याही बनाने का कारखाना  भिवाड़ी (अलवर में)
    • राजस्थान का एकमात्र 'शूकर प्रजनन केंद्र' अलवर में। 
    • राजस्थान का पहला जिला जिसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल किया गया। 
    • सर्वाधिक 16 तहसीलें अलवर में। 
    • शहरी जनसंख्या में सर्वाधिक दशक की वर्दी 50.5% अलवर में
    • सबसे छोटा अभयारण्य 'सरिस्का अभ्यारण' अलवर में। 
    • कनिंघम ने शाल्वपुर की अलवर नगर के रूप में पहचान की थी। 
    • मुर्रा नस्ल की सर्वाधिक भैंस अलवर में। 

    अलवर के खनिज | Alwar me Mukhy khanij 

    • संगमरमर - खो दरीबा, राजगढ़, बादामपुर। 
    • खो दरीबा तांबे के लिए प्रसिद्ध है। 
    • लोह अयस्क - राजगढ़ एवं पुरवा से। 
    • झबराना, नीमराना - स्लेटी पत्थर के लिए। 

    अलवर चित्रशैली | Alwar ki Chitrakala Shaili

    यह शैली मुगल शैली तथा जयपुर शैली का सम्मिश्रण माना जाता है। इस शैली का स्वर्णकाल विनय सिंह का काल कहलाता है।  यह चित्रशैली गणिकाओं/वैश्याओं के चित्रों  एवं बसलो चित्रण ( बॉर्डर पर चित्रण ) के लिए प्रसिद्ध है। इस शैली में राजपूती वैभव, विलासिता, रामलीला, शिव आदि का अंकन किया हुआ है। 
    आज के इस पोस्ट में हमने "अलवर जिला दर्शन" को पूरा करने की कोशिश की है।  इसमें हमने हर संभव हर प्रश्न को शामिल किया है।  जिसमे  2011 की जनगणना के अनुसार अजमेर के आंकड़े, क्षेत्रफल, विभिन्न मंदिर, मेला, पर्यटक स्थल, अभ्यारण्य, दुर्ग, अलवर चित्रशैली, खनिज इत्यादि को पूरा अच्छी तरह से किया है। मैं उम्मीद करती हूँ की आपको यह पोस्ट अच्छी लगी होगी।  आप सभी पाठकों को यह पोस्ट कैसी लगी।  आप मुझे Comment Box में Comment जरूर करें। 
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